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	<title>गांधी जी Archives &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<link>https://www.jubileepost.in/tag/गांधी-जी/</link>
	<description>News &#38; Information Portal</description>
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		<title>सत्ता की लड़ाई हारकर, वैचारिक धरातल पर जीत गई समाजवादी पार्टी</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/losing-the-battle-for-power-samajwadi-party-won-on-the-ideological-level/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Mar 2022 04:47:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
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					<description><![CDATA[ओम प्रकाश सिंह डिंपल यादव की बिटिया टीना यादव ने अपने पापा अखिलेश के लिए ट्वीट किया है कि बहुत अच्छा लड़े। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने भी बेटे की पीठ थपथपाया है। पिता की शाबाशी और बिटिया के जोश भरे ट्वीट को भले ही कुछ लोग इसे परिवारवाद के रुप में देंखें लेकिन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #000080;">ओम प्रकाश सिंह</span></strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-250577 size-thumbnail" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/03/om-prakash-singh--150x150.jpeg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/03/om-prakash-singh--150x150.jpeg 150w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/03/om-prakash-singh--300x300.jpeg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/03/om-prakash-singh--1024x1024.jpeg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/03/om-prakash-singh--768x768.jpeg 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/03/om-prakash-singh-.jpeg 1080w" sizes="auto, (max-width: 150px) 100vw, 150px" />डिंपल यादव की बिटिया टीना यादव ने अपने पापा अखिलेश के लिए ट्वीट किया है कि बहुत अच्छा लड़े। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने भी बेटे की पीठ थपथपाया है। पिता की शाबाशी और बिटिया के जोश भरे ट्वीट को भले ही कुछ लोग इसे परिवारवाद के रुप में देंखें लेकिन यह एक अनुभव और युवा नजरिए का मिश्रण है। उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव में सत्ता पाने की लड़ाई अखिलेश यादव हार गए हो लेकिन वैचारिक धरातल पर सपा ने फतह हासिल की है।</p>
<p>चुनाव प्रचार के दौरान अखिलेश यादव ने कहा था कि लोकतंत्र बचाने के लिए यह अंतिम चुनाव है। इसके बाद तो रास्ता क्रांति का ही बचता है। सवाल उठता है कि कैसी क्रांति क्योंकि डाक्टर लोहिया ने कहा था कि ”हिन्दुस्तान में क्रांति असंभव है, क्योंकि जिस देश में बिल्कुल बराबरी हो जाए या संपूर्ण ग़ैरबराबरी हो जाए तो वहां इन्क़लाब नहीं होगा। जिस देश में ग़ैरबराबरी की खाई गहरी हो जाए, दिमागों में घर कर ले, समाज का गठन भी हो जाए, प्रायः संपूर्ण ग़ैरबराबरी, तो वहां की जनता क्रांति के लिए बिल्कुल नाकाबिल हो जाती है।”</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-250250 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/03/akhilesh-yadav-jubilee-post-e1646910402910.jpeg" alt="" width="943" height="539" /></p>
<p>अब सवाल उठता है कि क्या विधानसभा चुनाव में किसी भी विपक्षी नेता या दल ने ग़ैर बराबरी का सवाल उठाया था। क्योंकि इस सवाल से टकराये बिना हिन्दुस्तान की सियासत में परिवर्तन की कहानी नहीं लिखी जा सकती है? एक और अहम सवाल है नवउदारवादी हमले का, इस सवाल को या तो छोड़ दिया गया या फिर इससे टकराना किसी भी नेता या दल ने मुनासिब नहीं समझा। भारतीय राजनीति के इन दो सवालों का जवाब लिए बिना वैसे भी संप्रदायिकता खिलाफ धर्मनिरपेक्ष ताक़तों को निर्णायक जीत नहीं मिल सकती है।</p>
