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	<title>पत्रकार Archives &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<description>News &#38; Information Portal</description>
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	<item>
		<title> आंसुओं से थम गया अट्टहास&#8230;.</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/the-laughter-stopped-with-tears/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Supriya Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Jan 2025 08:07:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जुबिली डिबेट]]></category>
		<category><![CDATA[अनूप श्रीवास्तव]]></category>
		<category><![CDATA[पत्रकार]]></category>
		<category><![CDATA[पत्रकारिता]]></category>
		<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; नवेद शिकोह पत्रकारिता के सुनहरे दौर के गवाह अनूप श्रीवास्तव भी चले गए अट्टहास अंत में आंखों में आंसू ला देता है। ज़िन्दगी भी अट्टहास है और हंसती-खेलती ज़िन्दगी का अंत भी आंसू यानी मौत है। अनूप श्रीवास्तव जी के संपादन में अट्टहास पत्रिका का ये आखिरी अंक था। प्रिंट लाइन बदल जाएगी पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><img decoding="async" class="alignleft wp-image-182669 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/08/naved-273x300-1.jpg" alt="" width="143" height="157" /></p>
<p><span style="color: #0000ff"><strong>नवेद शिकोह</strong></span></p>
<p><strong>पत्रकारिता के सुनहरे दौर के गवाह अनूप श्रीवास्तव भी चले गए</strong></p>
<p>अट्टहास अंत में आंखों में आंसू ला देता है। ज़िन्दगी भी अट्टहास है और हंसती-खेलती ज़िन्दगी का अंत भी आंसू यानी मौत है। अनूप श्रीवास्तव जी के संपादन में अट्टहास पत्रिका का ये आखिरी अंक था। प्रिंट लाइन बदल जाएगी पर अट्टहास जारी रहेगी। शो मस्ट गो ऑन। सुनहरे दौर की पत्रकारिता का एक और गवाह चला गया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-313243 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-21-at-12.16.34-PM-1.jpeg" alt="" width="590" height="843" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-21-at-12.16.34-PM-1.jpeg 590w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-21-at-12.16.34-PM-1-210x300.jpeg 210w" sizes="auto, (max-width: 590px) 100vw, 590px" /></p>
<p>पत्रकार, साहित्य और संपादक अनूप श्रीवास्तव जी के जीवन की डेडलाइन (समय सीमा) 83 बरस ही थी। इस समय सीमा में उनकी जिन्दगी के अखबार में खबरों का खजाना था। एक आलराउंडर कलमनवीस की तरह वो अच्छे रिपोर्टर और बेहतरीन संपादक भी थे। अखबारी दुनिया में व्यंग्य साहित्य को स्थान देने वाले चंद पत्रकारों में उनका भी नाम शुमार था।</p>
<p>अपने जमाने के मशहूर अखबार स्वतंत्र भारत का चर्चित व्यंग्य कॉलम &#8220;कांव-कांव&#8221; उन्होंने काफी दिनों तक लिखा। राजनीतिक रिपोर्टिंग के वो माहिर थे। खास कर कांग्रेस बीट में उनकी सबसे अच्छी पकड़ थी। उनके पास सोर्सेज (सूत्रों) का खजाना था।</p>
<p>राज्य मुख्यालय की एक्सक्लूसिव खबरें उन तक घर चल कर आती थीं। विख्यात पत्रकार माधवकांत मिश्र जी के साथ देश के पहले आध्यात्मिक चैनल आस्था को उन्होंने लांच करवाया था।स्वतंत्र भारत की हड़ताल के दौरान बतौर संपादक अनूप जी ने अखबार को बचाने की हर संभव कोशिश की।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000"><strong>अखबार से रिटायर होने के बाद व्यंग्य विधा पर आधारित पत्रिका अट्टहास शुरू की। जीवन के अंत तक उन्होंने इसका संपादन किया। आठ दशक के जीवन में पांच दशक से ज्यादा समय पत्रकारिता को समर्पित कर दिए। तीस वर्षों से अधिक स्वतंत्र भारत में सेवाएं देने के बाद जीवन के अंत तक (पच्चीस वर्ष से अधिक) वो अट्टहास के संपादक और प्रकाशक रहे। देश-दुनिया के विख्यात साहित्यकारों/व्यंग्यकारों को उन्होंने भव्य अट्टहास सम्मान समारोह में सम्मानित किया।</strong></span></p></blockquote>
