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	<title>Jubilee Post &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<description>News &#38; Information Portal</description>
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		<title>गीतांजलि श्री ने &#8216;रेत समाधि&#8217; को बुकर पुरस्कार मिलने पर क्या कहा?</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/what-did-gitanjali-shree-say-when-sand-samadhi-received-the-booker-prize/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 May 2022 04:33:57 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA['टूंब ऑफ सैंड]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज डेस्क भारतीय हिंदी लेखिका गीतांजलि श्री की हिंदी से अंग्रेजी में अनुवादित किए गए उपन्यास ‘टॉम ऑफ सैंड’ को प्रतिष्ठित 2022 इंटरनेशनल बुकर प्राइज से सम्मानित किया गया है। मूल रूप से यह उपन्यास हिंदी ‘रेत समाधि’ के नाम के शीर्षक से लिखा गया है, जिसे अंग्रेजी में डेजी रॉकवेल ने अनुवाद किया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000080;"><strong>जुबिली न्यूज डेस्क</strong></span></p>
<p>भारतीय हिंदी लेखिका गीतांजलि श्री की हिंदी से अंग्रेजी में अनुवादित किए गए उपन्यास ‘टॉम ऑफ सैंड’ को प्रतिष्ठित 2022 इंटरनेशनल बुकर प्राइज से सम्मानित किया गया है।</p>
<p>मूल रूप से यह उपन्यास हिंदी ‘रेत समाधि’ के नाम के शीर्षक से लिखा गया है, जिसे अंग्रेजी में डेजी रॉकवेल ने अनुवाद किया है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-256901 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/geetanjali-shree.jpg" alt="" width="1200" height="667" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/geetanjali-shree.jpg 1200w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/geetanjali-shree-300x167.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/geetanjali-shree-1024x569.jpg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/geetanjali-shree-768x427.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></p>
<p>हिंदी में अंतरराष्ट्रीय बुकर तक पहुंचने की अब तक अधूरी रही कहानी को गीतांजलि श्री ने मुकम्मल कर दिया है।</p>
<p>इंटरनेशनल बुकर प्राइज हर साल अंग्रेजी में अनुवादित और इंग्लैंड/आयरलैंड में छपी किसी एक अंतरराष्ट्रीय किताब को दिया जाता है। इस प्राइज की शुरूआत साल 2005 में हुई थी।</p>
<p>बुकर प्राइज स्वीकार करने के लिए दिए गए अपने भाषण में गीतांजलि श्री ने कहा, &#8221; मैंने कभी अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने की कल्पना नहीं की थी। मैंने कभी सोचा ही नहीं कि ये मैं कर सकती हूं। ये एक बड़ा पुरस्कार है। मैं हैरान, प्रसन्न , सम्मानित और विनम्र महसूस कर रही हूं।&#8221;</p>
<p>गीतांजलि श्री ने कहा, &#8221; मैं और ये किताब दक्षिण एशियाई भाषाओं में एक समृद्ध साहित्यिक परंपरा से जुड़े हैं। विश्व साहित्य इन भाषाओं के कुछ बेहतरीन लेखकों से परिचित होकर समृद्ध होगा।&#8221;</p>
<p>वहीं बुकर पुरस्कार देने वाली संस्था ने कहा, &#8220;टूंब ऑफ सैंड अंतरराष्ट्रीय  बुकर पुरस्कार जीतने वाली किसी भी भारतीय भाषा में मूल रूप से लिखी गई पहली किताब है और हिंदी से अनुवादित पहला उपन्यास। टूंब ऑफ सैंड उत्तर भारत की कहानी है जो एक 80 वर्षीय महिला के जीवन पर आधारित है। ये उपन्यास मूल होने के साथ-साथ धर्म, देशों और जेंडर की सरहदों के विनाशकारी असर पर टिप्पणी है।&#8221;</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/narinder-batra-resigns-from-indian-olympic-association-president-post-ioa-know-more-details/">तो क्या नरिंदर बत्रा के IOA से इस्तीफा की ये हैं असली वजह?</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/supreme-court-considered-prostitution-as-a-profession-now-police-will-not-be-able-to-harass-strict-instructions-issued/">SEX वर्कर्स को लेकर SC ने क्या जारी किए सख्त निर्देश?</a></strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-256902 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/ret-samadhi.jpg" alt="" width="664" height="754" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/ret-samadhi.jpg 510w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/ret-samadhi-264x300.jpg 264w" sizes="auto, (max-width: 664px) 100vw, 664px" /></p>
