Wednesday - 21 January 2026 - 5:21 PM

आतंकवाद और भ्रष्टाचार दोनों ही सत्ता पोषित विकृतियां

स्मिता जैन “रेवा’

आतंकवाद और भ्रष्टाचार दोनों ही सत्ता पोषित सामाजिक विकृतियां है जो सत्ता के भूखे लोगों के द्वारा पूंजीपतियों के साथ मिलकर मासूम और बेगुनाह आम जनता को लूटने और भ्रमित करने के लिए किया जाता है और करवाया जाता है।

जिसमें वर्तमान में और युगों से धर्म और जाति का सहारा लिया जाता है और सांप्रदायिकता का जहर फैलाकर उन्माद , दंगा फसाद और युद्ध का माहौल बनाया जाता है और युवा पीढ़ीयो को खत्म करने की साज़िश रची जाती है क्योंकि युवा पीढ़ी को जरूरत और हिस्सेदारी को आवश्यकता होती है अपना जीवनयापन करने हेतु और अपने परिवार का पोषण करने हेतु।

जब युवा पीढ़ी ही खत्म हो जायेगी तो उन सत्ता और धन पिपासुओं का धंधा और जीवन बहुत ही शानदार, आलीशान बन जायेगा और लंबी उम्र तक जीवित रहेंगे।

प्रायः ऐसे लोगों को अपनी मौत से डर लगता है क्योंकि वह तो ऐसा सोचते हैं कि वह अमर होकर आये है इस धरती पर शासन करने हेतु, सर्वशक्तिमान ईश्वर बनकर।

इसलिए वह नित नई चालबाजियों को सोचते और कार्यान्वित करते रहते हैं। इसके लिए वह नभ ,जल, वायु ,धरती ,अग्नि पर अपना आधिपत्य स्थापित करने की भरपूर कोशिशों को लालची और अति महात्वाकांक्षी लोगों को अपनी टीम में शामिल करते हैं जो उनके लिए किसी भी स्तर तक गिर कर उनके सिक्कों को और चंद रोटी बोटी के टुकड़े को पाकर मानवता विरोधी बनकर अपनी आत्मा, ईमान और ज्ञान को उनकी गुलामी में  एक गुलाम की तरह समर्पित कर सकते हैं।

 यही सो काल्ड, डबल स्टैंडर्ड, सभ्य समाज के रंगे और मज़े हुए  लोगों के द्वारा समाज और देश को ठगा जाता है क्योंकि ऐसे लोगों ने कभी पेट भर कर स्वादिष्ट भोजन नहीं खाया होता है और एक आलीशान जीवनयापन नहीं किया होता है ।

जो समाज को भ्रष्टाचार की गर्त में धकेल देते हैं और फिर जब इनके काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा या लाल डायरी खुलती हैं या खुलने की सुगबुगाहट तेज हो जाती है तो यह उन बेरोजगारों और दिशा हीन युवा पीढ़ीयो का इस्तेमाल करते हैं ।कभी आतंकवादी संगठन के रूप में, कभी सेना के जवानों की बलि चढ़ाकर , तो कभी सांप्रदायिकता को हथियार बनाकर अपना फायदा उठाते हैं।

ऐसे लोगों को इंसान नहीं कहा जा सकता है क्योंकि यह लोग सिर्फ और सिर्फ अपने ही लिए जीते हैं । अपने अहंकार की संतुष्टि,अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए एक के बाद एक निकृष्टतम काम करते जाते हैं और संपूर्ण विश्व की मानवता को खत्म करते हैं और उनका अंत एक गुमनाम जानवरों की तरह ही होता है या फिर आत्मग्लानि से आत्महत्या करने से होता है।

काश ! ऐसे मानवता विरोधी लोगों को परमपिता परमेश्वर सद्बुद्धि दे सकें ताकि खुद के साथ और अन्य लोगों के साथ न्याय हो सकें क्योंकि धरती के प्राकृतिक संसाधनों पर तो सभी का बराबरी का अधिकार है।

 

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