<p>किंतु मौत शास्वत है। हर जीवन का अंत मृत्यु है। हर अट्टहास हंसाते-हंसाते अंत में आंखों में आंसू देता है। गहमागहमी तनहाई का दंश देती है। पत्रकारिता और साहित्य के चकाचौंध मे अनूप जी जब जीवन की आठवीं दहाई की तरफ बढ़े तो तनहाई के अंधेरे उन्हें अखरने लगे थे। पत्रकार बेटी शिल्पा की ससुराल दूसरे शहर मे है और बेटा विदेश में रहता है।</p>
<p>इस बीच पत्नी ही उनका एकमात्र सहारा थी। अक्सर वो कहते थे-बेटा तन्हाई अखरती है। जो उनकी जिन्दगी के मेले में साथ थे उसमें कुछ चले गए और कुछ चलने फिरने की स्थिति मे नहीं। और मौजूदा पीढ़ी के वर्किंग जर्नलिस्ट्स के पास अपने बुजुर्गों से मिलनें और उनका हाल पूछने की तौफीक नहीं रहती। (मैं भी उन नाकारों में शामिल हूं।)<br />
<strong>श्रद्धांजलि</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पत्रकारों के लिए सरकारी अस्पतालों में खुलेंगे अलग काउंटर</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/separate-counters-will-open-for-journalists-in-government-hospitals/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Supriya Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 20 Sep 2023 10:12:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[अस्पताल]]></category>
		<category><![CDATA[उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक]]></category>
		<category><![CDATA[पत्रकार]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज डेस्क लखनऊ, उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पत्रकारों की सुविधा के लिए अलग से काउंटर खोले जाएंगे। जिला अस्पतालों में खुलने वाले इन काउंटरों से पत्रकारों को दवा देने व अन्य काम किए जाएंगे।उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने यूपी वर्किंग जर्नलिय्ट यूनियन (यूपीडब्लूजेयू) के एक प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात के दौरान यह &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff"><strong>जुबिली न्यूज डेस्क</strong></span></p>
<p><strong>लखनऊ,</strong> उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पत्रकारों की सुविधा के लिए अलग से काउंटर खोले जाएंगे। जिला अस्पतालों में खुलने वाले इन काउंटरों से पत्रकारों को दवा देने व अन्य काम किए जाएंगे।उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने यूपी वर्किंग जर्नलिय्ट यूनियन (यूपीडब्लूजेयू) के एक प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात के दौरान यह एलान करते हुए कहा कि पत्रकारों के इलाज संबंधी किसी भी दिक्कत को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार तत्पर है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-286948 size-large" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2023/09/WhatsApp-Image-2023-09-20-at-2.34.46-PM-1024x683.jpeg" alt="" width="618" height="412" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2023/09/WhatsApp-Image-2023-09-20-at-2.34.46-PM-1024x683.jpeg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2023/09/WhatsApp-Image-2023-09-20-at-2.34.46-PM-300x200.jpeg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2023/09/WhatsApp-Image-2023-09-20-at-2.34.46-PM-768x512.jpeg 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2023/09/WhatsApp-Image-2023-09-20-at-2.34.46-PM-1536x1024.jpeg 1536w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2023/09/WhatsApp-Image-2023-09-20-at-2.34.46-PM.jpeg 1599w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /></p>