<p>डाक्टर लोहिया ने नैनीताल की एक सभा में 23 जून सन् 1962 को कहा था कि ”अजीब हालत है, कि जिसको क्रांति चाहिए, उसके अंदर शक्ति है ही नहीं और वह शायद सचेत हो कर उसकी चाह रखता ही नहीं है, और जिसमें क्रांति कर लेने की शक्ति है उसको क्रांति चाहिए नहीं या तबीयत नहीं है। ये मोटे तौर पर राष्ट्रीय निराशा की बात है।” अखिलेश यादव को अपने क्रांति वाले बयान पर डाक्टर लोहिया के विचारों के आलोक में फिर से गौर करना चाहिए।</p>
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<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/america-said-will-not-let-any-country-help-russia/">अमेरिका बोला-किसी देश को नहीं करने देंगे रूस की मदद</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/congress-working-committee-cwc-meeting/">CWC की मीटिंग में हार पर मंथन लेकिन नये अध्यक्ष पर नहीं बनी बात</a></strong>  </span></p>
<p>इसमें कोई दो राय नहीं है कि उत्तर प्रदेश 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी सत्ता की लड़ाई हार गई। यह भी सच है कि वैचारिक धरातल पर अखिलेश यादव ने फतेह हासिल किया है और जन से उनका जुड़ाव गहरा हुआ है। &#8216;सपा मुस्लिम, यादव की पार्टी है&#8217; के दायरे से भी इस चुनाव ने अखिलेश को बाहर निकाला है। अब सवाल उठता है कि आखिर समाजवादी पार्टी अखिलेश के जी तोड़ मेहनत के बावजूद सत्ता के सिंहासन से दूर क्यों रह गई?</p>
<p>वैचारिक धरातल पर जीत के संदर्भ में देखेंं तो समाजवादी पार्टी अपने जन्म काल से लेकर अब तक मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने में चुनाव दर चुनाव सफल होती रही है। सन् 1993 के चुनाव में सपा को 18%, सन् 96 के चुनाव में 21.6%, 2002 के चुनाव में 25.33%, सन् 2007 के चुनाव में 25.45%, सन् 2012 के चुनाव में 29.13%, सन् 2017 के चुनाव में 21,82% और 2022 के चुनाव में लगभग 37% मत हासिल हुए। इस बीच समाजवादी पार्टी ने तमाम राजनीतिक उतार चढ़ाव के बीच तीन बार सरकार बनाया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-249244 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/02/akhilesh-yadav.jpeg" alt="" width="640" height="408" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/02/akhilesh-yadav.jpeg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/02/akhilesh-yadav-300x191.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>मत प्रतिशत बढ़ने के बावजूद समाजवादी पार्टी सत्ता से बाहर रह गई तो उसके भी कई कारण हैं।  उस पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से अखिलेश यादव को मंथन करना होगा। सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग, ईवीएम का रहस्यमयी आवरण से इतर सपा को अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूत करना होगा। आज की तारीख में पार्टी का संसदीय बोर्ड सिर्फ छलावा है, इसे ताकतवर बनाना होगा। गणेश परिक्रमा करने वालों नेताओं को भी उनकी राजनीतिक जमीन दिखानी होगी।</p>
<p>सपा को चाहिए कि वो विधानसभा चुनाव में मत प्रतिशत और  विधायकों की संख्या बढ़ने का जश्न मनाए। सांगठनिक विस्तार करे और सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ सड़क पर संघर्ष करे। दो साल बाद लोकसभा का चुनाव 2024 में है। देश की बात छोड़ दें तो उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ही दक्षिणपंथी के कुत्सित प्रयासों का जवाब दे सकती है। राष्ट्रीय  दल कांग्रेस को चाहिए कि वो उत्तर प्रदेश में सपा को बड़े भाई की भूमिका में स्वीकार करे।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/australia-imposes-sanctions-on-33-billionaire-businessmen-of-russia/">रूस के 33 अरबपति कारोबारियों पर ऑस्ट्रेलिया ने लगाए प्रतिबंध</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/5-indian-students-died-in-canada-foreign-minister-expressed-grief/">कनाडा में 5 भारतीय छात्रों की मौत, विदेश मंत्री ने जताया शोक</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/what-did-bjp-mps-say-on-kerala-congresss-tweet-on-the-issue-of-kashmiri-pandits/">कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर केरल कांग्रेस के ट्वीट पर क्या बोले बीजेपी सांसद?</a></strong></span></p>
