H-1B वीजा नीति पर ट्रंप प्रशासन बनाम डेमोक्रेटिक राज्य, कानूनी जंग तेज

जुबिली न्यूज डेस्क 

जनवरी में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से ही उनकी नीतियों को लेकर कानूनी विवाद लगातार सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में ट्रंप प्रशासन की एक अहम इमीग्रेशन नीति—H-1B वीजा पर प्रस्तावित $1,00,000 शुल्क वृद्धि—को लेकर 19 डेमोक्रेटिक राज्यों ने अदालत का रुख करने का फैसला किया है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह मुकदमा शुक्रवार (स्थानीय समय) को मैसाचुसेट्स की एक फेडरल कोर्ट में दायर किया जाएगा। यह इस नीति के खिलाफ कम से कम तीसरी कानूनी चुनौती होगी। इससे पहले अमेरिकी चेम्बर ऑफ कॉमर्स और यूनियनों, नियोक्ताओं व धार्मिक समूहों के गठबंधन ने भी इस शुल्क वृद्धि को अदालत में चुनौती दी थी।

क्या है मामला

H-1B वीजा प्रोग्राम अमेरिकी नियोक्ताओं को विशेषज्ञ पेशों—जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, शोध और तकनीकी क्षेत्रों—में विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति की अनुमति देता है। मौजूदा व्यवस्था में नियोक्ताओं को एक प्रारंभिक H-1B पिटीशन के लिए आमतौर पर $960 से $7,595 तक शुल्क देना होता है। लेकिन ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू की गई नई नीति के तहत यह शुल्क बढ़ाकर $1,00,000 कर दिया गया है।

कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बांटा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह “अवैध” शुल्क वृद्धि शिक्षकों, डॉक्टरों, नर्सों, शोधकर्ताओं और अन्य आवश्यक कर्मचारियों की भर्ती में बड़ी बाधा बन सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे कैलिफोर्निया समेत अन्य राज्यों में स्कूलों, अस्पतालों और विश्वविद्यालयों की आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

राज्यों के आरोप

मुकदमे में कहा गया है कि डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) द्वारा लागू यह नीति कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। राज्यों का आरोप है कि:

  • यह शुल्क कांग्रेस द्वारा अधिकृत सीमा से कहीं अधिक है,

  • H-1B प्रोग्राम के मूल उद्देश्य के खिलाफ है,

  • आवश्यक नियम बनाने की प्रक्रियाओं को दरकिनार करता है,

  • और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिनियम (APA) के तहत कार्यकारी शाखा को मिली शक्तियों से आगे जाता है।

इसके अलावा, राज्यों का कहना है कि यह शुल्क बिना APA की अनिवार्य “नोटिस और कमेंट” प्रक्रिया के लागू किया गया और इसके प्रभावों—खासकर सरकारी और गैर-लाभकारी संस्थानों पर—पर समुचित विचार नहीं किया गया।

बांटा का बयान

शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रॉब बांटा ने कहा, “कोई राष्ट्रपति अपनी मनमानी से हमारे स्कूलों, अस्पतालों और विश्वविद्यालयों को अस्थिर नहीं कर सकता। और कोई राष्ट्रपति कांग्रेस, संविधान या कानून को नजरअंदाज नहीं कर सकता।”

मुकदमा दायर करने वाले राज्य

इस मुकदमे में कैलिफोर्निया के साथ मैसाचुसेट्स, एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, हवाई, इलिनॉयस, मैरीलैंड, मिशिगन, मिनेसोटा, नेवाडा, नॉर्थ कैरोलिना, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क, ओरेगन, रोड आइलैंड, वर्मोंट, वॉशिंगटन और विस्कॉन्सिन शामिल हैं।कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बांटा और मैसाचुसेट्स की अटॉर्नी जनरल जॉय कैंपबेल इस कानूनी लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें-ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर में सबसे ज्यादा वोटर डिलीट!

इस मुकदमे को ट्रंप प्रशासन की सख्त इमीग्रेशन नीतियों के खिलाफ राज्यों की एक और बड़ी कानूनी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, जिसका असर आने वाले महीनों में अमेरिकी वीजा नीति और विदेशी पेशेवरों की भर्ती पर पड़ सकता है।

Related Articles

Back to top button