<p>उन्होंने कहा कि जल्द ही सरकारी अस्पतालों में पत्रकारों को पर्चा व दवा वितरण आदि के लिए अलग के काउंटर खोले जाएंगे। यूपीडब्लूजेयू अध्यक्ष टीबी सिंह के नेतृत्व में पाठक से मिलने पहुंचे प्रतिनिधि मंडल ने उन्हें पत्रकारों की मांगो से संबंधित एक ज्ञापन सौंपा और समस्याओं के निराकरण की मांग की।</p>
<p>उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारों की आवास संबंधी समस्या का हल निकाला जाएगा। इसके लिए उन्होंने समिति बनाकर सरकारी आवासीय योजनाओं में भूखंड देने अथवा तैयार मकानों को हायर परचेज सिस्टम से देने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में मीडिया का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ है और उसी अनुपात में उनके लिए सुविधाओं की जरुरत है जिसके सरकार हर संभव प्रयत्न करेगी।</p>
<p>उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को सौंपे ज्ञापन में यूपीडब्लूजेयू ने यूपी में पत्रकारों के लिए पेशन की सुविधा जल्द से जल्द शुरु करवाने, पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने, पत्रकारों के उत्पीड़न व उनकी समस्याओं को लेकर राज्य व जिला स्तर पर स्थाई समितियों को क्रियाशील करते हुए सक्रिय ट्रेड यूनियन के सदस्यों व वरिष्ठ पत्रकारों को उनका सदस्य मनोनीत किए जाने और राज्य मुख्यालय की भांति जिला व तहसील स्तर पर भी पत्रकारों को आयुष्मान कार्ड जारी करते हुए उन्हें चिकित्सा सुविधा दिए जाने की मांग की है। यूपीडब्लूजेयू ने सभी जिला चिकित्सालयों में पत्रकारों को दवा का वितरण करने के लिए व पर्चा बनने के लिए अलग से काउंटर की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की।</p>
<p><span style="color: #993366"><strong>ये भी पढ़ें-<a style="color: #993366" href="https://www.jubileepost.in/in-the-era-of-social-media-this-company-is-providing-many-facilities-to-the-people/">SOCIAL MEDIA के दौर में ये कंपनी लोगों को दे रही है कई Facilities</a></strong></span></p>
<p>प्रतिनिधि मंडल में शामिल आईएफडब्लूजे राषट्रीय उपाध्यक्ष व मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने एसजीपीजीआई की तर्ज पर केजीएमयू व लोहिया संस्थान में पत्रकारों के निशुल्क इलाज की व्यवस्था की व पत्रकारों (मान्यता प्राप्त व गैर मान्यता प्राप्त) की आकस्मिक मृत्यू की दशा में उनके परिवारों को आर्थिक सहायता दिए जाने की व्यवस्था करने की मांग उठाई।</p>
<p>टीबी सिंह ने ज्ञापन के माध्यम से उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता समिति का पुनर्गठन किए जाने व इसमें वास्तविक रुप से पत्रकारों का प्रतिनिधत्व करने वाली संस्थाओं के सदस्यों को नामित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को आवास संबंधी दिक्कतों को देखते हुए राजधानी व सभी जिलों में रियायती दरों पर आवास अथवा भूखंड उपलब्ध कराया जाना चाहिए।</p>
<p>उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पत्रकारों की मांगों को शासन के समक्ष रखने व उनके उचित हल का आश्वासन देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार हर समस्या का हल निकालने का प्रयास करेगी। यूपीडब्लूजेयू प्रतिनिधि मंडल में संगठन सचिव अजय त्रिवेदी, वरिष्ठ सचिव उत्कर्ष सिन्हा, प्रदेश सचिव राजेश मिश्रा व पीपी सिंह, लखनऊ मंडल अध्यक्ष एंथोनी सिंह, आईएफडब्लूजे राष्ट्रीय सचिव सिद्धार्थ कलहंस, वरिष्ठ पत्रकार सुनील दिवाकर सहित अन्य शामिल रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पत्रकारों की मदद करेगा गूगल का एआई टूल, नई बहस छिड़ने की संभावना</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/googles-ai-tool-will-help-journalists-likely-to-spark-new-debate/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Supriya Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Jul 2023 12:14:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[खबर]]></category>
