कैंसर से हार गईं शानदार लेखिका सादिया देहलवी

जुबिली न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली. कैंसर ने देश की प्रतिभाशाली लेखिका और टेलीविज़न के लिए काफी शानदार काम करने वाली सादिया देहलवी को हमसे छीन लिया. सादिया देहलवी 63 साल की थीं. मशहूर साहित्यिक पत्रिका शमा की शुरुआत उनके दादा हाफ़िज़ यूसुफ देहलवी ने 1938 में की थी. सादिया ने चार दशक तक महिलाओं, अल्पसंख्यकों, सूफिज्म और दिल्ली की विरासत और संस्कृति पर कलम चलाई.

सादिया बहुमुखी प्रतिभा की धनी थीं. एक तरफ वह शानदार लिखती थीं तो दूसरी तरफ टेलीविज़न के लिए उन्होंने कई धारावाहिक और वृत्तचित्रों का निर्माण भी किया. सादिया मशहूर पत्रकार खुशवंत सिंह और इतिहासकार इरफ़ान हबीब की करीबी दोस्त थीं.

सादिया देहलवी लिखने-पढ़ने वाले परिवार से ताल्लुक रखती थीं. लिखने-पढ़ने वाली दुनिया को ही उन्होंने भी अपनाया. दादा ने शमा पत्रिका शुरू की थी तो उन्होंने भी इस परम्परा को कायम रखा. उन्होंने बानो नाम से एक पत्रिका भी निकाली. दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में उनके हवेलीनुमा घर को भी शमा कोठी के नाम से जाना जाता है. इस कोठी में दिलीप कुमार और वहीदा रहमान जैसे सितारे मेहमान हुआ करते थे.

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सादिया खानदानी रूप से खाने की बेहद शौक़ीन थीं. उन्होंने अपनी माँ के साथ 1979 में एक रेस्टोरेंट अल कौसर के नाम से शुरू किया था. यह रेस्टोरेंट अपने कवाब के लिए मशहूर हुआ. दिल्ली के खानों पर उन्होंने एक किताब जैस्मिन एंड जिन्स : मेमोरीज़ एंड रेसिपीज़ ऑफ़ माई डेल्ही भी लिखी जो काफी मशहूर हुई.

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