<p>उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव में दमदार प्रदर्शन करके  अखिलेश यादव ने यह साबित कर दिया है कि हिंदी प्रदेश में अगर सांप्रदायिकता का कोई मुकाबला कर सकता है तो वह सपा ही है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि दक्षिणपंथ के उभार के समय लड़ने के लिए भारतीय राजनीति में चंद्रशेखर, ज्योति बसु, हरकिशन सिंह सुरजीत, देवीलाल, काशीराम, करुणानिधि, बीजू पटनायक, लालू प्रसाद जैसे दिग्गज नेता थे। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तर प्रदेश में अखिलेश को समर्थन देकर इस लड़ाई को आगे बढ़ा दिया है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-246537 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/01/akhilesh-with-mulayam.gif" alt="" width="789" height="603" /></p>
<p>वर्तमान युग में लखनऊ से दिल्ली तक दक्षिण पंथ न सिर्फ अपनी मजबूत सत्ता कायम कर चुका है बल्कि उसकी नफ़रत और लालच का दोष पूरे समाज में फैल चुका है। अखिलेश यादव के सामने समय कठिन है और चुनौती बड़ी है लेकिन  उनके प्रति जनता का विश्वास बढ़ रहा है। जन विश्वास को सहेजने के लिए समाजवादी पार्टी को आत्ममंथन करना होगा। दलित समाज का स्वतः रुझान सपा की ओर होना भी बड़ा संकेत है। गैर यादव पिछड़ी जातियों में भी सपा की स्वीकार्यता बढ़ी है।</p>
<p>पिछले कई दशकों से सत्ता की चाबी हथियाने के लिए दक्षिणपंथी शक्तियां प्रयासरत थींं। 90 के दशक में मंडल की राजनीति ने उन्हें आक्रामक होने का मौका दिया और कमंडल के रास्ते सत्ता पाने का रास्ता दक्षिणपंथियों ने चुन लिया जो आज भी बदस्तूर जारी है। धर्म के आधार पर दक्षिण पंथ लगातार जीत रहा है और देश में लोकतांत्रिक शक्तियां कमजोर हुई हैं। समाजवादी चिंतक प्रोफेसर आनंद कुमार का मानना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव ने एक बार फिर देश में वैचारिक राजनीति का प्रवेश करा दिया है।</p>
<p>आनंद कुमार का मानना है कि दक्षिण पंथ को हराने के लिए उत्तर प्रदेश में वैचारिक समाजवाद एकत्र हुआ। जिसने वोट भी लिया और सीटें भी ले रहा है।सवाल बस इतना सा है कि समाजवाद को आगे लाने के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार से बाहर के प्रयास होंगे या नहीं। जिस दक्षिणपंथ का देशव्यापी विस्तार हुआ है उसका जवाब धर्म और जात वाले हिंदुत्व से नहीं होगा। लोकतंत्र को स्वस्थ देखने वाली ताकतेंं अखिलेश की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही हैं। डाक्टर लोहिया के रास्ते चलकर अखिलेश को गांधी जी के सपनों को साकार करना होगा। लड़ाई लंबी चलेगी और छल कपट, झूठ की राजनीति का मुकाबला वैचारिक आधार पर ही लड़ा जा सकता है।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)</strong></span></p>
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			</item>
		<item>
		<title>गांधीजी की हत्या के मामले में सरदार पटेल का लौह पुरूष का मुलम्मा कैसे उतरा</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/article-related-to-mahatma-gandhi-and-sardar-patel-relation/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 31 Jan 2021 08:35:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[के पी सिंह गांधी जी की हत्या को अब 70 साल से अधिक का समय हो चुका है। इस बीच देश की राजधानी दिल्ली में यमुना नदी में न जाने कितना पानी बह चुका है। गांधी जी की हत्या से जुडे कई पहलू है जिन पर बार बार चर्चा और विश्लेषण होते रहेगें। रियासतों के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4><strong><span style="color: #0000ff"><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-194200 alignleft" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/10/k.p.singh_-300x228-1.jpg" alt="" width="162" height="123" />के पी सिंह</span></strong></h4>