		<category><![CDATA[गूगल का एआई टूल]]></category>
		<category><![CDATA[पत्रकार]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज डेस्क दुनिया की अग्रणी टेक कंपनी गूगल का कहना है कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित जो टूल विकसित कर रही है, उसका उद्देश्य समाचार रिपोर्टिंग में पत्रकारों की आवश्यक भूमिका की जगह लेना नहीं है. बल्कि ये टूल शोध करने और लेख लिखने में पत्रकारों की मदद करेंगे. गूगल ने गुरुवार को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff"><strong>जुबिली न्यूज डेस्क</strong></span></p>
<p>दुनिया की अग्रणी टेक कंपनी गूगल का कहना है कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित जो टूल विकसित कर रही है, उसका उद्देश्य समाचार रिपोर्टिंग में पत्रकारों की आवश्यक भूमिका की जगह लेना नहीं है. बल्कि ये टूल शोध करने और लेख लिखने में पत्रकारों की मदद करेंगे.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-283426 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2023/07/105545054-1541069232925thumbnailgoogleexplains-clean.jpg" alt="" width="929" height="523" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2023/07/105545054-1541069232925thumbnailgoogleexplains-clean.jpg 929w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2023/07/105545054-1541069232925thumbnailgoogleexplains-clean-300x169.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2023/07/105545054-1541069232925thumbnailgoogleexplains-clean-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 929px) 100vw, 929px" /></p>
<p>गूगल ने गुरुवार को कहा कि वह एआई आधारित टूल विकसित करने के लिए मीडिया कंपनियों &#8211; विशेष रूप से छोटे प्रकाशकों- के साथ काम कर रहा है. कंपनी का कहना है यह टूल &#8220;पत्रकारों को न्यूज हेडलाइन लिखने या अलग-अलग लेखन शैलियों के विकल्पों में सहायता कर सकते हैं.</p>
<p>गूगल की प्रवक्ता जेन श्राइडर ने इस संबंध में कंपनी के शुरुआती प्रयासों के बारे में कहा, &#8220;हमारा लक्ष्य पत्रकारों को इन उभरती प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करने का विकल्प देना है जिससे उनका काम और उत्पादकता बढ़े. उन्होंने कहा, &#8220;हम यह साफ करना चाहते हैं कि इन टूल्स का उद्देश्य पत्रकारों की अपने विषयों की रिपोर्टिंग, न्यूज क्रिएट करना और फैक्ट चेकिंग जैसे काम की जगह लेना नहीं है. यह टूल केवल पत्रकारों को राइटिंग स्टाइल और खबरों के लिए हेडलाइन का सुझाव देंगे.&#8221;</p>
<h3><span style="color: #0000ff">नई बहस छिड़ने की संभावना</span></h3>
<p>वैश्विक स्तर पर आर्थिक सुस्ती के कारण पहले ही मीडिया उद्योग पर संकट के बादल छाए हुए हैं. सिर्फ अमेरिका में इस साल के शुरूआती पांच महीनों में सैकड़ों पत्रकारों की नौकरी जा चुकी है.गूगल के जेनेसिस नाम के इस टूल पर रिपोर्ट सबसे पहले द न्यूयॉर्क टाइम्स ने दी थी. उसने बताया कि गूगल अपने नए टूल को द न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉशिंगटन पोस्ट और न्यूज कॉर्प जैसे ऑर्गेनाइजेशन के सामने प्रेजेंटेशन दे चुका है. टाइम्स के मुताबित कुछ प्रमुख मीडिया हस्तियों, जिन्होंने गूगल की पेशकश को देखा है इस पर चिंता व्यक्त की.</p>
<p><span style="color: #993366"><strong>ये भी पढ़ें-<a style="color: #993366" href="https://www.jubileepost.in/brother-beheaded-his-sister-then-roamed-around-the-village/">भाई ने बहन का सिर काटा, फिर हाथ में लेकर गांव में घूमता रहा, चेहरे पर शिकन तक नहीं</a></strong></span></p>
<h3><span style="color: #0000ff">फायदे और नुकसान दोनों</span></h3>
