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	<title>डॉ शिशिर चंद्रा Archives &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<link>https://www.jubileepost.in/tag/डॉ-शिशिर-चंद्रा/</link>
	<description>News &#38; Information Portal</description>
	<lastBuildDate>Fri, 16 Jul 2021 14:59:53 +0000</lastBuildDate>
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		<title>विनाश की तरफ ले जा रहा है खेती के लिए पानी लेने का यह तरीका</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/this-way-of-taking-water-for-agriculture-is-leading-to-destruction/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Jul 2021 14:59:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[अशोक कुमार]]></category>
		<category><![CDATA[आर एस सिन्हा]]></category>
		<category><![CDATA[उद्योग]]></category>
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		<category><![CDATA[ग्राउंड वॉटर एक्शन ग्रुप]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ शिशिर चंद्रा]]></category>
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		<category><![CDATA[स्टेट ऑफ ग्राउंड वॉटर इन उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज़ ब्यूरो लखनऊ. भूजल सप्ताह की शुरुआत के मौके पर 16 जुलाई को वॉटरएड इंडिया, विज्ञान फाउंडेशन ग्राउंड वॉटर एक्शन ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में वेबिनार का आयोजन हुआ. इस वेबिनार में &#8220;स्टेट ऑफ ग्राउंड वॉटर इन उत्तर प्रदेश&#8221; पुस्तक का विमोचन किया गया. विमोचन के बाद भूगर्भ जल स्तर में हो रही कमी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली न्यूज़ ब्यूरो </strong></span></p>
<p><strong>लखनऊ.</strong> भूजल सप्ताह की शुरुआत के मौके पर 16 जुलाई को वॉटरएड इंडिया, विज्ञान फाउंडेशन ग्राउंड वॉटर एक्शन ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में वेबिनार का आयोजन हुआ. इस वेबिनार में &#8220;स्टेट ऑफ ग्राउंड वॉटर इन उत्तर प्रदेश&#8221; पुस्तक का विमोचन किया गया. विमोचन के बाद भूगर्भ जल स्तर में हो रही कमी एवं इसके कारण पर गंभीर चर्चा की गई. कार्यक्रम को प्रारंभ करते हुए वॉटरएड इंडिया के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. शिशिर चंद्रा ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया.</p>
<p>वॉटरएड इंडिया के क्षेत्रीय प्रबंधक फर्रुख रहमान खान ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए चर्चा प्रारंभ की. जिसमें उन्होंने बताया कि जल सिर्फ उतर प्रदेश का ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए चर्चा का एक विषय है, पर आज हम उत्तर प्रदेश के ही विषय में चर्चा कर रहे हैं. यहां की आबादी लगभग 22 करोड़ है.</p>
<p>अगर आबादी के दृष्टिकोण से देखें तो उत्तर प्रदेश विश्व का पांचवा सबसे बड़ा देश होगा. हाल ही के दिनों में भूमिगत जल पर चर्चा बहुत जोरों से प्रारंभ हुई है. सरकार ने भी इस दिशा में ठोस कदम उठाए हैं और भूजल विनियमन की ओर ध्यान केंद्रित किया है और बहुत से अभियान भी चला रही है, और यह एक प्रकार का अवसर भी है, कि इस राजनीतिक इच्छा का लाभ सभी उठा सकें.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-228572 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/water-aid.jpg" alt="" width="612" height="480" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/water-aid.jpg 612w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/water-aid-300x235.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 612px) 100vw, 612px" /></p>
<p>&#8220;स्टेट ऑफ ग्राउंड वॉटर इन उत्तर प्रदेश&#8221; पुस्तक के लेखक आर एस सिन्हा, पूर्व वरिष्ठ जियोहाइड्रोलाजिस्ट, ग्राउंड वॉटर डिपार्टमेंट उत्तर प्रदेश ने इस अवसर पर उत्तर प्रदेश में भूगर्भ जल की समेकित स्थिति पर तैयार दस्तावेज जारी किया. यह प्रदेश की पहली ऐसी रिपोर्ट है जिसमें भूजल के सभी पहलुओं का एक समग्र परिदृश्य तथा नीतिगत मामलों का विस्तार से समावेश किया गया है.</p>
