उन्नाव रेप केस: क्‍या अस्‍पताल में भी पीड़िता को मारने की गई कोशिश

न्‍यूज डेस्‍क

लखनऊ के केजीएमयू में उन्नाव रेप पीड़िता के कराए गए कल्चर टेस्ट रिपोर्ट में खून में खतरनाक बैक्टीरिया होने की बात सामने आई है। इसकी वजह से उसे दी जाने वाली प्रमुख सात एंटीबायोटिक दवाओं में से छह बेअसर साबित हो रही हैं। केजीएमयू अब पीड़िता के कल्चर रिपोर्ट को एम्स भेजेगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक यह संदिग्‍ध बैक्टीरिया काफी रेयर है और मल में पाया जाता। यह ब्लड में कैसे पहुंचा इसका पता लगाया जाना चाहिए। इस बैक्टीरिया की वजह से दवाएं बेअसर हो जाती हैं। विशेषज्ञों ने इसे मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस करार दिया। पीड़िता में एंटिरोकोकस बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। इसकी रिपोर्ट एम्स भेज दी जाएगी।

केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. संदीप तिवारी के मुताबिक आइसीयू में भर्ती मरीजों को दी जाने वाली प्रमुख एंटीबायोटिक के प्रभाव की टेस्टिंग की गई। लैब में ड्रग सेंसिटीविटी टेस्टिंग में सात एंटीबायोटिक दवाओं की जांच की गई। उसमें से पीड़िता पर छह एंटीबायोटिक बेअसर पाई गईं।

गौरतलब है कि रायबरेली सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल पीड़ित युवती को लखनऊ के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था। जहां वेंटीलेटर यूनिट में उसका इलाज चला। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर पीड़िता को पांच अगस्त को एयरलिफ्ट कर दिल्ली के एम्स अस्पताल में शिफ्ट किया गया था।

यहां ट्रामा सेंटर में इलाज के दौरान पीड़िता का कल्चर टेस्ट किया गया था जिसकी रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में घातक ब्लड इंफेक्शन मिला है। उसके खून में एंटिरोकोकस बैक्टीरिया पाया गया है, जिसकी वजह से अधिकतर एंटीबायोटिक बेअसर पाई गईं।

ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि मल में पाया जाने वाला एंटिरोकोकस बैक्टीरिया पीड़िता के ब्‍लड में कैसे पहुंचा। क्‍या डॉक्‍टरों की लापरवाही ने पीड़िता के जीवन को खतरे में डाला या फिर किसी ने साजिशन उसके खून में इस संदिग्‍ध बैक्‍टीरिया को पहुंचाया।

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