लॉकडाउन : देश के सबसे अमीर मंदिर तिरुपति बालाजी ने निकाले 1300 कर्मचारी

न्‍यूज डेस्‍क

कोरोना वायरस के सामुदायिक फैलाव को रोकने के लिए सरकार द्वारा किए गए 40 दिनों की देशव्यापी लॉकडाउन का अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन की वजह से कारोबार बंद होने से देश में 13.6 करोड़ लोगों के बेरोजगार होने का खतरा पैदा हो गया है। इसकी सबसे अधिक मार पर्यटन और होटल उद्योग के साथ मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है।

लॉकडाउन का असर छोटे-बड़े उद्योग धंधों के साथ-साथ देश के सबसे अमीर मंदिर पर भी पड़ा है। आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर में कार्यरत 1300 कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया है। इन कर्मचारियों का कॉन्ट्रैक्ट 30 अप्रैल को खत्म हो गया और मंदिर प्रशासन ने 1 मई से कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू करने से मना कर दिया है।

दरअसल तिरुपति बालाजी मंदिर प्रबंधन ने कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे 1300 कर्मचारियों को 1 मई से काम पर आने से मना कर दिया है। मंदिर प्रशासन ने कहा कि लॉकडाउन की वजह से काम बंद है, इसलिए अब इन 1300 कर्मचारियों के कॉन्ट्रैक्ट 30 अप्रैल से आगे नहीं बढ़ा पाएंगे।

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट की तरफ से तीन गेस्टहाउस चलाए जाते हैं, जिनके नाम विष्णु निवासम, श्रीनिवासम और माधवम है। निकाले गए सभी 1300 कर्मचारी इन्हीं गेस्ट हाउसों में कई वर्षों से काम करते थे।

तिरुपति बालाजी मंदिर के अध्यक्ष वाई वी सुब्बा रेड्डी ने कहा कि लॉकडाउन की वजह से सभी गेस्टहाउस बंद हैं, जिस वजह से इन कर्मचारियों का कॉन्ट्रैक्ट नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि नियमित कर्मचारियों को भी इस दौरान कोई काम नहीं सौंपा है।

टीटीडी ट्रस्ट के प्रवक्ता टी रवि का कहना है कि सभी फैसले कानून के मुताबिक लिए गए हैं। काम बंद होने की वजह से कर्मचारियों को निकालने का फैसला लेना पड़ा है। मंदिर प्रशासन की तरफ से निकाले जाने के बाद इन कर्मचारियों ने तिरुपति में स्थित मंदिर के बोर्ड ट्रस्ट ऑफिस के सामने प्रदर्शन भी किया।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस की वजह से तिरुपति बालाजी मंदिर 20 मार्च से बंद है, लेकिन मंदिर में दैनिक अनुष्ठान पुजारियों द्वारा किए जा रहे हैं. वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए इस मंदिर का बजट 3,309 करोड़ रुपये है।

Related Articles

Back to top button