Thursday - 8 January 2026 - 12:21 PM

यूपी पंचायत चुनाव टलने के संकेत, ओबीसी आयोग न बनने से आरक्षण फंसा

जुबिली न्यूज डेस्क 

उत्तर प्रदेश में अप्रैल–मई 2026 में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर होते नजर नहीं आ रहे हैं। चुनाव टलने के संकेत इसलिए मिल रहे हैं क्योंकि अब तक समर्पित पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग का गठन नहीं हो सका है, जिससे पंचायतों में आरक्षण की प्रक्रिया अटकी हुई है।

ओबीसी आयोग न बनने से बढ़ी मुश्किल

पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार एक समर्पित आयोग द्वारा सर्वे और रिपोर्ट जरूरी है। नगर निकाय चुनाव की तर्ज पर पंचायत चुनाव में भी आयोग को हर जिले और ब्लॉक स्तर पर ओबीसी आबादी का आकलन कर रिपोर्ट देनी होती है।जब तक यह रिपोर्ट नहीं आती, तब तक आरक्षण अधिसूचना जारी नहीं हो सकती, और बिना आरक्षण चुनाव कराना संभव नहीं है।

सरकार का दावा—समय पर होंगे चुनाव

हालांकि, पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने दावा किया है कि पंचायत चुनाव तय समय पर ही कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे और आयोग के गठन पर निर्णय लिया जाएगा।राजभर के मुताबिक,“जैसे ही आयोग बनेगा, वह दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप देगा।”

आयोग गठन का प्रस्ताव लंबित

पंचायतीराज विभाग ने 6 सदस्यीय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है, लेकिन अब तक इस पर अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है। यही वजह है कि पंचायत चुनाव की तैयारियां अधर में लटकी हुई हैं।

SC-ST आरक्षण तय, OBC पर पेंच

  • 2011 की जनगणना के अनुसार

    • अनुसूचित जाति (SC): 20.69%

    • अनुसूचित जनजाति (ST): 0.56%
      इसी अनुपात में पंचायतों में SC-ST आरक्षण तय किया जाना है।

  • ओबीसी की जनसंख्या जनगणना में दर्ज नहीं है।

    • वर्ष 2015 के रैपिड सर्वे के अनुसार ग्रामीण आबादी में ओबीसी की हिस्सेदारी 53.33% बताई गई है।

इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार किसी भी ब्लॉक या पंचायत में ओबीसी आरक्षण 27% से अधिक नहीं हो सकता, चाहे वहां ओबीसी आबादी ज्यादा ही क्यों न हो।

नगर निकाय की तरह पंचायतों में भी सर्वे जरूरी

सरकार नगर निकाय चुनावों की तरह पंचायत चुनावों में भी पहले समर्पित आयोग से सर्वे, फिर रिपोर्ट और उसके बाद ही आरक्षण तय करने की प्रक्रिया अपनाएगी। आयोग की रिपोर्ट के बिना चुनाव कराने पर कानूनी अड़चनें आ सकती हैं।

क्या टल सकते हैं पंचायत चुनाव?

अगर फरवरी–मार्च तक आयोग का गठन और रिपोर्ट तैयार नहीं हो पाती, तो अप्रैल–मई में पंचायत चुनाव कराना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में चुनावों के टालने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता

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