<p>गांधी जी की हत्या को अब 70 साल से अधिक का समय हो चुका है। इस बीच देश की राजधानी दिल्ली में यमुना नदी में न जाने कितना पानी बह चुका है। गांधी जी की हत्या से जुडे कई पहलू है जिन पर बार बार चर्चा और विश्लेषण होते रहेगें। रियासतों के विलय के संदर्भ में लौह पुरूष का तमगा हासिल करने वाले देश के पहले गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल राष्ट्र पिता की हत्या को लेकर सवालों से घिर गये थे।</p>
<p>जयप्रकाश नारायण ने बापू की हत्या के सार्वजनिक रूप से सरदार पटेल को जिम्मेदार ठहराया था। सरदार पटेल इन आरोपो से इतने विचलित हो गये कि उन्होने प्रधानमंत्री नेहरू से उनको मंत्रि मण्डल से छुटटी देने की पेशकस कर डाली थी ।</p>
<p>आज नेहरू और पटेल के बीच कथित अंतरद्वन्द को साबित करने का दौर है लेकिन नेहरू ने पटेल को उस नाजुक मौके पर जो चिटठी लिखी वही मंत्रि मण्डल में बने रहने के लिये उनका सम्बल बनी ।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000">फिर भी जयप्रकाश नारायण और अन्य असंतुष्टों ने उन्हें नहीं बख्शा । इससे पटेल इतने ज्यादा डिप्रेशन चले गये कि उन्हे हार्ट अटैक हो गया और गांधी जी की हत्या की कुछ ही दिनों के बाद उनकी जिन्दगी का भी अवशान हो गया । दरअसल सरदार पटेल गांधी जी द्वारा उपवास के जरिये सरकार पर दबाव बनाकर पाकिस्तान को 55 करोड रूपये दिलाने के उनके कदम से नाराज थे।</span></p></blockquote>
<p>डा0 लोहिया की जीवनी लिखने वाले ओंकार शरद पर विश्वास किया जाये तो अपनी हत्या के कुछ दिनों पहले से गांधी जी कांग्रेस को भंग करने के बारे में लोहिया से गम्भीर चर्चा करना चाहते थे जिसे लेकर पटेल दुर्भावना ग्रस्त हो गये थे। उन्होने गांधी जी से मुलाकात कर बाहर निकले डा0 लोहिया पर तंज भी कसा था कि तुम्ही हो जो बापू को बहका रहे हो ।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-208727 size-large" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/032-1024x558.png" alt="" width="618" height="337" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/032-1024x558.png 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/032-300x163.png 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/032-768x418.png 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/032.png 1072w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /></p>
<p>फिर भी यह कहना मुश्किल है कि पटेल ने जानबूझकर बापू की सुरक्षा से जुडे पहलुओ को नजरअन्दाज किया होगा। खुद गांधी जी के आजीवन सचिव रहे प्यारेलाल ने गांधी की हत्या की जांच के लिये गठित जैल कपूर आयोग के सामने स्वीकार किया था कि तमाम मतभेदो के बाबजूद बापू के लिये उनके मन में इज्जत कम नहीं हुयी थी ।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000">उन्होने बापू की हत्या के लिये षडयंत्र किये जाने की खबरों को देखते हुये यह प्रस्ताव किया था कि बापू की प्रार्थना सभा में आने वाले लोगो की जांच के बाद ही उन्हें अन्दर जाने दिया जाये लेकिन खुद बापू इसके लिये तैयार नहीं हुये थे जैसा कि बाद में इन्दिरा गांधी अपने सिख अंगरक्षकों को हटाने के लिये तैयार नहीं हुयी थी भले ही इसी के कारण उनकी हत्या हो गयी थी ।</span></p></blockquote>