<p>राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित &#8216;रेत समाधि&#8217; हिंदी की पहली ऐसी रचना है जो न केवल इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार की लॉन्गलिस्ट और शॉर्टलिस्ट तक पहुंची बल्कि अंतरराष्ट्रीय बुकर जीती भी।</p>
<p>रेत समाधि का अंग्रेजी अनुवाद मशहूर अनुवादक डेजी रॉकवेल ने किया है। 50,000 पाउंड यानी करीब 50 लाख रुपये के साहित्यिक पुरस्कार के लिये 5 अन्य किताबों से इसकी प्रतिस्पर्धा हुई। पुरस्कार की राशि लेखिका और अनुवादक के बीच बराबर-बराबर बांटी जाएगी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>निर्णायक मंडल ने गीतांजलि श्री के इस उपन्यास को &#8216;अनूठा&#8217; बताया है। यह उपन्यास ठहरकर पढ़े जाने वाला उपन्यास है जिसकी एक कथा के धागे से कई सारे धागे बंधे हुए हैं। 80 साल की एक दादी है जो बिस्तर से उठना नहीं चाहती और जब उठती है तो सब कुछ नया हो जाता है। यहां तक कि दादी भी नयी। वो सरहद को निरर्थक बना देती है।</strong></span></p>
<h3><span style="color: #800000;"><strong>कौन हैं गीतांजलि श्री और डेजी रॉकवेल?</strong></span></h3>
<p>पिछले तीन दशक से गीतांजलि श्री लेखन की दुनिया में सक्रिय हैं। 1990 के दशक में उनका पहला उपन्यास &#8216;माई&#8217; और फिर &#8216;हमारा शहर उस बरस&#8217; प्रकाशित हुए थे। इसके बाद &#8216;तिरोहित&#8217; आया और फिर आया &#8216;खाली जगह&#8217;।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-256903 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/geetanjali-shree-1.jpg" alt="" width="522" height="642" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/geetanjali-shree-1.jpg 522w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/geetanjali-shree-1-244x300.jpg 244w" sizes="auto, (max-width: 522px) 100vw, 522px" /></p>
<p>गीतांजलि श्री के कई कहानी संग्रह भी प्रकाशित हैं। वो स्त्री मन में, समाज के भीतर, समाज की परतों में बहुत धीरे धीरे दाखिल होती हैं और बहुत संभलकर उन्हें खोलती और समझती हैं।</p>
<p>गीताजंलि श्री की रचनाओं के अनुवाद भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मल सहित कई भाषाओं में हो चुका है। उनका उपन्यास &#8216;माई&#8217; का अंग्रेजी अनुवाद &#8216;क्रॉसवर्ड अवॉर्ड&#8217; के लिए भी नामित हुआ था।</p>
<p>डेजी रॉकवेल ने रेत समाधि का अनुवाद &#8216;टूंब ऑफ सैंड&#8217; नाम से किया है जिसे &#8216;टिल्टेड एक्सिस&#8217; ने प्रकाशित किया है। अमेरिका में रहने वाली डेजी हिंदी साहित्य समेत कई भाषाओं और उसके साहित्य पर पकड़ रखती हैं।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/union-minister-goyal-spoke-in-defense-of-ban-on-export-of-wheat-and-sugar/">गेहूं-चीनी के निर्यात पर पाबंदी के बचाव में बोले केंद्रीय मंत्री गोयल</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/what-did-pakistan-say-on-yasin-maliks-life-sentence/">यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा पर पाकिस्तान ने क्या कहा?</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/alert-of-terrorist-attacks-in-delhi-ncr-after-yasin-maliks-sentence-was-announced/">यासीन मलिक को सज़ा के एलान के बाद दिल्ली- एनसीआर में आतंकी हमलों का एलर्ट</a></strong></span></p>
