ट्रंप का अल्टीमेटम, ईरान की तारीफ: भारत बनेगा शांति और सुरक्षा की चाबी

जुबिली न्यूज डेस्क
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध अब एक महीने से ज्यादा समय से जारी है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट खोलने और युद्ध समाप्ति पर कोई ठोस हल नहीं निकल पाया है। पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किए अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता कर रहे हैं, लेकिन अभी तक फाइनल समझौता नहीं बन सका।
ईरान ने भारत की कूटनीति की सराहना की
ईरान के सुप्रीम लीडर के भारत प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने कहा कि भारत इस जंग को रोकने और तनाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा,“इंडियन डिप्लोमेसी बहुत अच्छी है और वे इस मुद्दे में ज्यादा बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।”
इसके पहले ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने भी भारत की विदेश नीति की तारीफ करते हुए कहा था कि भारत अपनी संतुलित विदेश नीति के कारण तनाव कम करने और बातचीत को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।
ईरानी विदेश मंत्री का एस जयशंकर से संपर्क
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने रविवार देर रात अपने समकक्ष एस जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इज़राइल के हमले पूरे क्षेत्र और दुनिया की स्थिरता पर असर डाल सकते हैं और ईरान अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक चिंता
ईरान ने फारस और ओमान की खाड़ी में स्थित होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया है। हालांकि मित्र देशों के जहाज गुजर रहे हैं, लेकिन अमेरिका-इज़राइल के जहाजों को नहीं छोड़ा जाएगा।
- तेल और गैस की कीमतों में वैश्विक स्तर पर बढ़ोतरी हुई है
- भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है
भारत का फोकस
भारत पश्चिम एशिया में संघर्ष जल्द समाप्त करने और होर्मुज स्ट्रेट से ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। भारतीय अधिकारी मानते हैं कि यदि इस मार्ग की नाकेबंदी जारी रही तो भारत की ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा।