<p>निजी तौर पर सरदार पटेल की स्थित जो भी हो पर उस पुलिस महकमें को बापू की हत्या के मामले में नहीं बख्शा जा सकता जिसके लिये गृह मंत्री के नाते सरदार पटेल जिम्मेदार थे। 20 जनवरी 1948 को मदनलाल पहवा बापू की प्रार्थना सभा में बम फैकने के कारण गिरफ्तार किया गया था। उस पर थर्ड डिग्री तरीके अपनाये गये जिससे उसने अपने साथ बापू की हत्या के षडयंत्र में शामिल नाथूराम गोड्से सहित लगभग सभी लोगो की पहचान उजागर कर दी थी ।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-208728 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/gandhi-and-vallabhbhai-edited-2-696x392-1.jpg" alt="" width="696" height="392" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/gandhi-and-vallabhbhai-edited-2-696x392-1.jpg 696w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/gandhi-and-vallabhbhai-edited-2-696x392-1-300x169.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<p>दिल्ली के मरीन होटल में जिसमें पहवा ने बम चलाने का परीक्षण किया था वहां के स्टाफ से भी पुलिस को साजिश कर्ताओ के बारे में पर्याप्त इनपुट मिल गया था पर पुलिस ने इनकी कडिया जोडने और साजिशकर्ताओं के चेहरे उजागर करने के मामले में लापरवाही बरती जिससे बापू को मौत का शिकार होना पडा ।</p>
<h4><strong><span style="color: #800000">ये भी पढ़े : <a style="color: #800000" href="https://www.jubileepost.in/special-article-related-to-development-of-bundelkhand/">पानी में हवा का बुलबुला</a></span></strong></h4>
<p>बापू की हत्या के मामले में नाथूराम गौड्से सहित 9 लोगो का ट्रायल हुआ जिनमें सावरकर बेदाग बरी कर दिये गये पर बापू की हत्या की साजिश के मुख्य अनुसंधानकर्ता नगरवाला का आखिरी तक कहना रहा कि सावरकर के सहयोग के बिना यह हत्या किसी तरह सम्भव नहीं थी। नगरवाला को मलाज था कि दिल्ली पुलिस ने सावरकर की भूमिका को लेकर सबूत जुटाने में पर्याप्त मेहनत नहीं की ।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000">अब जरा नाथूराम गोड्से के लक्षित बयानों को याद करे । उसने यह तो बताया कि वह हिन्दू राष्ट्र नाम के अखबार का सम्पादक है जिसका मालिक उसका सहयोगी नारायण आप्टे है पर वह इस बात को घोंट गया कि उसने दैनिक अग्रणी नाम का भी एक अखबार निकाला था जिसे कांग्रेस सरकार ने जब्त कर लिया था । </span></p></blockquote>
<p>गांधी के खिलाफ जहर उगलने वाले इस अखबार को निकालने के लिये सावरकर ने ही 15 हजार रूपये की मदद की थी ।राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को गांधी जी की हत्या के मामले में अब अदालती सुरक्षा कवच प्राप्त है लेकिन कुछ तथ्य है जो भुलाये नहीं जा सकते है।</p>
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<p>नाथूराम ने अपने बयान में कहा था कि उसका आखिर में संघ से कोई सम्बन्ध नही रह गया था जबकि उसके भाई गोपाल गोड्से ने बाद में एक साक्षात्कार में कहा कि नाथूराम ने यह बयान संघ और गुरू गोलवरकर की हिफाजत के लिये दे दिया था हालांकि वे संघ के बौद्धिक कार्यवाहा थे और गांधी जी की हत्या के समय भी उनकी यह हैसियत बरकरार थी ।</p>
<h4><strong><span style="color: #800000">ये भी पढ़े : <a style="color: #800000" href="https://www.jubileepost.in/bombay-highcourt-decision-demanding-cash-from-wife-is-not-harassment/" rel="bookmark">चर्चित जस्टिस पुष्पा गनेडीवाल ने सुनाया एक और फैसला, जानिए क्या है</a></span></strong></h4>
<p>गांधी के सचिव प्यारेलाल ने भी लिखा है कि संघ के लोगो ने अपने कुछ लोगो से कहा था कि वे 30 जनवरी 1948 को अपना रेडियों खोलकर रखे जिस पर उन्हें कोई खुश करने वाली सूचना मिलेगी । उनके मुताबिक गांधी जी की हत्या के बाद कुछ जगह संघ के लोगो ने मिठाइयां भी बांटी थी । सच जो भी हो लेकिन जाहिर यह होता है कि सरदार पटेल ने पुलिस की चूक न रोक पाने के अपराधबोध की वजह से संघ पर प्रतिबन्ध थोप दिया था जो फरवरी 1948 से जुलाई 1949 तक चला ।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गांधी जी का चश्मा हासिल करने के लिए इस कलेक्टर ने दे दिए ढाई करोड़ रुपये</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/this-collector-gave-two-and-a-half-crore-rupees-for-acquiring-gandhi-ji-spectacles/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2020 10:02:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल स्टोरी]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकन कलेक्टर]]></category>
