आम बजट पर एनएमओपीएस ने इसलिए की है कड़ी आलोचना

केन्द्रीय बजट 22-23 से शिक्षकों कर्मचारियो को कुछ नहीं मिला/ इस बजट से पुरानी पेंशन पर बात करना तक वाजिब नहीं समझा गया : विजय कुमार ‘बन्धु’ 

जुबिली स्पेशल डेस्क

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में वित्तीय वर्ष 2022-23 का आम बजट पेश किया। कहा जा रहा है कि बजट में इन्फ्ऱास्ट्रक्चर पर ध्यान दिया गया है लेकिन बेरोजगारी और महंगाई को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई है।

वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 तक राजस्व घाटा जीडीपी के 4.5 प्रतिशत तक पहुंचने की बात कही गई है तो इस साल 2022/23 में राजस्व घाटा जीडीपी का 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

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2021/22 में संशोधित राजस्व घाटा GDP  का 6.9 प्रतिशत बताया गया है। फिलहाल सरकार 2022/23 में कुल 39.45 ट्रिलियन रुपए खर्च करेगी।

मोदी सरकार के इस बजट पर एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार ‘बन्धु’ ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आम बजट की आलोचना की है।

केंद्र सरकार ने आम बजट में शिक्षकों ,कर्मचारियों ,किसानों ,नौजवानों को निराश किया उनके हित में कोई कदम न उठा कर के उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाले निर्णय लिए गए।

शिक्षकों कर्मचारियों को टैक्स में कोई छूट न दे कर के बहुत बड़ा आघात पहुंचाया है। निजीकरण पर तेजी दिखा करके सरकार ने जता दिया कि हमारे एजेंडे में शिक्षक कर्मचारी न होकर के बड़े बड़े उद्योगपति हैं।

एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार ‘बन्धु’ ने कहा कि  सरकार की नजर में शिक्षक कर्मचारी की कोई  वैल्यू नहीं है और न ही उसके लिए कोई उनका नजरिया है, नहीं ही देश के विकास में उसका कोई योगदान है।उन्होंने बता दिया कि आप हमारे एजेंडे में नहीं हो और टैक्स देते रहो। हम आपके लिए कुछ नहीं करेंगे। देशभर के 70लाख शिक्षकों , कर्मचारियों के विषय पुरानी पेंशन बहाली पर कोई चर्चा न करके साफ साफ संदेश दे दिया कि इस विषय को हम सुनेंगे तक नहीं।

अटेवा के प्रदेश महामंत्री डॉक्टर नीरजपति त्रिपाठी ने बताया कि  शिक्षकों कर्मचारियों के लिर यह बजट पूरी तरह से निराशाजनक रहा। प्रदेश की सरकार ने  पुरानीपेंशन के मुद्दे पर पहले निराश किया ही था अब केंद्र सरकार ने भी अपनी मंशा स्पष्ट कर दिया।

प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ0 राजेश कुमार ने कहा कि बचत सीमा को भी नही बढ़ाया गया और न ही कोरोना योद्धाओ के हित में कोई कदम उठाया गया जो अत्यंत निराशाजनक है जबकि टैक्स दायरे को बढाये जाने को लेकर शिक्षकों व कर्मचारियों में काफी उम्मीद थी।

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