ट्रंप का ‘इन्वेस्टमेंट’ कार्ड: ईरान जंग की तुलना विश्व युद्धों से की, बोले- ’34 दिन में दुश्मन को घुटनों पर लाए’

वॉशिंगटन: ईरान के साथ जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन दिया है। युद्ध की लंबी खिंचती अवधि और तेल की आसमान छूती कीमतों से डरे हुए अमेरिकी नागरिकों को शांत करने के लिए ट्रंप ने एक नया दांव खेला है। उन्होंने इस युद्ध को ‘अंतहीन जंग’ मानने से इनकार करते हुए इसे आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए एक “शानदार निवेश” (Great Investment) करार दिया है।
“यह जंग नहीं, बच्चों के भविष्य के लिए निवेश है”
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में भावुक और रणनीतिक तालमेल बिठाते हुए कहा कि यह सैन्य अभियान केवल सीमाओं की लड़ाई नहीं है। ट्रंप के मुताबिक, “मैं आज जो कर रहा हूँ, वह आपके बच्चों और पोते-पोतियों के लिए एक सुरक्षित दुनिया का निवेश है। हमने महज 32-34 दिनों में एक बेहद ताकतवर देश (ईरान) की सैन्य कमर तोड़ दी है।”
ऐतिहासिक युद्धों से तुलना: आंकड़ों के जरिए डर दूर करने की कोशिश
अमेरिकी नागरिकों के मन में वियतनाम और अफगानिस्तान जैसी लंबी जंगों का खौफ है। इसे दूर करने के लिए ट्रंप ने अमेरिकी इतिहास के प्रमुख युद्धों की समय सीमा (Timeline) गिनाई:
| युद्ध का नाम | अवधि (समय सीमा) |
| वियतनाम युद्ध | 19 साल, 5 महीने, 29 दिन |
| इराक युद्ध | 8 साल, 8 महीने, 28 दिन |
| द्वितीय विश्व युद्ध | 3 साल, 8 महीने, 25 दिन |
| कोरियाई युद्ध | 3 साल, 1 महीना, 2 दिन |
| प्रथम विश्व युद्ध | 1 साल, 7 महीने, 5 दिन |
| ईरान सैन्य ऑपरेशन | सिर्फ 34 दिन |
ट्रंप ने तर्क दिया कि दशकों तक चलने वाले संघर्षों के मुकाबले ईरान के खिलाफ यह ऑपरेशन बहुत छोटा और अत्यधिक प्रभावी रहा है।
ईरान की सैन्य शक्ति ‘बेअसर’ करने का दावा
ट्रंप ने दावा किया कि इस सैन्य अभियान का प्राथमिक लक्ष्य ईरान की हमला करने की क्षमता को पूरी तरह नष्ट करना था, जिसमें अमेरिका सफल रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि:
- ईरान अब अमेरिका या उसके सहयोगियों के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं रह गया है।
- अमेरिकी सेना ने अपनी ताकत के दम पर एक शक्तिशाली दुश्मन को बातचीत की मेज पर आने या झुकने को मजबूर कर दिया है।
- अमेरिका इस समय सैन्य और आर्थिक रूप से दुनिया में सबसे मजबूत स्थिति में खड़ा है।
प्रोपेगैंडा बनाम हकीकत
एक तरफ जहाँ ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिकी जनता को खुला पत्र लिखकर इसे ‘प्रोपेगैंडा’ बताया है, वहीं ट्रंप ने नागरिकों से अपील की है कि वे ‘प्रोपेगैंडा की धुंध’ से बाहर निकलकर हकीकत देखें। ट्रंप का यह बयान तब आया है जब चीन (बीजिंग) भी क्षेत्र में शांति की वकालत कर रहा है।
बड़ी बात: ट्रंप ने संकेत दिया है कि उनका मकसद पूरा हो चुका है और वह इस जंग को अनावश्यक रूप से खींचने के पक्ष में नहीं हैं, बशर्ते अमेरिकी हित सुरक्षित रहें।