		<category><![CDATA[अहिंसा]]></category>
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		<category><![CDATA[राष्ट्रपिता]]></category>
		<category><![CDATA[हार्ट अटैक]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को लेकर मौजूदा दौर चाहे जिस स्तर की टिप्पणियाँ की जा रही हों लेकिन दुनिया के सामने गांधी जी का क्या कद है इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांधी जी ने जिस चश्मे का इस्तेमाल 1920 में किया था उसे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली न्यूज़ डेस्क</strong></span></p>
<p><strong>नई दिल्ली.</strong> राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को लेकर मौजूदा दौर चाहे जिस स्तर की टिप्पणियाँ की जा रही हों लेकिन दुनिया के सामने गांधी जी का क्या कद है इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांधी जी ने जिस चश्मे का इस्तेमाल 1920 में किया था उसे दो करोड़ 55 लाख रुपये में नीलाम किया गया है. इस चश्मे को एक अमेरिकन कलेक्टर ने इतनी बड़ी राशि देकर खरीद लिया.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-183888 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/08/gandhiji-gold-glasses-300x200.jpg" alt="" width="575" height="383" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/08/gandhiji-gold-glasses-300x200.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/08/gandhiji-gold-glasses-310x205.jpg 310w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/08/gandhiji-gold-glasses.jpg 600w" sizes="auto, (max-width: 575px) 100vw, 575px" /></p>
<p>भारतीय आज़ादी के नायक महात्मा गांधी ने अहिंसा के रास्ते पर चलकर आज़ादी हासिल की थी. अपनी ज़बान के बल पर दुनिया को अपना बना लेने का फन रखने वाले गांधी जी अपने चाहने वालों को समय-समय पर कोई न कोई भेंट दे दिया करते थे. दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी ने 1920 में अपने एक प्रशंसक को अपना चश्मा भेंट कर दिया था. यह चश्मा कई पीढ़ियों तक इस परिवार के पास ही रहा.</p>
<p>इस चश्मे को लिफ़ाफ़े में रखकर कोई ईस्ट ब्रिस्टल ऑक्शन कंपनी के लेटर बॉक्स में डालकर चला गया. कंपनी के ऐंड्रयू स्टो ने समझ लिया कि इस चश्मे को लम्बे समय से संभालने वाले परिवार को इस चश्मे की कीमत का कोई अंदाजा नहीं है. कंपनी ने तय किया कि वह इस चश्मे को नीलाम करेगी.</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/yogi-government-is-preparing-to-abolish-these-62-laws/">इन 62 कानूनों को खत्म करने की तैयारी में है योगी सरकार</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/why-did-the-ministry-of-defense-not-provide-any-information-related-to-rafale-deal-to-cag/">रक्षा मंत्रालय ने CAG को क्यों नहीं दी राफेल डील से जुड़ी कोई जानकारी ?</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/uttar-pradesh-yogi-government-first-industrial-park-build/">उत्तर प्रदेश के इस जिले में बनेगा पहला औद्योगिक पार्क</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/bihar-assembly-elections-the-second-round-will-change-soon/">बिहार विधानसभा चुनाव : जल्द शुरु होगा पाला बदल का दूसरा दौर</a></strong></span></p>