<p>क्रेग न्यूमार्क ग्रेजुएट स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के डायरेक्टर जार्विस ने कहा कि अगर ये टूल विश्वसनीय रूप से तथ्यात्मक जानकारी दे सकता है तो पत्रकारों को इसे यूज करना चाहिए जिससे उनका समय बच सके. दूसरी तरफ, अगर न्यूज आर्गेनाईजेशन इस टूल का इस्तेमाल उन विषयों पर करते हैं जिन्हें बारीकियों और सांस्कृतिक समझ की आवश्यकता होती है तो समाचार संगठनों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>PIB के तीन अफसरों के खिलाफ दिल्ली में पत्रकार क्यों कर रहे प्रदर्शन?</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/why-are-journalists-protesting-in-delhi-against-three-pib-officers/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Utkarsh Sinha]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Jul 2022 05:48:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[PIB]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[पत्रकार]]></category>
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					<description><![CDATA[नयी दिल्ली। दिल्ली में पत्रकारों ने पीआईबी के तीन अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पत्रकारों ने सोमवार को इस मांग को लेकर जंतर मंतर पर जोरदार प्रदर्शन किया।इस दौरान जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एक्ट एवं यूएनआई के रिवाइवल की मांग की आवाज़ भी बुलंद की गयी। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong><span style="color: #800000;">नयी दिल्ली।</span> </strong></span><span style="font-weight: 400;">दिल्ली में पत्रकारों ने पीआईबी के तीन अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पत्रकारों ने सोमवार को इस मांग को लेकर जंतर मंतर पर जोरदार प्रदर्शन किया।इस दौरान जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एक्ट एवं यूएनआई के रिवाइवल की मांग की आवाज़ भी बुलंद की गयी।</span></p>
<blockquote><p><span style="color: #ff6600;"><strong>इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि पीआईबी एक्रीडेशन रिनुअल एवं नए एक्रीडेशन को लेकर काफी संख्या में पत्रकार भेदभाव के शिकार हुए हैं। इससे पत्रकारों में असंतोष है।</strong></span></p></blockquote>
<p><span style="font-weight: 400;"> उन्होंने कहा कि पत्रकारों की खुशहाली के लिए जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एक्ट जरुरी है। उन्होंने यूएनआई के रिवाइबल की भी मांग की।</span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-259657" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/07/patrakar-1024x473.jpeg" alt="" width="618" height="285" /></p>
<p><span style="font-weight: 400;">प्रदर्शनकारियों की अगुआई करते हुए जॉइंट फोरम के संयोजक सुलतान एस कुरैशी ने कहा कि पीआईबी के तीन अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई कर सरकार पत्रकारों की समस्याओं को दूर करे।</span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-259659" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/07/patrakar-2-1-1024x682.jpeg" alt="" width="618" height="412" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/07/patrakar-2-1-1024x682.jpeg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/07/patrakar-2-1-300x200.jpeg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/07/patrakar-2-1-768x512.jpeg 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/07/patrakar-2-1.jpeg 1280w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /></p>
