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	<title>पश्चिम उत्तर प्रदेश Archives &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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		<title>अखिलेश यादव : मछली का बच्चा समुंद्री तूफानों से लड़ना सीख गया</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/akhilesh-yadav-baby-of-fish-learned-to-fight-with-sea-storms/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Jan 2022 06:22:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नवेद शिकोह  एक कहावत है- मछली के बच्चे को कोई तैरना नहीं सिखाता, वो पैदाइशी तैराक होता है। धीरे-धीरे पानी की गहराई के ख़तरों और तूफानों से लड़ने की जांबाज़ी भी सीख लेता है। कब मुखर हों और कब निष्क्रिय, किस वक्त दुश्मन के जाल से सावधान रहना है और कौन से मूहर्त में शत्रु &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000080;"><strong>नवेद शिकोह </strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-182669 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/08/naved-273x300-1-150x150.jpg" alt="" width="149" height="149" />एक कहावत है- मछली के बच्चे को कोई तैरना नहीं सिखाता, वो पैदाइशी तैराक होता है। धीरे-धीरे पानी की गहराई के ख़तरों और तूफानों से लड़ने की जांबाज़ी भी सीख लेता है। कब मुखर हों और कब निष्क्रिय, किस वक्त दुश्मन के जाल से सावधान रहना है और कौन से मूहर्त में शत्रु पर आक्रामक हों। कैसे अपना समूह बनाना है और कैसे विरोधी की यूनिटी को छोड़कर उसकी ताकत को कमजोर करना है।</p>
<p>ऐसे कौशल में कुछ ख़ून का असर होता है, कुछ अनुभव और संघर्ष काम आता है, कुछ विरासत की दौलत का जादू चलता है। इसके साथ ही धैर्य, मेहनत और संघर्ष की ताकत विशालकाय प्रतिद्वंद्वी से मुकाबले का हौसला देती है।</p>
<p>ज़रुरी नहीं कि पहाड़ से टकराने वाला ख़ुद चकनाचूर हो जाए। प्रवाह, चुस्ती-फुर्ती, धार, दिशा, हौसला, एकाग्रता और सधी हुई रणनीति से पहाड़ भी दरक जाते हैं। हाथी से बहुत छोटा होता है चीता, लेकिन वो अपनी चुस्ती-फुर्ती, हिम्मत-हौसलों से हाथी को चुनौती दे देता है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-242648 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/12/akhilesh-yadav-jubilee-post-e1639474388510.jpg" alt="" width="833" height="547" /><br />
उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसी लोकप्रिय और ताकतवर राजनीति हस्तियों वाली भाजपा पहाड़ जैसी है।</p>
<p>यूपी विधानसभा चुनावी रण में भाजपा को पसीना छुड़ाने वाले अखिलेश यादव की राजनीतिक दक्षता और परिपक्वता आजकल चर्चाओं में हैं। समाजवादी विचारधारा के लोग कहने लगे हैं कि अखिलेश में मुलायम की क्षमताएं और दक्षताएं झलकने लगी हैं।</p>
<p>क़रीब तीन दशक पहले देश में कांग्रेस की विशालकाय सियासी ताकत और हुकुमतों के होते यूपी में एकक्षत्र राज करने वाली कांग्रेस को मुलायम सिंह यादव ने हाशिए पर लाकर साबित किया था कि रणनीति सधी हुई हो तो एक सिपाही विशाल सेना पर भारी पड़ सकता है।</p>
<p>इधर तीस वर्षों में लखनऊ में गोमती का बहुत बह चुका है। जिस तरह कभी यूपी में कांग्रेस अजेय लगती थी आज भाजपा उतनी ही ताकतवर है।</p>
<p>भाजपा के लम्बे संघर्ष के पसीने से सींची हिन्दुत्व की उर्वरा भूमि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने और भी उपजाऊ बना दी, ऐसे में कमंडल को चुनौती देकर मंडल के जातिगत समीकरण से सपा में भाजपा को टक्कर देने की ताकत पैदा करके अखिलेश यादव ने भाजपा के ओबीसी नेताओं को अपने पाले में लाकर यूपी की सियासत में एक हलचल पैदा कर दी है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-241960 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/12/Akhilesh-jayant-jubilee-post-e1638879065751.jpg" alt="" width="992" height="557" /></p>
<p>भाजपा और भाजपा गठबंधन के पिछड़ी जातियों के नेताओं को अपने पाले में लाकर अखिलेश यादव ने अपने गठबंधन को मजबूत और भाजपा को कमजोर करने की हर संभव कोशिशें जारी रखी हैं।</p>
<p>कभी योगी सरकार में मंत्री रहे बागी ओमप्रकाश राजभर सपा का सहारा बन कर भाजपा को दलित-पिछड़ा विरोधी होने की दोहराई दे देकर थक नहीं रहे थै कि योगी सरकार के दो कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मोर्य, दारा सिंह चौहान और कुछ विधायक भाजपा से बगावत कर सपा की ताकत बन गए। इससे पहले भी सपा जनगणना को लेकर जाति की गोटियां खेलना शुरू कर चुकी थी।</p>
