जुबिली न्यूज डेस्क
उत्तर प्रदेश भाजपा में अब पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी और सार्वजनिक रूप से नाराज़गी जताना महंगा पड़ सकता है. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व ने ऐसे बगावती तेवर दिखाने वाले नेताओं और जनप्रतिनिधियों पर सख्ती करने का फैसला किया है.

बगावती नेताओं को देना होगा जवाब
यूपी भाजपा की अनुशासन समिति अब उन नेताओं और जनप्रतिनिधियों पर नजर रखेगी, जो:
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पार्टी कार्यक्रमों में अनुशासन तोड़ते हैं
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सार्वजनिक मंचों या मीडिया में पार्टी के खिलाफ बयान देते हैं
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संगठन या सरकार के कामकाज पर खुली नाराज़गी जताते हैं
ऐसे नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा.
संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो होगी कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, अगर नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो संबंधित नेता या जनप्रतिनिधि पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.
इसमें:
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संगठनात्मक पद से हटाना
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पार्टी कार्यक्रमों से दूरी
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भविष्य की जिम्मेदारियों पर रोक
जैसे कदम शामिल हो सकते हैं.
हाल के दिनों में बढ़ी है अंदरूनी नाराज़गी
पार्टी सूत्रों का कहना है कि हाल के दिनों में कई विधायक और पदाधिकारी अपनी नाराज़गी खुलकर जाहिर कर रहे हैं.
विकास कार्यों, टिकट वितरण, संगठनात्मक नियुक्तियों और आपसी मतभेदों को लेकर असंतोष के मामले बढ़े हैं, जो पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
2027 से पहले नुकसान नहीं चाहती BJP
भाजपा नेतृत्व नहीं चाहता कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इन बगावती तेवरों की वजह से पार्टी को राजनीतिक नुकसान हो. इसी को ध्यान में रखते हुए अनुशासन समिति को और सक्रिय किया जा रहा है.
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संगठन में कलह को रोकने की कोशिश
सूत्र बताते हैं कि:
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विकास कार्यों को लेकर असंतोष
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संगठन के पदाधिकारियों के बीच आपसी टकराव
आगे चलकर पार्टी के लिए बड़ी चुनौती न बन जाए, इसलिए अब कड़ी निगरानी और सख्त अनुशासन लागू किया जाएगा.यूपी भाजपा में अब अनुशासन सर्वोपरि होगा. पार्टी के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी, नाराज़गी या बगावती रुख अपनाने वाले नेताओं पर जल्द ही कार्रवाई देखने को मिल सकती है.
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