<p><span style="font-weight: 400;">प्रदर्शनकारियों को पेरिओडिकल प्रेस ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ सुरेन्द्र शर्मा, यूनाइटेड इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (UIJA) के सुबीर सेन, संजीत चौधरी, अजित सिंह, इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के गोपाल ठाकुर, सार्क जर्नलिस्ट फोरम के अनिरुद्ध सुधांशु, वरिष्ठ पत्रकार सजन झा फ़िल्म अभिनेता अंजनी कुमार, समाजवादी चिंतक डॉ.महेंद्र सिंह एवं सेव यूएनआई मूवमेंट के डॉ समरेन्द्र पाठक सहित कई पत्रकारों ने संबोधित किया। </span>विरोध कार्यक्रम की शुरुआत दिवंगत पत्रकार पंडित उपेन्द्र नाथ मिश्र को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि देने के साथ शुरू हुई।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>डंके की चोट पर : उसके कत्ल पे मैं भी चुप था, मेरा नम्बर अब आया</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/i-was-also-silent-on-his-murder-now-my-number-has-come/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 May 2022 04:10:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली डिबेट]]></category>
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		<category><![CDATA[हाशिम अंसारी]]></category>
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					<description><![CDATA[शबाहत हुसैन विजेता वह लाउडस्पीकर पर चिल्ला रहे हैं लाउडस्पीकर के खिलाफ. वह हिन्दुओं से चार-चार बच्चे पैदा करने को कह रहे हैं जिन्हें न तो शादी में आस्था है और न ही दुनियावी रिश्तों में. जिन्हें निर्माण की ज़िम्मेदारी दी गई है वह बुल्डोजर लेकर निकल पड़े हैं, और जिन्हें मोहब्बत का टीचर माना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-87885 size-thumbnail" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/Shabahat-Husain-Vijeta-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" />शबाहत हुसैन विजेता</strong></span></p>
<p>वह लाउडस्पीकर पर चिल्ला रहे हैं लाउडस्पीकर के खिलाफ. वह हिन्दुओं से चार-चार बच्चे पैदा करने को कह रहे हैं जिन्हें न तो शादी में आस्था है और न ही दुनियावी रिश्तों में. जिन्हें निर्माण की ज़िम्मेदारी दी गई है वह बुल्डोजर लेकर निकल पड़े हैं, और जिन्हें मोहब्बत का टीचर माना जाता रहा है वह नफरत की फसल उगा रहे हैं. सब कुछ उल्टा-पुल्टा है मगर हम विश्वगुरु बनेंगे यह भरोसा है.</p>
<p>मज़हबी कट्टरता नयी चीज़ नहीं है. हमेशा से है मगर पहले आँखों में शर्म हुआ करती थी. लोग कट्टर थे मगर न नफरत करते थे न नफरत सिखाते थे. दो मज़हब के लोग आपस में मिलते थे तो इज्जत से मिलते थे. पीठ पीछे भी बुराई नहीं करते थे.</p>
<p>बहुत ज्यादा पीछे जाने की ज़रूरत नहीं है. तीस-पैंतीस साल पीछे के दौर में कदमताल की जाए तो मौजूदा ज़िन्दगी जहन्नुम सरीखी लगने लगेगी. सुबह की अज़ान से लोग उठते थे. वह अलार्म सरीखी थी. किसी को भी अज़ान से प्राब्लम नहीं होती थी, वह किसी भी मज़हब का हो. अज़ान के बाद लोग सुबह की ताज़ी हवा लेने घरों से निकलते थे तो मन्दिरों से निकलने वाला घंटियों का संगीत मन में ताजगी भर देता था.</p>
<p>नदियाँ साफ़-सुथरी थीं. सूरज निकलने के साथ ही लोग उसमें नहाने के लिए उतर जाते थे. नहाने के बाद पूजा-अर्चना करने मन्दिरों में चले जाते थे. शहर की तंग गलियों में तो कुर्ता-पैजामा पहने टोपी लगाये लोग मस्जिदों से निकल रहे होते थे और मन्दिरों में पूजा के बाद माथे पर तिलक लगाये राम-राम करते हुए लोग वापस लौट रहे होते थे. सब अपने-अपने रास्ते न किसी को किसी से नफरत और न ही दूसरे मज़हब की उधेड़बुन में लगने का वक्त.</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>अयोध्या-बनारस और चित्रकूट में तो सुबह का नज़ारा देखने के लायक होता था. बनारस में उस्ताद बिस्मिल्ला खां शहनाई बजाते थे तब काशी विश्वनाथ मन्दिर के दरवाज़े खुलते थे. गंगा के पानी में वजू करने के बाद उस्ताद बिस्मिल्ला खां नमाज़ पढ़ने के बाद अपने घर लौट जाते थे.</strong></span></p></blockquote>