<p>सपा से बेदखल होकर अपनी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बनाने वाले शिवपाल यादव से दूरियां खत्म करके अखिलेश यादव ने अपने चाचा को अपनी ताकत बना लिया। साथ ही पश्चिम उत्तर प्रदेश के जाट समुदाए में पकड़ रखने वाला राष्ट्रीय लोकदल और कई छोटे दलों को अपने गठबंधन में शामिल किया।</p>
<p>यूपी में भाजपा से ब्राह्मणों की नाराजगी की चर्चाओं पर यक़ीन करके ब्राह्मण नेताओं को भी सपा में शामिल किया। रैलियों पर पाबंदी से पहले समाजवादी विजय रथ यात्राओं में जबरदस्त भीड़ ने साबित किया कि जातिगत सामाजिक समीकरण रंग लाने लगे और सपा गठबंधन भाजपा को टक्कर देने की स्थिति में आ गया।</p>
<p>यूपी में कांग्रेस की जमीन तैयार कर रहीं प्रियंका गांधी वाड्रा की मेहनत और जनाधार वाली बहुजन समाज पार्टी को पीछे करके भाजपा को सीधी टक्कर देने वाले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साबित कर दिया कि वो मुलायम सिंह यादव की सियासी विरासत को संभालने की क़ूबत रखते हैं।</p>
<p>यूपी की राजनीति में अपने चरखा दांव से बड़े-बड़े सियासी सूरमाओं को पछाड़ देने वाले मुलायम सिंह यादव पुत्र पूर्व मुख्यमंत्री/सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के छोटे से राजनीतिक करियर में बहुत सारे उतार-चढ़ाव आए।</p>
<p>उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल में विकास कार्यों को लेकर उनकी जितनी प्रशंसा हुई उससे अधिक विपक्षी भूमिका में वो आलोचनाओं का भी शिकार हुए।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/bsp-will-give-strength-to-bjp-by-protesting/">विरोध कर BJP को ताकत देगी बसपा</a>   </strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :   <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/theater-of-speculation-and-high-voltage-drama-of-up/">कयासों का रंगमंच और यूपी का हाई वोल्टेज ड्रामा !</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :    <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/priyanka-can-fill-the-political-space/">ख़ाली स्पेस और ख़ूब स्कोप वाली सड़क पर प्रियंका</a></strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-238611 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/akhilesh-rajbhar-2.jpg" alt="" width="958" height="524" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/akhilesh-rajbhar-2.jpg 636w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/akhilesh-rajbhar-2-300x164.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 958px) 100vw, 958px" /></p>
<p>पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह की मंडल की राजनीति को यूपी की सियासी जड़ों में पेवस्त कर उत्तर प्रदेश में कब्जा जमाए कांग्रेस को हाशिए पर लाने वाले मुलायम सिंह यादव ने एम वाई (मुस्लिम-यादव)के साथ पिछड़ी जातियों को लामबंद कर सामाजिक न्याय की लड़ाई नाम दिया था।</p>
<p>पिता के सियासी नक्शे-कदम पर चलकर अखिलेश एक बार फिर सपा में पुराने रंगों की ताकत भरने की जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। उन्हीं अखिलेश की परिपक्व राजनीति की लोग तारीफ कर रहे हैं जिनपर तोहमतें लगती थीं कि वो सिर्फ ट्वीटर की राजनीति करते हैं।</p>
<p>विपक्षी भूमिका में उन्होंने सब से बड़े विपक्षी नेता होने के नाते पिता मुलायम सिंह और चाचा शिवपाल यादव की तरह ज़मीनी संघर्ष नहीं किया। वो सत्ता से डर कर उतना सड़कों पर नहीं उतरे जितना उतरना चाहिए था। वो भाजपा को कैसे हरा पाएंगे !</p>
<p>अपनों की भी ऐसी टिप्पणियों-तंज़ों,शिकवों-शिकायतों और तोहमतों से घिरे अखिलेश आज जब पूरी परिपक्व और संतुलित राजनीतिक दक्षता के साथ यूपी में भाजपा को हलकान करके तगड़ी चुनौती दे रहे हैं तो उनकी प्रशंसा करने लगे हैं। जो अपने उनकी कमियों को गिनाते थे।</p>
