and want to create
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लिट्फेस्ट
संध्या की बिखरी अलकों मे,निशा का फैला श्याम दुकूल…
संध्या की बिखरी अलकों मे, निशा का फैला श्याम दुकूल, मूक है मद्धिम है पदचाप, तुमको प्रेम सौंपना भूल। अधर…
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लिट्फेस्ट
मैं कभी कभी भगवान होना चाहता हूं, और सृजन कर देना चाहता…
मैं कभी कभी भगवान होना चाहता हूं, और सृजन कर देना चाहता हूं नई दुनिया का। हां, नई सृष्टि जिसमें…
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