<p>विगत वर्षों में भूजल की स्थिति में परिवर्तन, खराब होती गुणवत्ता से जुड़े आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है और उसके आधार पर भूजल की समस्याओं के स्थाई समाधान हेतु एक मजबूत प्रबंधन प्रणाली का सुझाव दिया गया है. भूजल आंकड़ों के समय प्रबंधन की आवश्यकता के साथ भूजल के लिए देश में एक केंद्रीकृत कानून बनाए जाने की आवश्यकता का सुझाव दिया गया है और जमीन के भीतर स्थित एक्यूफर्स को पुनर्जीवित करने के लिए एकीकृत तरीकों को अपनाने की वकालत की गई है.</p>
<p>भूजल प्रदूषण के मामले लगातार प्रकाश मे आने के परिणाम स्वरूप इस बात की आवश्यकता पर बल दिया गया है कि पूरे प्रदेश में भूजल गुणवत्ता की समग्र मैपिंग कराई जाए. इस राज्य रिपोर्ट में 74 विकासखंडो में तत्काल भूजल प्रबंधन की आवश्यकता बताई गई है जो वर्ष 2004 से लगातार गंभीर स्थिति में हैं. यह भी हो सकता बताई गई है कि भूजल जल दोहन एवं रिचार्ज के लिए विज्ञान आधारित नियम तय किए जाएं.</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>अशोक कुमार, पूर्व निदेशक, ग्राउंड वॉटर डिपार्टमेंट उत्तर प्रदेश ने बताया कि कृषि, उद्योग एवं घरों की निर्भरता 70% भूमिगत जल पर निर्भर है. उत्तर प्रदेश की धरती गंगा यमुना दोआब की भूमि है जो की भारी मात्रा में वर्षा जल को समेटती है किंतु खेती के लिए गैर वैज्ञानिक तरीके से भूमिगत जल का दोहन विनाश की तरफ ले जा रहा है. जिसे पूर्व की स्थिति में लाने के लिए दशकों लगेंगे.</strong></span></p></blockquote>
<p>उत्तर प्रदेश भूजल दोहन में अग्रणी राज्य है। प्रकृति के प्रति असंवेदनशीलता के परिणाम स्वरुप ही उत्तर प्रदेश के 72 विकासखंड अति दोहित की श्रेणी में हैं, नहर समादेश प्रणाली में भी विपरीत परिस्थितियां हैं जिससे कि दोहन और संरक्षण की नीति की आवश्यकता है. किसानों से हित भाषी चर्चा नहीं होती जिससे कारण वह गैर वैज्ञानिक तरीके से भूजल का दोहन करते हैं. इच्छाशक्ति, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के माध्यम से ही जल का संवर्धन किया जा सकता है.</p>
<p>उत्तर प्रदेश के 40 से 45 जिले आर्सेनिक से प्रभावित हैं, कुछ स्थानों पर नाइट्रेट, फ्लोराइड एवं मानव जनित प्रदूषण बहुत अधिक है जैसे कि उन्नाव एवं कानपुर के कारखाने पंप के माध्यम से जमीन में ही दूषित जल को भर देते हैं और वहां के आसपास के निवासी एवं स्कूली बच्चे र्कोमियम युक्त पानी पीने को विवश हैं. यदि हर आदमी मानवता के आधार पर सोचें तो समस्याओं का समाधान हो सकता है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-228570 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/water-aid-2.jpg" alt="" width="640" height="366" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/water-aid-2.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/water-aid-2-300x172.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड, उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक क्षेत्रीय निदेशक पी के त्रिपाठी ने चर्चा के दौरान बताया कि वर्ष 2020 से ही रिसॉर्ट मैपिंग का असेसमेंट ऑनलाइन किया जा रहा है जो कि प्रत्येक दो वर्ष में दोहराया जाएगा. जन जागरूकता के लिए गैर सरकारी संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण है, इनके माध्यम से स्थानीय स्तर पर लोग अपने पानी के खर्च का खाका तैयार कर उसकी बचत सुनिश्चित कर सकते हैं. उन्होंने साथ में यह भी बताया कि एक्यूफर की मैपिंग का कार्य जारी है, साथ ही पानी से जुड़े सभी विभागों को एक साथ मिलकर उसकी उपलब्धता एवम् गुणवत्ता पर कार्य करने की आवश्यकता है. यदि पानी की मांग को घटा दिया जाए, तो ही सतत् विकास लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है.</p>
