जुबिली स्पेशल डेस्क
पिछले वर्ष बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को दोबारा मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने की दिशा में सक्रिय हो गए हैं।
हाल ही में पटना में RJD के सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की बैठक बुलाई गई थी। इसके साथ ही चुनावी हार के कारणों की पड़ताल के लिए एक समिति का भी गठन किया गया था।
इन बैठकों के बाद जो संकेत सामने आ रहे हैं, उनसे साफ है कि जनवरी के अंत तक RJD में बड़े संगठनात्मक बदलाव किए जा सकते हैं। पार्टी के ढांचे में व्यापक फेरबदल की योजना पर काम चल रहा है।
तेजस्वी बन सकते हैं राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष
सबसे अहम बदलाव यह हो सकता है कि तेजस्वी यादव को RJD का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाए। हालांकि लालू प्रसाद यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे, लेकिन कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर संगठन और रणनीति से जुड़े सभी अहम फैसले तेजस्वी यादव के हाथ में होंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि व्यवहारिक रूप से तेजस्वी पहले से ही पार्टी के अधिकांश फैसले ले रहे हैं।
प्रदेश स्तर पर भी कार्यकारी अध्यक्ष की योजना
पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए प्रदेश स्तर पर भी एक कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाने की योजना है। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल अपने पद पर बने रह सकते हैं, लेकिन किसी युवा नेता को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर संगठन को नई धार देने की तैयारी है। यह नेता सड़कों पर JDU-BJP सरकार के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई करेगा।

युवा अल्पसंख्यक नेता को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार, पार्टी में प्रधान महासचिव पद पर भी नई नियुक्ति हो सकती है। इस पद या प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी किसी युवा अल्पसंख्यक नेता को दी जा सकती है। सीमांचल क्षेत्र से आने वाले किसी नेता के नाम पर भी विचार चल रहा है, ताकि वहां RJD की पकड़ मजबूत की जा सके।
संगठनात्मक बदलाव के बाद बिहार दौरे पर निकलेंगे तेजस्वी
पार्टी में फेरबदल के बाद तेजस्वी यादव राज्यव्यापी यात्रा पर निकल सकते हैं। यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि सीमांचल में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर चुके हैं और अल्पसंख्यक समुदाय सत्ता में हिस्सेदारी की मांग को लेकर मुखर हो रहा है।
RJD के सभी विंग भंग कर नए सिरे से गठन
तेजस्वी यादव पार्टी के सभी विंग को भंग कर नई नियुक्तियां करने की योजना बना रहे हैं। नए संगठन में सभी जातियों—कुशवाहा, दलित, सवर्ण और अन्य पिछड़ा वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। पार्टी नेतृत्व मानता है कि केवल यादव-मुस्लिम समीकरण के सहारे सत्ता में वापसी संभव नहीं है।
यादव आक्रामकता पर नियंत्रण और महिला वोटरों पर फोकस
RJD नेतृत्व यह भी मानता है कि यादव समाज की आक्रामक राजनीति पर नियंत्रण और अन्य पिछड़ी जातियों में भरोसा पैदा करना जरूरी है। इसके साथ ही महिला वोटरों तक पहुंच बनाना पार्टी की बड़ी चुनौती है। इसके लिए महिलाओं को संगठन में ज्यादा हिस्सेदारी देने पर विचार किया जा रहा है।
लालू नेपथ्य में, नई पीढ़ी पर दांव
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लालू प्रसाद यादव के सक्रिय राजनीति से नेपथ्य में जाने के बाद RJD में नई पीढ़ी का नेतृत्व उभरना तय है। कार्यकर्ता और समर्थक तेजस्वी यादव की नई टीम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
आने वाले समय में बिहार की राजनीति में BJP के नए अध्यक्ष नितिन नबीन, सम्राट चौधरी, JDU से निशांत कुमार, LJP के चिराग पासवान और RJD के तेजस्वी यादव के बीच कड़ा राजनीतिक मुकाबला देखने को मिल सकता है। ऐसे में सभी दल अपनी रणनीति बेहद सोच-समझकर तय कर रहे हैं।
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