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	<title>Jubilee Post &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<description>News &#38; Information Portal</description>
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		<title>सुप्रीम कोर्ट सख्त, यूपी सरकार की लापरवाही पर जताई नाराजगी, जानें मामला</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/supreme-court-strict-expressed-displeasure-over-up-governments/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Supriya Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Apr 2025 07:26:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[जस्टिस पारदीवाला]]></category>
		<category><![CDATA[बच्चों की तस्करी]]></category>
		<category><![CDATA[यूपी सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज डेस्क  सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की तस्करी के मामलों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान बाल तस्करी से जुड़े मामलों को गंभीर मानते हुए सभी राज्यों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="288" data-end="577"><span style="color: #0000ff"><strong>जुबिली न्यूज डेस्क </strong></span></p>
<p class="" data-start="288" data-end="577"><a href="https://www.sci.gov.in/hi/">सुप्रीम कोर्ट</a> ने बच्चों की तस्करी के मामलों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान बाल तस्करी से जुड़े मामलों को गंभीर मानते हुए सभी राज्यों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए।</p>
<p data-start="288" data-end="577"><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-316776 size-large" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/03/supreme-court-on-rohingya-children-1024x576.webp" alt="" width="618" height="348" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/03/supreme-court-on-rohingya-children-1024x576.webp 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/03/supreme-court-on-rohingya-children-300x169.webp 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/03/supreme-court-on-rohingya-children-768x432.webp 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/03/supreme-court-on-rohingya-children.webp 1280w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /></p>
<p class="" data-start="579" data-end="888">जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट कहा कि बाल तस्करी जैसे जघन्य अपराध पर किसी तरह की लापरवाही अवमानना मानी जाएगी। कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे भारतीय संस्थान द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट का अध्ययन करें और उसकी सिफारिशों को जल्द से जल्द लागू करें।</p>
<h2 data-start="895" data-end="931"><span style="color: #0000ff"> सुप्रीम कोर्ट के अहम निर्देश:</span></h2>
<ul data-start="933" data-end="1399">
<li class="" data-start="933" data-end="1033">
<p class="" data-start="935" data-end="1033">सभी हाई कोर्ट यह सुनिश्चित करें कि उनके यहां लंबित बाल तस्करी से जुड़े मामलों की समीक्षा हो।</p>
</li>
<li class="" data-start="1034" data-end="1119">
<p class="" data-start="1036" data-end="1119">इन मामलों में 6 महीने के भीतर सुनवाई पूरी की जाए और रोजाना सुनवाई की जाए।</p>
</li>
<li class="" data-start="1120" data-end="1232">
<p class="" data-start="1122" data-end="1232">यदि किसी अस्पताल से नवजात शिशु की तस्करी होती है, तो सबसे पहला कदम अस्पताल का लाइसेंस निलंबित करना होगा।</p>
</li>
<li class="" data-start="1233" data-end="1399">
<p class="" data-start="1235" data-end="1399">माता-पिता को सतर्क रहने की सलाह दी गई — क्योंकि जब बच्चा मरता है, तो वह ईश्वर के पास होता है, लेकिन जब तस्करी हो जाती है, तो वह अपराधियों की दया पर होता है।</p>
</li>
</ul>
<h3 class="" data-start="1406" data-end="1466"><strong><span style="color: #0000ff"> यूपी में बच्चों की तस्करी: सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी</span></strong></h3>