<p>अयोध्या के राम जन्मभूमि बनाम बाबरी मस्जिद विवाद ने पूरे हिन्दुस्तान में नफरत की हिलोरें उठा दीं लेकिन अयोध्या की ज़मीन पर खड़े होकर इस मुद्दे को परखने की ज़रूरत है. बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी और निर्मोही अखाड़े के राम केवल दास तथा दिगम्बर अखाड़े के रामचन्द्र परमहंस के बीच ज़िन्दगी भर दोस्ती बनी रही. हाशिम अंसारी बाबरी मस्जिद की 1949 से पैरवी कर रहे थे. हाशिम अंसारी और रामचन्द्र परमहंस एक ही रिक्शे पर सवार होकर अदालत जाते थे. दोपहर का खाना दोनों साथ में खाते थे, मुकदमे की सुनवाई के बाद दोनों साथ ही वापस लौट जाते थे.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-254998 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/hashim-amsari-paramhans.jpg" alt="" width="640" height="443" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/hashim-amsari-paramhans.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/hashim-amsari-paramhans-300x208.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/hashim-amsari-paramhans-110x75.jpg 110w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>जुलाई 2016 में हाशिम अंसारी का इंतकाल हुआ तो उनके दरवाज़े पर अयोध्या के संतों की भीड़ लग गई. महंत ज्ञानदास हाशिम अंसारी की लाश के पास फूट-फूटकर रो पड़े. उन्हें अयोध्या में शीश पैगम्बर की कब्र के पास दफ्न किया गया तो उस वक्त मुसलमानों से ज्यादा हिन्दू वहां मौजूद थे. अयोध्या के संतों ने वहीं एलान किया कि हाशिम अंसारी के परिवार की ज़िम्मेदारी अब हम उठाएंगे.</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>अयोध्या के मन्दिरों में फूलों की सप्लाई आज भी मुसलमान करते हैं. राम और सीता के कपड़ों की सिलाई आज भी मुसलमान करते हैं मगर हालात हमें कहाँ ले आये कि एक साध्वी ने कहा कि हिन्दू अब मुसलमानों की बनाई कांवड़ का इस्तेमाल बंद करें. हम कौन से दौर में पहुँच गए जब अचानक से अज़ान की आवाज़ कर्कश लगने लगी.</strong></span></p></blockquote>
<p>हालात के बिस्तर की सिलवटों को पढ़ने का सलीका आ जाये तो सब कुछ बहुत साफ़-साफ़ नज़र आने लगेगा. मज़हब जब तक सिर्फ मज़हब था बहुत अच्छा था लेकिन जिस दिन से मज़हब की डोर को सियासी लोगों ने झूला बना लिया यही तोड़फोड़ की जड़ बन गया. कुर्सियां हासिल करने के लिए इंसान को इंसान से लड़ाने का नुस्खा तैयार कर लिया गया.</p>
<p>मन्दिर और मस्जिद के नाम पर हुकूमतें बनने लगीं तो मुल्क के विकास की किताब को बंद कर दिया गया. सियासी लोगों की समझ में आ गया कि अंग्रेजों का फूट डालो और राज करो का नुस्खा बहुत अच्छा था. पुराने दौर के हिन्दू-मुसलमानों के बीच अपने मज़हब को लेकर कट्टरता थी मगर दूसरे मज़हब से नफरत नहीं थी. इन सियासी लोगों ने उसी कट्टरता पर वार करते हुए नफरत की धारा को भी बहा दिया.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-151532 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/02/12_46_046311914_76248322_loudspeaker-ll.jpg" alt="" width="750" height="406" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/02/12_46_046311914_76248322_loudspeaker-ll.jpg 750w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/02/12_46_046311914_76248322_loudspeaker-ll-300x162.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 750px) 100vw, 750px" /></p>