<p><strong><span style="color: #800000;">यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/so-thats-why-the-congress-leader-fired-at-himself/">…तो इसलिए कांग्रेस नेत्री ने खुद पर चलवाई थी गोली</a></span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #800000;">यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/how-much-loss-did-bjp-suffer-in-up-in-last-48-hours/">यूपी में पिछले 48 घंटे में BJP को कितना नुकसान हुआ?</a></span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #800000;">यह भी पढ़ें :   <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/in-the-last-24-hours-in-the-country-about-two-and-a-half-lakh-new-cases-of-corona/">देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के करीब ढ़ाई लाख नए केस</a></span></strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-245289 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/01/swami-prasad-marya--e1641892972455.jpg" alt="" width="600" height="346" /></p>
<p>सोशल मीडिया या नुक्कड़बाजी में ज्ञान देते थे वहीं कह रहे हैं कि आज अखिलेश के पक्ष में जो माहौल दिख रहा है वो उनकी कल की सूझबूझ और दूरदर्शिता का इनाम है। उनकी खामोशी,धैर्य और निष्क्रियता के भी गहरे माइने थे।</p>
<p>राजनेता हो या आम इंसान हर मौसम वैज्ञानिक समाजवादी खेमें की तरफ कदम बढ़ा रहा हैं। चढ़ते सूरज को सलाम होने लगे हैं। कहा जा रहा है कि अखिलेश ने जो किया अच्छा ही किया। पहले अपने पत्ते खोलते थे उन्हें एजेंसियां घेर लेतीं। कोई ताज्जुब नहीं कि झूठे आरोपों में उन्हें जेल तक में डाल दिया जाता। ज्यादा विपक्षी चहलकदमी करते तो हिंदू-मुस्लिम की पिच पर लाकर गिरा दिए जाते।</p>
<p>इन सब से बचने के लिए निष्क्रियता और खामोशी परिपक्व रणनीति का हिस्सा थी। चढ़ते सूरज को सलाम करने वाले अब ये भी कह रहे हैं अखिलेश यादव मुस्लिम और यादव को सेफ साइड मानकर पिछड़ों-दलितों, ब्राह्मणों और समाज के सभी वर्गों का विश्वास जीतने का क़ाबिले तारीफ काम कर रहे हैं। इधर राजनीति पंडितों का मानना है कि यदि सपा ग़ैर मुस्लिम-यादव को ज्यादा टिकट देगी तो ये पार्टी के हक़ में होगा।</p>
<p><strong><span style="color: #000000;"><em>(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)</em></span></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ऐसा क्या हुआ कि रातभर में बदल गया गाजीपुर बॉर्डर का माहौल</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/what-happened-is-that-the-atmosphere-of-ghazipur-border-changed-overnight/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Jan 2021 04:23:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[ऐसा क्या हुआ कि रातभर में बदल गया गाजीपुर बॉर्डर का माहौल]]></category>
		<category><![CDATA[किसान नेता नरेश टिकैत]]></category>
		<category><![CDATA[गाजियाबाद प्रशासन]]></category>
		<category><![CDATA[पश्चिम उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[बागपत]]></category>
		<category><![CDATA[मेरठ]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज डेस्क गुरुवार की शाम तक फ्रंटफुट पर पुलिस-प्रशासन था और बैकफुट पर किसान, लेकिन अब गाजीपुर बार्डर का माहौल बदल गया है। अब किसान फ्रंटफुट पर आ गए हैं और पुलिस-प्रशासन बैकफुट पर। गुरुवार की शाम में जिला प्रशासन ने किसानों को गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन स्थल को खाली कराने का आदेश दे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000080;"><strong>जुबिली न्यूज डेस्क</strong></span></p>
<p>गुरुवार की शाम तक फ्रंटफुट पर पुलिस-प्रशासन था और बैकफुट पर किसान, लेकिन अब गाजीपुर बार्डर का माहौल बदल गया है। अब किसान फ्रंटफुट पर आ गए हैं और पुलिस-प्रशासन बैकफुट पर।</p>
<p>गुरुवार की शाम में जिला प्रशासन ने किसानों को गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन स्थल को खाली कराने का आदेश दे दिया था। माहौल भी ऐसा ही बन गया था कि किसान आंदोलन को समाप्त कर देंगे लेकिन रात भर में नजारा बदल गया।</p>
<p>गाजीपुर सीमा पर देर रात तक चले हाई वोल्टेज ड्रामे का अंत वैसा नहीं हुआ, जिसकी तस्वीर शाम से ही दिख रही थी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-200593 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/12/Rakesh-Tikait-jubilee-post.jpg" alt="" width="640" height="360" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/12/Rakesh-Tikait-jubilee-post.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/12/Rakesh-Tikait-jubilee-post-300x169.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>गाजीपुर बॉर्डर को छावनी में बदल दिया गया था, पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की अतिरिक्त टीमें तैनात की गई थीं, मगर किसान नेता राकेश टिकैत के आंसू ने ऐसा टर्निंग प्वाइंट लाया कि पुलिस फोर्स को रात में ही बैरंग लौटना पड़ा।</p>