<p>डेजी ने अपनी पीएचडी उपेंद्रनाथ अश्क के उपन्यास &#8216;गिरती दीवारें&#8217; पर की है। उन्होंने उपेंद्रनाथ अश्क से लेकर खादीजा मस्तूर, भीष्म साहनी, उषा प्रियंवदा और कृष्णा सोबती के उपन्यासों पर का अनुवाद किया है।</p>
<p>मीडिया से बातचीत में गीतांजलि श्री ने कहा कि उन्हें बुकर में नामित होने की दूर-दूर तक कोई आशा नहीं थी। वो कहती है कि मैं चुपचाप और एकांत में रहने वाली लेखिका हूं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>युवाओं को खूब भा रही हैं साहित्यिक किताबें</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/literary-books-are-very-much-liked-by-the-youth/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 08 Oct 2021 10:48:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[लिट्फेस्ट]]></category>
		<category><![CDATA[एचएल महेश्वरी]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज़ ब्यूरो लखनऊ। राजधानी में चल रहे पुस्तक मेले के सातवें दिन भी साहित्य प्रेमियों का जमावड़ा रहा। मेले के मंच पर गोष्ठी, परिचर्चा, काव्यपाठ और किस्से कहानियों का दौर देर शाम तक चला। लेखकों की नई किताबों का विमोचन हुआ। 10 दिवसीय 18वां राष्ट्रीय पुस्तक मेला राणाप्रताप मार्ग स्थित मोतीमहल वाटिका में चल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली न्यूज़ ब्यूरो</strong></span></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी में चल रहे पुस्तक मेले के सातवें दिन भी साहित्य प्रेमियों का जमावड़ा रहा। मेले के मंच पर गोष्ठी, परिचर्चा, काव्यपाठ और किस्से कहानियों का दौर देर शाम तक चला। लेखकों की नई किताबों का विमोचन हुआ। 10 दिवसीय 18वां राष्ट्रीय पुस्तक मेला राणाप्रताप मार्ग स्थित मोतीमहल वाटिका में चल रहा है।</p>
<p>पुस्तक मेले के बुक स्टॉलों पर अनेक सामाजिक विषयों की चर्चित किताबों, पत्र-पत्रिकाओं की पाठक खोजबीन और खरीदारी करते रहे। मेले में तमाम विषयों के साथ युवाओं के लिए पहले से अलग नई-नई किताबें लुभा रहीं हैं। पाठकों में युवा वर्ग के बीच मेले के बुक स्टॉलों पर कुछेक किताबों को खासी चर्चा है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-236846 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/book-fair-5.jpg" alt="" width="640" height="427" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/book-fair-5.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/book-fair-5-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>राजकमल प्रकाशन के स्टॉल पर एचएल महेश्वरी की जीवन जीने की कला, शिव प्रसाद बागड़ी की अच्छा वक्ता कैसे बनें व अध्ययन कैसे करें, रवींद्र नाथ प्रसाद सिंह की जीवन अनमोल है, विजय जोशी की प्रबंधन की पाठशाला व सफल प्रबंधन गांधी दर्शन पुस्तकें हैं। रामकृष्ण विवेकानंद वेदांत साहित्य के बुक स्टॉल पर स्वामी विवेकानंद की स्मृति सीमा से परे होने का तरीका, विद्यार्थी जीवन में सफलता, स्वामी जगदात्मानंद की जीने की कला, उद्यमिता के सूत्र सहित कई पुस्तकें हैं।</p>
<p>कलाकुंज इंटरनेशनल के स्टॉल पर कल न्यूपोर्ट, रोहंडा वाइसेन की द सीक्रेट, मुश्किल दौर में, आगे बढ़ने का रहस्य, सरश्री की लिखी मोह से मुक्ति सहित कई पुस्तकें हैं। इसी तरह बहुजन बौद्ध साहित्य प्रतिष्ठान पर डॉ. एमएल परिहार की बहुजनों बिजनेस की ओर व दलित से करोड़पति किताबें हैं।</p>
<p>प्रभात पेपर बैक के पास सुरेंद्र मोहन की लिखी हौसले की ऊंची उड़ान, डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की अग्नि की उड़ान और डॉ.एनके शर्मा की लिखी अवचेतन मन की शक्तियां सहित अन्य विशेष पुस्तकें हैं। कुंडलिनी योग रिसर्च इंस्टीट्यूट की डॉ. दीनानाथ राय की लिखी मेमोरी व्यक्तित्व विकास, धारणा और मन, सफलता के सूत्र पसंद की जा रही है। निखिल प्रकाशन के स्टॉल पर प्रो.हरि सिंह कुशवाहा की सफलता की राह व प्रखर वक्ता कैसे बनें, डॉ.नरेंद्र कुमार की जीवन काटें नहीं जियें किताबों की बिक्री रही।</p>