<p>डॉ. वाई बी कौशिक ने बताया की नीति निर्माण में यह विशेष ध्यान रखना चाहिए कि सरकार प्रतिबंधित न करें बल्कि लोगों को इस प्रकार जागरुक करें कि वे स्वयं से जल के दोहन के प्रति अपने को प्रतिबंधित करें.</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>बी आर चौरसिया जी ने बताया कि पानी की समस्या वर्ष 2000 के उपरांत प्रारंभ हुई वर्ष 2008 में क्लाइमेट चेंज के कारण पूरी दुनिया को बुरे परिणामों का सामना करना पड़ा. वर्षा वर्ष दर वर्ष कम होती जा रही हैं, जिसमें हमारे जंगलों की भूमिका अहम है. जहां पर 5% से कम जंगल क्षेत्र हैं वहां पर वर्षा में कमी पाई गई है अतः वर्षा की प्रकृति में बदलाव लाने के लिए अधिक से अधिक जंगल का होना अनिवार्य है.</strong></span></p></blockquote>
<p>पी बी दिवेदी जी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में शहरीकरण भी जल दोहन का सबसे बड़ा कारण है यहां पर आ नियंत्रित तरीके से भूजल का दोहन किया गया है ऐसे में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य करने की आवश्यकता है एवं इसका कड़ाई से पालन हो यह भी सुनिश्चित करना अनिवार्य है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-228571 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/water-aid-3.jpg" alt="" width="626" height="480" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/water-aid-3.jpg 626w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/water-aid-3-300x230.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 626px) 100vw, 626px" /></p>
<p>भूजल सप्ताह कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. भीष्म कुमार, सेवानिवृत्त प्रोफेशनल स्टाफ एवं सलाहकार, इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी, विआना, ऑस्ट्रेया ने बताया कि भूमिगत जल की समस्या समय के साथ साथ तेजी से बढ़ रही है जिसका मूलभूत कारण इच्छाशक्ति को माना जा सकता है. यदि हम एडवांस तकनीकी का प्रयोग करके सही आंकड़ों को इकट्ठा करें, जिससे कि क्षेत्र विशेष के लिए सही नीति का निर्माण हो सके, तो भूमिगत जल के स्तर को संभाला जा सकता है. भूमिगत जल का मूल्यांकन भी इस प्रकार से समझा जा सकता है कि जैसे पिता से उस के पुत्र को एवं उससे उसके आगे आने वाली पीढ़ी को संपत्ति हस्तांतरित होती है उसी प्रकार भूमिगत जल भी समय के साथ हस्तांतरित होता रहता है जो पीढ़ी जितना अधिक दोहन करेगी, वह अपने आगे आने वाली पीढ़ी के लिए उतना ही समस्या उत्पन्न करेगी. जल की गुणवत्ता भी एक बहुत बड़ी समस्या के रुप में सामने आ रहा है. जिसके संबंध में उन्होंने श्रीलंका का उदाहरण देते हुए बताया वहां पर 20,000 लोगों की मृत्यु किडनी फेल होने के कारण हो गई लोगों ने इसका कारण जल की गुणवत्ता को बताया गया, किंतु अध्यन के दौरान यह पाया गया कि कृषि में रासायनिक उर्वरक के प्रयोग से यह घटना घटित हुई. अतः हमें जल की गुणवत्ता को बचाए रखने के लिए कृषि में रासायनिक उर्वरक का कम उपयोग करना चाहिए. जिससे कि जल स्रोत प्रदूषित होने से बचें और आम जनमानस को बीमारियों से बचा जा सके. डॉ. शिशिर चंद्रा ने कार्यक्रम समापन करते हुए सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया.</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/asha-kandara-became-an-administrative-officer-while-sweeping/">झाडू लगाते-लगाते प्रशासनिक अधिकारी बन गई आशा कंडारा</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/the-role-of-play-writers-in-the-freedom-movement-was-important-like-revolutionaries/">क्रान्तिकारियों सरीखी अहम रही स्वतंत्रता आंदोलन में नाट्य लेखकों की भूमिका</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/see-the-battle-of-danish-siddiquis-camera-in-pictures/">तस्वीरों में देखिये दानिश सिद्दीकी के कैमरे की जंग</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/preparation-to-open-100-agricultural-schools-in-jharkhand/">झारखंड में 100 कृषि पाठशालाएं खोलने की तैयारी</a></strong></span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>&#8216;पानी की कहानी&#8217;- खारे पानी से मिली गांव को निज़ात, रिसावदार कुएं से पाइप पेय जल आपूर्ति</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/story-of-water-by-dr-shishir-chandra/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Jun 2020 13:58:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्पेशल स्टोरी]]></category>