<p>गाजियाबाद प्रशासन ने प्रदर्शनकारी किसानों को गुरुवार आधी रात तक यूपी गेट खाली करने का अल्टीमेटम दिया था। दिल्ली की सीमा से लगे यूपी गेट (गाजीपुर बॉर्डर) पर गुरुवार शाम को टकराव की स्थिति के बीच भारी संख्या में सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए।</p>
<p>प्रदर्शन स्थल पर शाम में कई बार बिजली कटौती की गई, जहां टिकैत के नेतृत्व में भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के सदस्य 28 नवंबर से डटे हुए हैं।</p>
<p>गुरुवार को गाजीपुर बार्डर पर डर का माहौल ऐसा था कि कुछ किसान अपना बोरिया-बिस्तर तक समेटने लगे थे। मगर तभी एक वक्त ऐसा आया जब गाजीपुर बॉर्डर का माहौल ही बदल गया। किसान नेता राकेश टिकैत मीडिया के सामने रोने लगे। वे अपनी मांग पर अड़े रहे और कहा कि वह आत्महत्या कर लेंगे लेकिन आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>रोते हुए राकेश टिकैत ने मीडिया से कहा, &#8216;मैं अब पानी नहीं पीऊंगा। मैं केवल वही पानी पीऊंगा जो गांवों से किसानों द्वारा लाया गया है।&#8217;</strong></span></p></blockquote>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-201131" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/12/rakesh-tikait-jubilee-post-1.jpg" alt="" width="640" height="336" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/12/rakesh-tikait-jubilee-post-1.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/12/rakesh-tikait-jubilee-post-1-300x158.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>फिर क्या, इसके बाद पूरा माहौल ही बदल गया। रात में ही पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसान दिल्ली की ओर कूच करने लगे। बताया जा रहा है कि जैसे ही टीवी पर राकेश टिकैत के रोने की तस्वीर सामने आई, करीब 5000 से अधिक किसान उनका समर्थन करने के लिए इकट्ठा होने लगे।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>रात में ही मेरठ, बागपत समेत पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों के सैकड़ों किसान दिल्ली की ओर कूच कर गए। किसानों का जत्था रवाना हो गया और नरेश टिकैत और राकेश टिकैत समेत तमाम नेताओं की ओर से भी किसानों के दिल्ली कूच करने के लिए आह्वान किए जाने लगे।</strong></span></p></blockquote>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-208279" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/third-front-opens-as-farmers-throng-delhi-up-border-at-ghazipur.jpg" alt="" width="1200" height="900" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/third-front-opens-as-farmers-throng-delhi-up-border-at-ghazipur.jpg 1200w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/third-front-opens-as-farmers-throng-delhi-up-border-at-ghazipur-300x225.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/third-front-opens-as-farmers-throng-delhi-up-border-at-ghazipur-1024x768.jpg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/third-front-opens-as-farmers-throng-delhi-up-border-at-ghazipur-768x576.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></p>
<p>राकेश टिकैत के प्रेस कांफ्रेंस के बाद मुजफ्फरनगर में  बवाल बढ़ गया। तुरंत नरेश टिकैत ने पंचायत बुलाई और दिल्ली जाने की प्लानिंग हुई। इसके बाद फैसला हुआ कि आज यानी शुक्रवार को 11 बजे मुजफ्फरनगर में महापंचायत होगा और किसान आंदोलन के आगे की प्लानिंग पर बात होगी।</p>
<p>किसान नेता नरेश टिकैत ने वीडियो जारी कर किसानों का आह्वान किया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, हरियाणा के गांव-गांव से किसान भाई गाजीपुर बॉर्डर की तरफ चल पड़े हैं। अब तो तीनों काले कानूनों का निपटारा करके ही घर लौटेंगे। बाबा टिकैत का एक-एक सिपाही दिल्ली कूच करे!&#8217;</p>