<p class="" data-start="1468" data-end="1559">सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की भूमिका पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा:</p>
<blockquote data-start="1561" data-end="1739">
<p class="" data-start="1563" data-end="1739"><span style="color: #ff0000"><strong>&#8220;हम इस बात से पूरी तरह निराश हैं कि यूपी सरकार ने इस मामले को कैसे संभाला। न अपील की गई, न गंभीरता दिखाई गई। ऐसा प्रतीत होता है जैसे आरोपी ने 4 लाख रुपये में &#8216;बेटा&#8217; खरीद लिया।&#8221;</strong></span></p>
</blockquote>
<p class="" data-start="1741" data-end="1952">जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि यह मामला सिर्फ अग्रिम जमानत का नहीं, बल्कि बाल तस्करी जैसे गंभीर अपराध से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी को बेटा चाहिए, तो वह चोरी या तस्करी किए गए बच्चे को नहीं खरीद सकता।</p>
<h3 class="" data-start="1959" data-end="1987"><strong><span style="color: #0000ff">NHRC रिपोर्ट बनी आधार</span></strong></h3>
<p class="" data-start="1989" data-end="2203">सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि वर्ष 2023 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भारतीय विकास संस्थान को देश में बाल तस्करी पर विस्तृत अध्ययन का काम सौंपा था। इस रिपोर्ट के आधार पर ही कोर्ट ने यह आदेश जारी किया।</p>
<p class="" data-start="2205" data-end="2347">कोर्ट ने कहा कि इन सिफारिशों को अब न्यायिक आदेश का हिस्सा बना दिया गया है, और सभी राज्य सरकारों को इन्हें तत्काल प्रभाव से लागू करना होगा।</p>
<p data-start="2205" data-end="2347"><span style="color: #993366"><strong>ये भी पढ़ें-<a style="color: #993366" href="https://www.jubileepost.in/ed-raids-the-house-of-congress-leader-khachariyawas-he-lashes-out-at-bjp/">कांग्रेस नेता खाचरियावास के घर पर ED की रेड, बीजेपी पर जमकर बरसे</a></strong></span></p>
<h3 class="" data-start="2354" data-end="2381"><strong><span style="color: #0000ff">अगली सुनवाई की तारीख</span></strong></h3>
<p class="" data-start="2383" data-end="2575">सुप्रीम कोर्ट ने 21 अप्रैल 2025 को सुनवाई के लिए इस मामले को फिर से सूचीबद्ध किया है। साथ ही, दिल्ली के अंदर और बाहर सक्रिय बाल तस्करी गिरोहों पर कार्रवाई की स्थिति पर भी रिपोर्ट मांगी है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एनसीडी और डिब्बाबंद खाद्य शिकायतों के जवाब में निर्णायक कार्रवाई</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/national-human-rights-commission-takes-decisive-action-in-response-to-ncd-and/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Supriya Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Nov 2023 12:24:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[एफएसएसएआई]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज डेस्क लखनऊ। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उच्च नमक, चीनी और संतृप्त वसा वाले डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान पर चिंता व्यक्त की है। क्वासी-न्यायिक निकाय ने इसे भारतीयों के जीवन के अधिकार और स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन करने वाला मामला करार देते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff"><strong>जुबिली न्यूज डेस्क</strong></span></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उच्च नमक, चीनी और संतृप्त वसा वाले डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान पर चिंता व्यक्त की है। क्वासी-न्यायिक निकाय ने इसे भारतीयों के जीवन के अधिकार और स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन करने वाला मामला करार देते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से उनके फ्रंट-ऑफ-पैक लेबल्स के चयन पर एक प्रतिक्रिया को बुलाया है, जो जानकारी प्रदान करनी चाहिए ताकि उपभोक्ता आसानी से स्वस्थ विकल्प मिल सकें।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-289972 size-large" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2023/11/WhatsApp-Image-2023-11-24-at-3.49.37-PM-1024x586.jpeg" alt="" width="618" height="354" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2023/11/WhatsApp-Image-2023-11-24-at-3.49.37-PM-1024x586.jpeg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2023/11/WhatsApp-Image-2023-11-24-at-3.49.37-PM-300x172.jpeg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2023/11/WhatsApp-Image-2023-11-24-at-3.49.37-PM-768x440.jpeg 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2023/11/WhatsApp-Image-2023-11-24-at-3.49.37-PM-1536x879.jpeg 1536w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2023/11/WhatsApp-Image-2023-11-24-at-3.49.37-PM.jpeg 1600w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /></p>