		<category><![CDATA[Dr. Shishir Chandra]]></category>
		<category><![CDATA[drinking water supply]]></category>
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		<category><![CDATA[वॉटरएड इंडिया]]></category>
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					<description><![CDATA[डॉ शिशिर चंद्रा इंसान के जीवन में पानी का सबसे अधिक महत्त्व है, पानी के बिना जीवन नहीं। ऐसे तो धरती पर पानी की कमी नहीं पर साफ़ सुरक्षित पीने योग्य पानी काफी कम है जो अधिकांशतः जमीन के अंदर है। अब यदि जमीन के अंदर का पानी भी साफ़ सुरक्षित पीने योग्य न मिले &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000080;"><strong>डॉ शिशिर चंद्रा</strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-175313 size-thumbnail" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/dr-shishir-chandra-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" /></p>
<p>इंसान के जीवन में पानी का सबसे अधिक महत्त्व है, पानी के बिना जीवन नहीं। ऐसे तो धरती पर पानी की कमी नहीं पर साफ़ सुरक्षित पीने योग्य पानी काफी कम है जो अधिकांशतः जमीन के अंदर है। अब यदि जमीन के अंदर का पानी भी साफ़ सुरक्षित पीने योग्य न मिले तो सोचिये लोगों का क्या हाल होता होगा और ऐसे दूषित पानी को साफ़ सुरक्षित पीने योग्य बनाने के लिए क्या-क्या जतन करना पड़ता होगा।</p>
<p>ऐसे ही एक कहानी है जिला चित्रकूट के कर्वी ब्लॉक के झरिआ गांव की। इस गांव में 817 लोगों के बीच पीने के पानी के लिए 11 हैंडपंप हैं और कुछ एक लोग के पास अपना निजी बोरवेल है, पर पानी&#8230;. , पानी की कहानी ये है कि इन सारे के सारे पानी के स्रोत चाहे वो हैंडपंप हो या बोरवेल सब दूषित है। इनका पानी अत्यधिक खारा है जो कि पीने योग्य नहीं है।</p>
<p>कुछ एक कुआं भी है इस गांव में पर पानी उसका भी खारा है। तो सवाल ये उठता है कि फिर इस गांव के लोग पीने के पानी का क्या इंतज़ाम करते है? कहां से और कैसा पानी लाते है पीने के लिए? क्या वो पानी पीने योग्य होता है? तो जवाब की तलाश में 3 साल पहले अपनी टीम के साथ मै भी देखने गया वो जगह जहाँ से इस गांव के लोग पीने के पानी का इंतजाम करते थे।</p>
<figure id="attachment_175315" aria-describedby="caption-attachment-175315" style="width: 796px" class="wp-caption aligncenter"><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-175315 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/wa.jpg" alt="" width="796" height="505" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/wa.jpg 419w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/wa-300x190.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 796px) 100vw, 796px" /><figcaption id="caption-attachment-175315" class="wp-caption-text">pic1- कुएं की खुदाई व पत्थर चुनाई, pic2- कुएं के बीच बीच में खुंसी हुई पाईप का काम</figcaption></figure>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>आप लोग को जानकर ताज्जुब होगा कि जहां यह दावा है कि आज के ज़माने में विज्ञान और सरकारी व्यवस्था हर एक छोटे से छोटे गांव में भी लगभग पहुंच चुकी है, वहीं आज भी इस गांव में लोग के पास नहर के किनारे पर छोटे-छोटे गड्ढे खोदकर उसमें से पानी को प्रयोग मे लाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था और घर पर उसे छानकर पीने और खाना बनाने के काम में लाते थे। </strong></span></p></blockquote>