<p>इसके बाद तो हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी और सैकड़ों सुरक्षाकर्मी देर रात यूपी गेट पर फ्लाईओवर के नीचे से गुजरने वाले दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और लिंक रोड पर थे। इधर, लंबे समय से आंदोलन कर रहे किसानों को एक बार फिर से कांग्रेस, आरएलडी समेत कई दलों के नेताओं का समर्थन मिला।</p>
<p>इसका नतीजा यह हुआ कि पुलिस को पीछे हटना पड़ा। देर रात पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स जिन गाड़ियों से वहां पहुंची थी, उन्हीं गाड़ियों  से उन्हें वापस लौटना पड़ा।</p>
<p>माना जा रहा है कि पुलिस आज किसानों के रुख का इंतजार करेगी। महापंचायत में क्या फैसला होता है और किसान आंदोलन किस योजना पर काम करेंगे, इन सबका ध्यान रखते हुए ही सरकार और पुलिस अपना आगे का कदम उठाएगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>एटा में पाकिस्तानी महिला बन गई प्रधान</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/pakistani-woman-becomes-head-in-etah/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 31 Dec 2020 04:21:07 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[बानो बेगम]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज डेस्क पश्चिम उत्तर प्रदेश के एटा जिले के एक गांव में पाकिस्तानी महिला के ग्राम प्रधान बनने मा मामला सामने आया है। जब खुलासा हुआ कि महिला पाकिस्तानी नागरिक है तो शिकायत होने पर दिसंबर के पहले सप्ताह में महिला ने प्रधान पद से इस्तीफा दे दिया। इस मामले की जांच के बाद &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000080;"><strong>जुबिली न्यूज डेस्क</strong></span></p>
<p>पश्चिम उत्तर प्रदेश के एटा जिले के एक गांव में पाकिस्तानी महिला के ग्राम प्रधान बनने मा मामला सामने आया है। जब खुलासा हुआ कि महिला पाकिस्तानी नागरिक है तो शिकायत होने पर दिसंबर के पहले सप्ताह में महिला ने प्रधान पद से इस्तीफा दे दिया।</p>
<p>इस मामले की जांच के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) ने सचिव को रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।</p>
<p>बताया जाता है कि जो महिला प्रधान चुनी गई थी उनका एटा के गुदारू गांव में 35 साल पहले निकाह हुआ था। वह भारत में लॉन्ग टर्म वीजा पर रह रही है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-107782" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/06/froud-1.jpg" alt="" width="960" height="540" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/06/froud-1.jpg 960w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/06/froud-1-300x169.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/06/froud-1-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 960px) 100vw, 960px" /></p>
<p>दरअसल यह महिला मूल रूप से पाकिस्तान के कराची की रहने वाली बानो बेगम बताई जा रही है। करीब 35 साल पहले गांव के अख्तर अली से उनका निकाह हुआ था। वह अभी तक लॉन्ग टर्म वीजा पर भारत में रह रही है और उसे भारत की नागरिकता अभी तक नहीं मिली है।</p>
<p>साल 2015 में हुए पंचायत चुनाव में वह ग्राम पंचायत सदस्य चुनी गई थी। इसी साल 9 जनवरी 2020 को ग्राम प्रधान शहनाज बेगम का देहांत हो गया तो सियासी समीकरण के चलते बानो बेगम को सदस्यों ने कार्यवाहक प्रधान चुन लिया।</p>
<p>बानो बेगम के ग्राम प्रधान बनने के बाद गांव के कुवैदान खां ने इसी माह 10 दिसंबर को डीपीआरओ से महिला के पाकिस्तानी होने की शिकायत की। पुलिस की जांच में यह आरोप सही पाया गया तो बानो बेगम को प्रधान पद से इस्तीफा देना पड़ा।</p>
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<p>जांच में महिला के पाकिस्तानी नागरिक होने, उसका भारत का वोटर कार्ड, आधार कार्ड बनवाने का खुलासा हुआ। डीपीआरओ ने अब ग्राम पंचायत सचिव को बानो बेगम के खिलाफ एफआइआर कराने का आदेश दिया है।</p>
<p>ग्रामीणों के अनुसार ग्राम प्रधान शहनाज बेगम की मौत के बाद संचालन समिति बनाई गई थी और बानो बेगम को ग्राम पंचायत सचिव ने बतौर अध्यक्ष पेश किया था। उस सचिव को भी इस ग्राम पंचायत क्षेत्र से हटा दिया गया है।</p>
<p>जिला प्रशासन के मुताबिक गुदाऊ की कार्यवाहक प्रधान बनी पाकिस्तानी मूल की बानो बेगम के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। उसके नाम से भारतीय अभिलेख बनवाने में सहयोग करने वालों का पता लगाकर कार्रवाई की जाएगी।</p>
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