<p>1993 में गठित उच्च सम्मानित वैधानिक निकाय, जिसका एकमात्र उद्देश्य देश में मानवाधिकारों की रक्षा करना है, ने 14 सितंबर, 2021 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले की रहने वाली मानवाधिकार जननिगरानी समिति व सावित्री बाई फुले महिला पंचायत की सुश्री श्रुति नागवंशी और शिरीन शबाना खान द्वारा स्पष्ट चेतावनी देनी चाहिए और स्टार आधारित रेटिंग प्रणाली से लोगों को गुमराह नहीं करना चाहिए।&#8221;</p>
<p>इसे एक दुर्लभ अवसर बताते हुए मानवाधिकार जननिगरानी डॉ लेनिन रघुवंशी ने कहा की एनएचआरसी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी सुनवाई फुल कमीशन में निर्णय लिया| उन्होंने आगे कहा, &#8220;सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में, एफएसएसएआई के लिए स्टार रेटिंग के विचार को त्यागना उचित होगा। अलर्ट या चेतावनी लेबल समय की मांग है। पिछले दो वर्षों से अधिक समय से, पीपल नेटवर्क के लोग कह रहे हैं कि हमें बच्चे के स्वस्थ भोजन और स्वास्थ्य जीवन के अधिकार की रक्षा करने की आवश्यकता है। यह इस आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है और हमें उम्मीद है कि एफएसएसएआई इस पर ध्यान देगा। &#8221;</p>
<p>एफएसएसएआई की प्रस्तावित भारत पोषण रेटिंग (आईएनआर) पर टिप्पणी करते हुए, डॉ. युवराज सिंह ने कहा, &#8220;यह धारणा कि अस्वास्थ्यकर भोजन केवल फल या मेवे मिलाने से स्वस्थ बन सकता है, गलत है और इसमें वैज्ञानिक आधार का अभाव है। सितारों का निर्धारण एक जटिल स्कोरिंग प्रणाली पर आधारित है जो फलों या मेवों को शामिल करने जैसे सकारात्मक कारकों को महत्व देता है। यह &#8216;स्टार रेटिंग&#8217; इन उत्पादों के कई हानिकारक प्रभावों को छुपा सकती है और जनता को एक भ्रामक संदेश दे सकती है।</p>
<p>एफएसएसएआई से इंडिया न्यूट्रिशन रेटिंग को एफओपी लेबल डिज़ाइन के रूप में चुनने पर रिपोर्ट सबमिट करने के लिए कहने वाले पूर्ण आयोग पर अपना विश्वास जताते हुए मानवाधिकार जननिगरानी समिति की कार्यक्रम निदेशक सुश्री शिरीन शबाना खान ने कहा, &#8220;भारत से, जिसमें एम्स, आईआईपीएस, और डॉ. चंद्रकांत पांडव जैसे कुछ प्रमुख पोषण विशेषज्ञों द्वारा किए गए अध्ययन सहित, पर्याप्त साक्षात्कार है कि चेतावनी लेबल सबसे अच्छा काम करते हैं। दुनिया भर के देश भी अपने लोगों की सुरक्षा के लिए चेतावनी लेबल का अनुसरण कर रहे हैं। हमें सही और वैज्ञानिक चीजों पर क्यों ध्यान नहीं देना चाहिए?&#8221;</p>
<p>सुश्री नागवंशी याद दिलाती हैं कि यात्रा आसान नहीं रही है। एनएचआरसी स्वास्थ्य मंत्रालय और एफएसएसएआई को अनुस्मारक और नोटिस जारी करता रहा है, जिसका कोई जवाब नहीं मिला। अब जो नोटिस जारी किया गया है उसे नज़रअंदाज़ करना मुश्किल होगा क्योंकि यह जनमानस की जरूरत है।</p>
<p>मानवाधिकार जननिगरानी समिति के बारे में: मानवाधिकार जननिगरानी समिति (पीवीसीएचआर) अपनी स्थापना के बाद से ही बाल स्वास्थ्य और पोषण से संबंधित मुद्दों के काम कर रही है। कुपोषण के मामलों में हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता को पहचानते हुए, पीवीसीएचआर सक्रिय रूप से कुपोषण के दोहरे बोझ से निपटने में लगा हुआ है। अपने पिछले अनुभवों और रणनीतिक दृष्टिकोणों का लाभ उठाते हुए, पीवीसीएचआर ने महत्वपूर्ण उपायों की वकालत करने की पहल की है। विशेष रूप से, संगठन कुपोषण से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए चेतावनी लेबल के साथ फ्रंट ऑफ पैकेट लेबलिंग (एफओपीएल) की वकालत करने में सबसे आगे रहा है। अगस्त 2022 में, पीवीसीएचआर ने माननीय प्रधान मंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और भारत के बच्चों के लिए एक सार्थक उपहार के चेतावनी लेबल के साथ एक मजबूत और अनिवार्य एफओपीएल के कार्यान्वयन का आग्रह किया।</p>