<p>घर की महिलाओं, बच्चों और कुछ नवजवानो का सुबह शाम का काम ही यही होता था। पूछने पर पता चला कि केवल यही पानी पीने योग्य है। (यहाँ ये बताना जरूरी है कि ये नहर बारिश के पानी पर निर्भर है जो खोह के पहाड़ों से निकल कर लगभग 60 किलो मीटर की दूरी तय कर पयस्वनी नदी में मिलती है जो आगे यमुना में मिल जाती है, जिसको स्थानीय बोल चाल में लोग गढुआ नाला कहते हैं। इस बरसाती नहर में साल के 8-10 महीने लगभग पानी बना रहता है जिसका इस्तेमाल आस पास के लोग सींचाई व मवेशियों को पानी पिलाने के<br />
काम में लाते हैं)।</p>
<p>उनकी बात सुनकर मन में एक साथ कई सवाल घूमने लगा ठीक वैसे ही जैसे अभी आपके मन में शायद उठ रहा हो&#8230;. जैसे ये पानी कितना शुद्ध होगा? उसमें कितना पानी इकट्ठा होता होगा? पानी भरने में लोगों का कितना समय जाता होगा? घर से उस जगह की दूरी कितनी होगी और कितना ही पानी वे ला पाते होंगे? किशोरियों महिलाओं को रास्ते में और किस प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ता होगा ? आदि।</p>
<figure id="attachment_175316" aria-describedby="caption-attachment-175316" style="width: 828px" class="wp-caption aligncenter"><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-175316" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/wa-2.jpg" alt="" width="828" height="289" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/wa-2.jpg 521w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/wa-2-300x105.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 828px) 100vw, 828px" /><figcaption id="caption-attachment-175316" class="wp-caption-text">pic3-कुएं कीजगतऔर जाल का काम, pic4-तैयार रिसावदार कुआं</figcaption></figure>
<p>इन सवालों के साथ शुरू हुआ इसका उपाय तलाशने का सफ़र जो लंबा था। इस क्रम में स्थानीय लोगों के साथ ही तकनीकी ज्ञान रखने वालों से भी बात हुई पर कोई ठीक ठाक रास्ता नहीं सूझ रहा था, पर जैसा पहले कहा कि समस्या कठिन था तो रास्ता आसान कहाँ से होता।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>इसी बीच हमारे साथ काम करने वाले एक वरिष्ठ साथी और मुद्दे के विशेषज्ञ पुनीत श्रीवास्तव से बात हुई जिन्होंने हमे एक नए प्रकार की तकनीक &#8216;रिसावदार कुआं &#8216; (infiltration well) बनाने का सुझाव दिया। यह एक ऐसा कुँआ होता है जो उस पारम्परिक कुँए से बिलकुल अलग होता है, इसमें पानी ज़मीन के तल से नहीं आता बल्कि ज़मीन की उप-सतह (Sub Surface) से पानी के रिसाव द्वारा इस कुंए मे पानी इक्कठा होता। क्योंकि ज़मीन के अंदर का पानी बहुत ही खारा है और पीने योग्य नहीं है यह जानकारी तो हमें पहले ही थी इसलिए यह विधि ही उपयुक्त लगी। कुंआ, नहर के किनारे उस जगह बनाना निश्चित हुआ जहां से गांव के लोग गड्ढे बनाकर पानी लेते थे। जिससे कि कुंए को नहर के पानी से लगातार सपोर्ट मिलता रहे।</strong></span></p></blockquote>
<p>समस्या का उपाय तो मिल गया पर क्रियान्वयन? काम इतना आसान नहीं था, सबके लिए यह तकनीक भी नई थी, साथ में ये संशय भी था कि यह कुआं बनने के बाद भी पर्याप्त पानी मिलेगा भी या नहीं। जैसे तैसे कई सवालों के जवाब तलाशते हुए यह काम शुरु हुआ। सबसे पहले गांव मे उपलब्ध अलग-अलग पानी के स्रोतों की सरकारी लैब से जाँच कराई गयी जिसमें ये नहर के किनारे वाला गड्ढा भी शामिल था। हमारा पहला कदम लक्ष्य की और मजबूती से बढ़ा जब हमें यह रिपोर्ट मिली की इस गड्ढे का पानी पीने योग्य है, फिर ये जाँचना था कि इस पानी का डिस्चार्ज रेट क्या है, प्रति व्यक्ति कितना पानी मिलने की गुंजाइश है आदि, और उत्तर संतोषप्रद था तो हौसला बढ़ा।</p>
<figure id="attachment_175317" aria-describedby="caption-attachment-175317" style="width: 699px" class="wp-caption aligncenter"><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-175317" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/wa-3.jpg" alt="" width="699" height="692" /><figcaption id="caption-attachment-175317" class="wp-caption-text">तैयार पानी की टंकी</figcaption></figure>