<p>इसी तरह वाणी प्रकाशन के स्टॉल पर स्वेट मार्डेन की सफलता के महामंत्र, मृदुला हसन की बात पैसे की और मार्जन सत्तरपी की लिखी पर्सेपोलिस प्रमुख किताबें मौजूद हैं। ऐसे ही नई किताब प्रकाशन के स्टॉल पर ज्ञान प्रकाश सिंह की सफर जिंदगी डॉट कॉम, तसलीमा नसरीन की एकला चलो किताबों की चर्चा बनी है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-236847 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/book-fair-3-1.jpg" alt="" width="640" height="427" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/book-fair-3-1.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/book-fair-3-1-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>पुस्तक मेले का मंच लखनऊ के साहित्यिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के हवाले रहा। जिसमें विश्वम फाउंडेशन के असहाय बच्चों के लिए संचालित ‘तुम में है हीरो’ अभियान के तहत कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में लखनऊ और आसपास के जिलों के असहाय, चयनित और हुनरमंद बच्चों ने अपने नृत्य, गायन और वादन के हुनर दिखाये। कल प्रतियोगिता का फाइनल होगा, जिसमें सैकड़ों बच्चे शामिल होंगे। ज्योति किरण रतन के संयोजन में बालीवुड डांस, आज़ादी का अमृत महोत्सव विषयक स्लोगन प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में बच्चों ने प्रति भाग किया।</p>
<p>रेयान मंच की ओर से सामाजिक योगदान देने वाली 22 महिलाओं को सम्मानित किया गया। सर्वोच्च गृहणी सम्मान से सूर्य लता जायसवाल को विभूषित किया गया। मंच पर ही डॉ.रामबहादुर मिश्र की लिखी किताब जिंदगी झकास यात्रा का विमोचन हुआ। जिसमें बतौर अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार सुभाष राय, मुख्य अतिथि लखनऊ यूनिवर्सिटी के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो.वाईपी सिंह, पत्रकार अरुण सिंह, लेखिका अलका प्रमोद सहित कई साहित्यप्रेमी मौजूद थे।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/police-pasted-notice-outside-the-residence-of-minister-of-state-for-home/">गृह राज्य मंत्री के आवास के बाहर पुलिस ने चस्पा किया नोटिस</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/yogi-government-is-working-on-many-schemes-for-the-interests-of-journalists/">योगी सरकार पत्रकार हितों की कई योजनाओं पर काम कर रही है</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/mayawati-is-promoting-familyism-by-ignoring-the-ideals-of-kanshi-ram/">कांशीराम के आदर्शों की अनदेखी कर परिवारवाद को बढ़ावा दे रही हैं मायावती</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/is-bjp-making-sense-of-party-with-difference/">डंके की चोट पर : पार्टी विथ डिफ़रेंस के क्या यह मायने गढ़ रही है बीजेपी</a></strong></span></p>
<p>निखिल पब्लिशर्स की ओर से देश-दुनिया में चर्चित लखनऊ के साहित्य जगत की हस्तियों को विभूषित किया गया। जिसमें बृजेश पांडेय विरक्त, उपाध्यक्ष डॉ.श्रीप्रकाश यादव, समन्वयक डॉ.मुरारी लाल अग्रवाल, डॉ.अमिता दुबे, संचालक डॉ.विनय शंकर दीक्षित आशु व निखिल प्रकाश समूह के निदेशक मोहन मुरारी शर्मा सहित साहित्य प्रेमी मौजूद थे। डॉ.सुधाकर अदीब के उपन्यास ‘महापथ: आदि शंकराचार्य की दिग्विजय‘ पर चर्चा हुई। जिसमें अध्यक्षता डॉ.सूर्य प्रसाद दीक्षित, मुख्य अतिथि साहित्यकार वीना उदय ने पुस्तक पर विचार रखे। डॉ.सुधाकर अदीब ने कहा कि यह उपन्यास आदि शंकराचार्य के जीवन पर आधारित है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पितृपक्ष और नवरात्र में अध्यात्म की राह दिखा रहीं किताबें</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/books-showing-the-path-of-spirituality-in-pitru-paksha-and-navratri/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Oct 2021 08:06:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[लिट्फेस्ट]]></category>