<p>इस प्रभावशाली अभियान ने डॉक्टरों, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, नागर समाज, शिक्षाविदों, थिंक-टैंकों, मानवाधिकार कार्यकर्ता, धर्म गुरुओ और राजनीतिक दलों सहित हितधारकों के एक विविध समूह को सफलतापूर्वक एक साथ ला दिया है। सहयोगात्मक प्रयासों का उद्देश्य कुपोषण के जटिल मुद्दे को व्यापक रूप से संबोधित करना और भारत के बच्चों के लिए एक स्वस्थ भविष्य बनाने की दिशा में काम करना है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चित्रकूट जेल एनकाउंटर, देखिये किस बड़े अफसर पर उठी हैं उंगलियां</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/chitrakoot-jail-encounter-see-which-big-officer-has-fingers-raised/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 May 2022 12:46:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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		<category><![CDATA[सीसीटीवी कैमरा]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज़ ब्यूरो लखनऊ. साल भर पहले मई 2021 में चित्रकूट जेल में हुए कथित गैंगवार और एनकाउंटर के मामले में यूपी सरकार द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज शशिकांत को जाँच सौंपे जाने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जस्टिस शशिकांत द्वारा की जा रही जांच के समय तक अपनी जाँच को बंद कर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली न्यूज़ ब्यूरो</strong></span></p>
<p><strong>लखनऊ.</strong> साल भर पहले मई 2021 में चित्रकूट जेल में हुए कथित गैंगवार और एनकाउंटर के मामले में यूपी सरकार द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज शशिकांत को जाँच सौंपे जाने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जस्टिस शशिकांत द्वारा की जा रही जांच के समय तक अपनी जाँच को बंद कर दिया है. जस्टिस शशिकांत की जाँच में जो तथ्य निकलकर सामने आएंगे उन्हें कारागार विभाग राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजेगा.</p>
<p>मई 2021 में चित्रकूट जेल में हुए गैंगवार और एनकाउंटर मामले में पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर और डॉ. नूतन ठाकुर का कहना है कि इस मामले में कम से कम दस ऐसे कारण हैं जो यह साबित कर देते हैं कि प्रशासन द्वारा बताई गई घटना पूरी तरह से झूठी है. शिकायत में कारण गिनाते हुए अमिताभ और नूतन ठाकुर ने कहा कि जेल में अचानक से एक फर्स्ट क्लास हथियार आ गया और उस व्यक्ति के पास पहुंच गया जिसने पूर्व में अपनी हत्या की आशंका जताई थी.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-256425 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/chitrakoot-jail.jpg" alt="" width="523" height="329" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/chitrakoot-jail.jpg 523w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/chitrakoot-jail-300x189.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 523px) 100vw, 523px" /></p>
<p>इस मामले में प्रशासन को सिर्फ पांच चुने हुए लोग ही गवाह के रूप में मिले. अंशु दीक्षित ने पूर्व में जेल में जेल प्रशासन तथा एसटीएफ के एडीजी पर अपनी हत्या की साजिश की बात साफ़ तौर पर कही थी और उसकी मौत वास्तव में लगभग उसी तरीके से हुई जैसी कि उसने आशंका व्यक्त की थी. मुन्ना बजरंगी के बाद यूपी में एक ही तरीके से दूसरी बार जेल में अपराधियों की संदिग्ध मौत होना, दोनों मामलों में पूर्व में ही एक ही अफसर पर आशंका जताना और चित्रकूट जेल में सीसीटीवी कैमरा ख़राब होना शामिल हैं.</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/mukhtar-ansari-wife-fear-he-should-be-killed-like-vikas-dubey/">मुख़्तार की पत्नी पहुंची सुप्रीमकोर्ट, जताई ये आशंका</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/postal-stamps-issued-on-underworld-don-and-underworld-don/">अंडरवर्ल्ड डॉन और माफिया सरगना पर जारी हुए डाक टिकट</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/taj-mahal-is-a-tear-that-stopped-on-the-cheek-of-time-forever/">डंके की चोट पर : वक्त के गाल पर हमेशा के लिए रुका एक आंसू है ताजमहल</a></strong></span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>FOPL लागू करने का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का ऐतिहासिक पैरवी</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/historical-lobbying-of-national-human-rights-commission-to-implement-fopl/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Apr 2022 09:24:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लिट्फेस्ट]]></category>