<p>मन्दिर के नाम पर बनी हुकूमत जब भी किसी मस्जिद पर बुल्डोजर चलाती तो यह अहसास कराती कि हम ही हैं जो तुम्हें मुगलों की लूटी हुई दौलत वापस दिला रहे हैं. मस्जिदें तोड़ते-तोड़ते बुल्डोजर अब मन्दिरों की तलाश में निकल चुके हैं. दिल्ली के सरोजनीनगर में बने सौ साल से पुराने चार मन्दिरों को ढहाने की तैयारी कर ली गई. मन्दिरों के दरवाजों पर नोटिस चस्पा कर दिया गया है.</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>दरअसल समझने की यह ज़रूरत हैं कि सियासत अलग चीज़ है और मज़हब अलग चीज़ है. दोनों का घालमेल किया ही नहीं जा सकता. दूध इंसान के लिए बहुत फायदेमंद है तो मछली भी जिस्म की तमाम कमियों को दूर करती है मगर मछली और दूध को साथ-साथ नहीं लिया जाता. मछली खाने के बाद दूध पीने से सफ़ेद दाग की बीमारी हो जाती है. मछली के साथ दही नहीं खाना चाहिए. उड़द की दाल खाने के बाद भी दूध नहीं पीना चाहिए.</strong></span></p></blockquote>
<p>सियासत और मज़हब का गठजोड़ में मछली और दूध के गठजोड़ जैसा है. लम्बे वक्त से यह गठजोड़ चलता आ रहा और हुकूमत दिलवाता आ रहा है तो इसे बनाये रखने के लिए सियासत टेस्ट में बदलाव भी करती रहती है ताकि नयापन बना रहे. कभी अज़ान का मुद्दा, कभी सड़क पर नमाज़ का मुद्दा.</p>
<p>लाउडस्पीकर का मुद्दा वह लोग लेकर आये हैं जो लाउडस्पीकर के बगैर विकलांग सरीखे हैं. जिस लाउडस्पीकर पर यह रैलियां करते हैं, नफरत फैलाते हैं, वोटों की जोड़तोड़ करते हैं, दलों का गठजोड़ करते हैं. विपक्ष पर हमला करते हैं उसी लाउडस्पीकर को लेकर हंगामा करते हैं.</p>
<blockquote><p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-104687 alignright" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/05/Danke-Chote-Par.jpg" alt="" width="150" height="150" /><span style="color: #ff0000;"><strong>हंगामे कामयाब हो जाते हैं क्योंकि इस हंगामे में अफसर, कलाकार, पत्रकार और कवि भी शामिल हो जाते हैं. सबकी अपनी-अपनी ज़रूरतें हैं. किसी को अवार्ड चाहिए है तो किसी को पैसा और किसी को प्रमोशन. अपने थोड़े से फायदे के लिए नफरत का बिजनेस करने वालों ने क़ानून को भी अपनी जेब में रखा हुआ है. हालात खराब होते जा रहे हैं. आपसी मोहब्बत नफरत में बदलती जा रही है. साथ खेलकर बड़े हुए लोग एक दूसरे को खटकने लगे हैं.</strong></span></p></blockquote>
<p>संभलने की ज़रूरत है. चीज़ों को समझने की ज़रूरत है. हम लगातार उस रास्ते पर बढ़ते जा रहे हैं जिसमें फिसलन बढ़ती जा रही है और वापसी का रास्ता सकरा होता जा रहा है. जितनी जल्दी यह बात समझ आ जाए बेहतर है कि मज़हब हमें जीने का सलीका सिखाने के लिए है एक दूसरे से दूर करने के लिए नहीं. सरोजनीनगर दिल्ली के मन्दिरों के दरवाजों पर ध्वस्तीकरण का नोटिस रातों में सोने नहीं देता. बार-बार जगाकर पूछता है कि सौ साल से पुराने मन्दिर आखिर अवैध कैसे हो गए. जिनसे लोगों की आस्था जुड़ी है उसे सरकार कैसे तोड़ डालेगी. सरकार क्या किसी की आस्था से खेल सकती है. मगर सच यह भी तो है जो नवाज़ देवबंदी ने लिखा था :-</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>उसके कत्ल पे मैं भी चुप था, मेरा नम्बर अब आया. </strong></span><br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>मेरे कत्ल पे आप भी चुप हैं. अगला नम्बर आपका है.</strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/the-syrup-of-politics-filled-these-religious-leaders-with-poison/">डंके की चोट पर : सियासत की चाशनी ने भर दिया इन धर्मगुरुओं में ज़हर</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/pulkit-mishra-is-neither-a-saint-nor-a-guru-of-the-prime-minister-this-is-a-fraud-only-a-fraud/">डंके की चोट पर : पुलकित मिश्रा न संत है न प्रधानमन्त्री का गुरू यह फ्राड है सिर्फ फ्राड</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/better-if-the-kashmir-files-becomes-a-ointment/">डंके की चोट पर : द कश्मीर फाइल्स मरहम बने तो बेहतर वर्ना…</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/if-akhilesh-yadav-was-awake-then-he-would-have-been-the-chief-minister-today/">डंके की चोट पर : …तब अखिलेश यादव जाग रहे होते तो आज मुख्यमंत्री होते</a></strong></span></p>
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