		<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[कथाकार अखिलेश]]></category>
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		<category><![CDATA[प्रो. गिरीश चन्द्र त्रिपाठी]]></category>
		<category><![CDATA[बाइबिल]]></category>
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		<category><![CDATA[लेखक विशाल श्रीवास्तव]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीमदभगवत]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीमदभागवतम्]]></category>
		<category><![CDATA[संपूर्ण विवेकानंद साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[हिमांशु बाजपेयी]]></category>
		<category><![CDATA[हृदयनारायण दीक्षित]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज़ ब्यूरो लखनऊ। 18वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले के पांचवें दिन साहित्यप्रेमियों की भीड़ रही। मोती महल लॉन में चल रहे पुस्तक मेले में साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित हुए। मेले में कला-संस्कृति, साहि़त्य, राजनीति, पाठ्यक्रम और प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा बच्चो व महिलाओं की भी सैकड़ों पुस्तकें हैं। इसके अलावा अध्यात्म, धर्म, दर्शन और योग पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली न्यूज़ ब्यूरो</strong></span></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> 18वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले के पांचवें दिन साहित्यप्रेमियों की भीड़ रही। मोती महल लॉन में चल रहे पुस्तक मेले में साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित हुए। मेले में कला-संस्कृति, साहि़त्य, राजनीति, पाठ्यक्रम और प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा बच्चो व महिलाओं की भी सैकड़ों पुस्तकें हैं।</p>
<p>इसके अलावा अध्यात्म, धर्म, दर्शन और योग पर आधारित पुस्तकों की खूब मांग है। मेले में रामकृष्ण मठ के स्टॉल पर व्यक्तित्व विकास, अध्यात्म, शिक्षा, भारतीय नारी, श्रीमदभगवत, श्रीमदभागवतम्, योग-दर्शन, संपूर्ण विवेकानंद साहित्य के अलावा दर्शन की किताबें हैं। वैदिक साहित्य के स्टॉल पर वेद, शास्त्र, उपनिषद, दर्शन, योग-दर्शन, एक दिशा उपनिषद, वाल्मीकि रामायण, विशुद्ध उपनिषद, मनुस्मृति व गीता उपलब्ध हैं। मेले में बहुजन समाज के प्रतिनिधि स्टॉल पर बहुजन बोधि साहित्य, बहुजन साहित्य, भारत का संविधान, बाबा साहब वांग्मय, बुद्ध, बहुउपदेश, रविदास, लाइफ एंड मिशन सहित ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई की लिखी बौद्ध साहित्य-दर्शन पर केंद्रित कई किताबें हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-236653 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/book-fair-6-october.jpg" alt="" width="640" height="418" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/book-fair-6-october.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/book-fair-6-october-300x196.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>शांतिकुंज हरिद्वार गायत्री परिवार के बुक स्टॉल पर वैदिक साहित्य की अनेक किताबें, अखंड ज्योति पत्रिका, वेद, योग, साधना, पुराण, उपनिषद के अलावा पितृपक्ष पर केंद्रित कई पुस्तकें मौजूद हैं। जिसमें पितर हमारे अदृश्य सहायक, स्वर्ग नरक की स्वसंचालित प्रक्रिया, मरणोत्तर जीवन-उसकी सच्चाई, पितरों को श्राद्ध दें शक्ति देंगे, जीवन और मृत्यु सहित अनेक पुस्तकें, शुद्ध हवन सामग्री, धूप और औषधियां मौजूद हैं। अहमदिया मुस्लिम कम्युनिटी के शाह हरुन सैफी ने बताया कि हमारे स्टॉल पर मौजूदा संदर्भों पर आधारित उर्दू, हिन्दी और इंग्लिश की किताबें हैं। जिनमें वूमेन इन इस्लाम, मजहब के नाम पर खून, विश्व संकट तथा शांतिपथ, इस्लाम एंड ह्यूमन राइट, इस्लाम और वर्तमान काल की समस्याओं का समाधान, पवित्र कुरान 76 भाषाओं में है।</p>