		<category><![CDATA[FOPL]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग]]></category>
		<category><![CDATA[सार्वजनिक वितरण मंत्रालय]]></category>
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					<description><![CDATA[वाराणसी.  सभी प्रसंस्कृत और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों तथा पेय पर सबूत आधारित पोषण मानकों और उपभोक्ता अनुकूल चेतावनी लेबल को अपनाने के संघर्ष को जारी रखते हुए मानवाधिकार जन निगरानी समिति (पीवीसीएचआर) के संस्थापक व संयोजक डॉ लेनिन रघुवंशी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों केस संख्या 4227/90/0/2021 में रेजोइंदर पत्र भेजकर भारतीय &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #800000;"><strong>वाराणसी.</strong></span>  सभी प्रसंस्कृत और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों तथा पेय पर सबूत आधारित पोषण मानकों और उपभोक्ता अनुकूल चेतावनी लेबल को अपनाने के संघर्ष को जारी रखते हुए मानवाधिकार जन निगरानी समिति (पीवीसीएचआर) के संस्थापक व संयोजक डॉ लेनिन रघुवंशी ने राष्ट्रीय<br />
मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों केस संख्या 4227/90/0/2021 में रेजोइंदर पत्र भेजकर भारतीय बच्चों के स्वस्थ भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए एक सरल, व्याख्यात्मक और अनिवार्य फ्रंट-ऑफ-पैक लेबल (एफओपीएल) विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानक के अनुरूप लागू करने की गुहार लगाई है.</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff6600;"><strong> जिससे पैकेट वाले खाने में मिली सामग्री की पूरी जानकारी सामने प्रिंट हो, पैकेट के पीछे नहीं की मांग की. मामले की गंभीरता को देखते हुए मानवाधिकार जननिगरानी समिति के पेटीशन पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के फुल बेंच में इस मामले की सुनवाई शुरू की है. आयोग में दर्ज केस संख्या 4227/90/0/2021 में पहले सचिव, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण और बाद में सचिव उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और सीईओ, भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण को 8 हफ्ते के अन्दर आयोग को अपेक्षित रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.</strong></span></p></blockquote>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-252449" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/food-jubilee-post.jpg" alt="" width="1345" height="731" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/food-jubilee-post.jpg 1345w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/food-jubilee-post-300x163.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/food-jubilee-post-1024x557.jpg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/food-jubilee-post-768x417.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1345px) 100vw, 1345px" /></p>
<p>विदित है कि माननीय आयोग का फुल बेंच अति महत्वपूर्ण मामले में हस्तक्षेप करती हैं. भारत लगभग 15 मिलियन मोटे बच्चों का घर है. यह चीन के बाद दूसरी सबसे बड़ी संख्या है.</p>
<p>औसतन 15% भारतीय बच्चे किसी न किसी रूप में मोटापे का सामना कर रहे हैं. दूसरी ओर, भारत में 45 मिलियन से अधिक बच्चे अविकसित या अल्प-विकास वाले हैं, जो दुनिया के कुल अविकसित बच्चों का तीसरा है.</p>
<p>भारत में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में से लगभग आधी का कारण अल्पपोषण है. भारत सरकार बच्चो और महिलाओ के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर विश्व स्वास्थ्य संघटन (WHO) के मानक के अनुसार FoPL नियामक का गठन करे इसके लिए मानवाधिकार जननिगरानी समिति के सदस्य लगातार सरकार के चुने हुए प्रतिनिधि, उद्योग संघ, डॉक्टर और राजनीतिज्ञ से मिलकर लगातार चर्चा और परिचर्च का आयोजन कर रही है. इस मुद्दे को व्यापक समर्थन भी मिल रहा है.</p>