<p>अब असल काम था रिसावदार कुएं का निर्माण, जिसकी तकनीक हम सभी के लिए नई थी, इसलिए निर्माण काम में लगे लोगों को इसकी संरचना समझाना और विश्वास पैदा करना कि यह काम करेगा काफी मुश्किल भरा था। थोड़ी मशक्कत के बाद साझा समझ बन पाई कि कैसा कुआं बनना है। फिर शुरू हुआ कुँए के निर्माण का काम, हमलोग लगातार साथ मे लगे थे कि डिज़ाइन के अनुसार ही काम हो। कटोरे नुमा कुँए की संरचना की गई जिसमें उस पानी को एकत्र किया जा सके जो उप-सतह से रिस रहा है, इसलिए कुँए के निर्माण के समय बीच-बीच में नहर की ओर पी.वी.सी. पाइप की कई नलिकाए भी डाली गई जिससे पानी का रिसाव कुँए की ओर बना रहे। उसकी अंदर की दीवारों मे पत्थर की चुनाई की गई और यह ध्यान रखा गया कि मजबूती के साथ ही पानी का रिसाव कुंए में बना रहे साथ ही कुँए की तलहटी को पक्का किया गया जिससे तलहट से पानी न रिसे और इस बड़े कंटेनर नुमा ढाँचा मे पानी बराबर इकठ्ठा होता रहे।</p>
<figure id="attachment_175314" aria-describedby="caption-attachment-175314" style="width: 836px" class="wp-caption aligncenter"><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-175314" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/wa-4.jpg" alt="" width="836" height="500" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/wa-4.jpg 331w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/wa-4-300x179.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 836px) 100vw, 836px" /><figcaption id="caption-attachment-175314" class="wp-caption-text">तैयार स्टैंड पोस्ट</figcaption></figure>
<p>इन बारीकियों को समझते समझाते अंत में कुआं बनकर तैयार हुआ। अब चुनौती थी यह सुनिश्चित करना कि बाढ़ से इस ढाँचे को कोई नुक्सान न हो इस हेतु कुएं के किनारे पत्थरों का थोड़ा ऊँचा बाड़ नुमा ढाँचा तैयार किया गया। छोटे बड़े ऐसे कई काम हुए जिससे कुएं को संभावित नुक्सान से बचाया जा सके। यह पूरी प्रक्रिया चुनौतियोंसे भरी थी, बीच में ऐसा भी समय आया कि लगा कि ये काम हो नहीं पायेगा, शंका भी हुई कि अगर यह ढांचाँ योजनानुसार काम नहीं कर पाया तो समय, ऊर्जा, पैसा कहीं सब बर्बाद न हो जाए, पर टीम ने उम्मीद कभी नहीं छोड़ी और डटे रहे। इस पक्रिया का आखिरी चरण था फिलटर मीडिया के साथ पानी की टंकी और जगह-जगह स्टैंड पोस्ट के निर्माण की ताकि कुएं के पानी को सुरक्षित तरीके से नल तक पहुंचाया जा सके जो सफलता के साथ पूरा हुआ।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong> अब बारी थी परिणाम कि, अंततः साफ़ और सुरक्षित पीने योग्य पानी नल में आ गया जिससे जितनी खुशी गांव वालों को थी उतनी ही ख़ुशी पूरी टीम को भी थी। इसके बाद इस कुएं और अन्य निर्माण की देखरेख और समुचित संचालन जैसे कुएं की समय-समय पर सफ़ाई, उसके अंदर नियमित रूप से और निश्चित मात्रा का क्लोरीनेशन, टंकी, फ़िल्टर मीडिया, पानी भरने की जगह की नियमित सफ़ाई, पानी की बरबादी पर रोक आदि के लिए &#8216;विलेज वॉश फोरम&#8217; जिसमें स्थानीय लोग ही शामिल हैं के साथ विस्तृत कार्य योजना व जिम्मेदारी तय हुई जिससे ये सिस्टम ठीक तरीके से काम करता रहे।</strong></span></p></blockquote>
<p>एक ऐसा काम जिसकी परिकल्पना ही चुनौतीपूर्ण हो उसको मुक़ाम तक पहुँचाने का संघर्षभरा रास्ता तय कर अंत में उसको अमलीजामा पहनाना और टीम के अथक प्रयास के बाद नलों में पानी, और लोगों के चेहरे पर खुशी देखने का संतोष शब्दों में बयां करना कठिन है। आखिरकार झरिया के लोगों को खारे पानी से निजात मिली और हमें बहुमूल्य अनुभव और सीख। आशा है<br />
ऐसी ही और नई-नई पानी की कहाँनी आपतक पहुंचा पाऊ।</p>
<p>टीम के सभी साथियों विशेषकर अशोक जी, सुनील, अनिल, मनीष, रेनू, पुनीत, फर्रुख और सभी झरिया वासियों का बहुत शुक्रिया।</p>
<p><strong>(लेखक वॉटरएड इंडिया के कार्यक्रम समन्वयक हैं)</strong></p>
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<p><iframe loading="lazy" title="चीन को लेकर जनता में गुस्सा है , लेकिन सही रणनीति क्या होगी ? Jubilee TV" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/Q_U3v3idzCo?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
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