<p>द गिडौन्स इंटरनेशनल संस्थान के स्टॉल पर भी ईसाई धर्म पर आधारित साहित्य है। जहां बाइबिल कई साइज में पाठकों को निशुल्क वितरित की जा रहीं हैं। वाणी प्रकाशन के स्टॉल पर नाथपंथ पर नई किताबों की श्रंखला है। जिसमें डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी और प्रो रविशंकर सिंह की लिखी नवनाथ, नाथ संप्रदाय दर्शन कथा नाथपंथी, नाथ पंथ संप्रदाय परंपरा किताबें मौजूद हैं।</p>
<p>भारतीय पुस्तक न्यास के बुक स्टॉल के आकाश अत्री ने बताया कि हमारे पास विभिन्न विषयों के अलावा धर्म-अध्यात्म व योग पर आधारित पुस्तकें हैं। जिसमें रमेश बिजलानी की फेमस एलजेब्रस्ट ऑफ वर्ल्ड, रमेश पोखरियाल निशंक की हिमालय में विवेकानंद, आदि शंकरम, शंकराचार्य व दुनिया जब नई-नई थी मौजूद हैं।</p>
<p>राष्ट्रीय पुस्तक मेला में विश्वम फाउंडेशन द्वारा विश्वम युवा महोत्सव के तहत हुए कार्यक्रम में नन्हें-मुन्ने बच्चों ने गायन, नृत्य के हुनर दिखाया. श्रेया सिंह ने कविता पाठ, गुंजन भाटिया ने गीत, शिवांगी व अनंत ने नृत्य कर प्रशंसा पाई। हर्षिता ने लता मंगेशकर का चर्चित गीत सत्यम शिवम सुंदरम सुनाया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-236654 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/book-fair-6-october-2.jpg" alt="" width="640" height="450" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/book-fair-6-october-2.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/book-fair-6-october-2-300x211.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>भारतीय भाषा प्रतिष्ठान राष्ट्रीय परिषद की ओर से विनोद दीक्षित की किताबें मैं और मेरा संघर्ष व भगवान से मांगना नहीं लेना सीखो का विमोचन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महेश चंद्र द्विवेदी, प्रो. उषा सिन्हा और कई साहित्यप्रेमी मौजूद थे।</p>
<p>मेले के मुख्य मंच पर ही लेखिका अलका प्रमोद के काव्य संग्रह “चेहरे की लकीरें“ का विमोचन और उपन्यास “जागृति उद्घोष “पर चर्चा हुई। कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ लेखिका डॉ. विद्या विंदु सिंह, मुख्य अतिथि साहित्यकार महेश चंद्र द्विवेदी, अतिविशिष्ट अतिथि सर्वेश अस्थाना व विशिष्ट अतिथि दूरदर्शन प्रोग्राम प्रोड्यूसर विवेक शुक्ल, डॉ. रश्मि शील व कवि केवल प्रसाद सत्यम सहित अन्य साहित्यप्रेमी मौजूद रहे। संचालन साहित्यकार अमिता दुबे ने किया।</p>
<p>अलका प्रमोद ने कहा कि,“ चेहरे की लकीरें“ जीवन के विविध रंगों पर आधारित मुक्त छंद कविताओं का संग्रह है।<br />
वाणी प्रकाशन ग्रुप से प्रकाशित लेखक डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी की नयी पुस्तकें ’नवनाथ’, ’नाथ सम्प्रदाय : दर्शन कथा नाथपन्थ की’, और ’नाथ सम्प्रदाय : युवा कल्याणार्थ नाथपन्थ’ का लोकार्पण व परिचर्चा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित, प्रो. गिरीश चन्द्र त्रिपाठी, अध्यक्ष, उच्च शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश पूर्व कुलपति, बीएचयू और आर. एन बनर्जी, पूर्व वरिष्ठ अधिकारी, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया मौजूद थे।</p>
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<p>राजकमल प्रकाशन की ओर से दिलीप पांडेय और चंचल शर्मा की लिखी पुस्तकों पर चर्चा हुई। जिसमें आईएएस डॉ.हरिओम, लेखक वीरेंद्र सारंग, प्रो.रत्ना श्रीवास्तव ने टपकी और बूंदी के लट्टू, काल सेंटर और खुलतीं गिरहे पर प्रकाश डाला। राजकमल की ओर से किस्सागो अभिषेक शुक्ल व हिमांशु बाजपेयी के साथ ‘शायरी और किस्सागोई की एक शाम दो लखनउओं के संग’ शीर्षक चर्चा हुई। यहां किस्सा-किस्सा लखनऊवा और अभिषेक श़ुक्ल की हर्फ ए आवारा पुस्तकों पर साहित्यप्रेमियों ने प्रकाश डाला। इसके आलोचना का स्त्री पक्ष पुस्तक पर सामाजिक कार्यकर्ता व लखनऊ यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति रुपरेखा वर्मा, कथाकार अखिलेश, लेखक विशाल श्रीवास्तव ने प्रकाश डाला।</p>
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