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		<title>एफओपीएल की याचिका पर NHRC ने लिया संज्ञान</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/nhrc-takes-cognizance-of-fopls-petition/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 Oct 2021 08:55:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[(एनएचआरसी)]]></category>
		<category><![CDATA[NHRC]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली पोस्ट]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूट्रिएंट प्रोफाइल मॉडल]]></category>
		<category><![CDATA[पीपुल्स विजिलेंस कमेटी ऑन ह्यूमन राइट्स (पीवीसीएचआर)]]></category>
		<category><![CDATA[फ्रंट ऑफ पैकेज लेबलिंग (FOPL)]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग]]></category>
		<category><![CDATA[सावित्री बाई फुले महिला मंच (एसडब्ल्यूएफ)]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य सचिव]]></category>
		<category><![CDATA[हिंदी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[हिंदी समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज डेस्क राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सावित्री बाई फुले महिला मंच (एसडब्ल्यूएफ) और पीपुल्स विजिलेंस कमेटी ऑन ह्यूमन राइट्स (पीवीसीएचआर) द्वारा दायर एक याचिका का संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार को एक नोटिस भेजा है। आयोग ने इस मामले में स्वास्थ्य सचिव से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। एसडब्ल्यूएफ और पीवीसीएचआर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000080;"><strong>जुबिली न्यूज डेस्क</strong></span></p>
<p>राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सावित्री बाई फुले महिला मंच (एसडब्ल्यूएफ) और पीपुल्स विजिलेंस कमेटी ऑन ह्यूमन राइट्स (पीवीसीएचआर) द्वारा दायर एक याचिका का संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार को एक नोटिस भेजा है। आयोग ने इस मामले में स्वास्थ्य सचिव से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter  wp-image-237550" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/stop-sugar-salt-1.jpg" alt="" width="824" height="470" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/stop-sugar-salt-1.jpg 512w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/stop-sugar-salt-1-300x171.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 824px) 100vw, 824px" /></p>
<p>एसडब्ल्यूएफ और पीवीसीएचआर ने गैर संचारी रोगों (एनसीडी) को लेकर याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया है कि देश में रुग्णता और मृत्यु दर का प्रमुख कारण गैर संचारी रोग हैं।</p>
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<p>इसमें यह भी कहा गया है कि ताजा भोजन हो या पहले से पैक किया हुआ भोजन, इसमें वसा, नमक व चीनी युक्त अधिक भोजन का अधिक सेवन करने से अक्सर मोटापा बढ़ता है। यही एनसीडी के लिए प्रमुख जोखिम कारक होते हैं।</p>
<p>याचिकाकर्ताओं ने NHRC  से देश में न्यूट्रिएंट प्रोफाइल मॉडल और फ्रंट ऑफ पैकेज लेबलिंग (FOPL) नियमों के कार्यान्वयन में हस्तक्षेप करने के मांग की थी।<ins id="aswift_0_expand" tabindex="0" title="Advertisement" data-ad-slot="Jublieepost_300x250" aria-label="Advertisement" data-ad-status="filled"><ins id="aswift_0_anchor"></ins></ins></p>
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<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/csk-vs-kkr-ipl-2021-chennai-super-kings-vs-kolkata-knight-riders/">IPL 2021: CSK ने चौथी बार जीता खिताब</a></strong></span></p>
<p>फिलहाल एनएचआरसी ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता द्वारा सामने लाया गया मुद्दा सीधे तौर पर जीवन के अधिकार और विशेष रूप से स्वास्थ्य के अधिकार से जुड़ा है। मानव अधिकारों से संबंधित चिंताएं NHRC के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।</p>
<p>NHRC ने इस मामले में केंद्र सरकार के स्वास्थ्य सचिव को नोटिस भेजकर इस पर चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगा है।  यह मामला एनएचआरसी के पूर्ण आयोग के सामने रखा जाएगा, जो बहुत महत्वपूर्ण हस्तक्षेप होता है।</p>
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]]></content:encoded>
					
		
		
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