<p>चश्मे की नीलामी की तारीख तय की गई. गांधी जी का चश्मा हासिल करने के लिए तमाम लोग बोली लगाने के लिए आये. एक अमेरिकन कलेक्टर ने सबसे ज्यादा बोली लगाई और दो करोड़ 55 लाख रुपये देकर चश्मा खरीद लिया. गांधी जी के चश्मे की इतनी बड़ी कीमत मिलने की बात जब इस चश्मे को एक सदी तक संभालने वाले परिवार के बुज़ुर्ग सदस्य मैग्सफील्ड को हुई तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ. ऐसा लगा जैसे कि उन्हें हार्ट अटैक हो जाएगा. उन्होंने बताया कि उनकी मेज़ की दराज़ में यह चश्मा एक अरसे से पड़ा हुआ था.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>&#8216;संघ की वेशभूषा और वाद्ययंत्र भारतीय नहीं है&#8217;</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/sanghs-costumes-and-instruments-are-not-indian/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 Nov 2019 07:07:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA['संघ की वेशभूषा और वाद्ययंत्र भारतीय नहीं है']]></category>
		<category><![CDATA[गांधी जी]]></category>
		<category><![CDATA[छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री अजीत जोगी]]></category>
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		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री]]></category>
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		<category><![CDATA[राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ]]></category>
		<category><![CDATA[हिंदी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[हिंदी समाचार जुबिली पोस्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यूज डेस्क छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरएसएस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि संघ की भेषभूषा और वाद्ययंत्र भारतीय नहीं है। सीएम बघेल ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लोग जिस हिटलर और मुसोलिनी को आदर्श मानते हैं, जिससे प्रेरणा लेकर यह काली टोपी और खाकी पैंट पहनते हैं और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000080;"><strong>न्यूज डेस्क</strong></span></p>
<p>छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरएसएस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि संघ की भेषभूषा और वाद्ययंत्र भारतीय नहीं है।<br />
सीएम बघेल ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लोग जिस हिटलर और मुसोलिनी को आदर्श मानते हैं, जिससे प्रेरणा लेकर यह काली टोपी और खाकी पैंट पहनते हैं और ड्रम बजाते हैं। यह न भारत की वेशभूषा है और न ही यहां का वाद्ययंत्र है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-137139" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/bhoopesh-baghel.jpeg" alt="" width="749" height="506" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/bhoopesh-baghel.jpeg 749w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/bhoopesh-baghel-300x203.jpeg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/bhoopesh-baghel-110x75.jpeg 110w" sizes="auto, (max-width: 749px) 100vw, 749px" /></p>
<p>मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 14 नवंबर को प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की जयंती के मौके पर रायपुर के राजीव भवन में नेहरू जयंती व्याख्यान देते हुए यह बातें कही।</p>
<p>बघेल ने कहा कि जिस मुसोलिनी से मिलने के लिए दुनिया भर के नेता तरसते थे, जो कभी किसी के सम्मान में खड़े नहीं होते थे, वहीं मुसोलिनी नेहरू जी से मिलना चाहते थे, लेकिन नेहरू जी नहीं मिले।</p>
<p>बीजेपी पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जो लोग नेहरू जी का कद कम करना चाहते हैं, दरअसल वह लोकतंत्र को कमजोर करना चाहते हैं। वह नेहरू जी का कद इसलिए कम करना चाहते हैं क्योंकि उन्होंने जो लकीर खींची थी उस लकीर तक</p>
<p>पहुंचना उनके लिए दूर की बात है। इसलिए वह कद कम करने की कोशिश करते हैं।</p>
<p>बघेल ने कहा कि हमारे नेता हमेशा अपने विचारों में दृढ़़ रहे। उन्होंने अंग्रेजों के शासनकाल में जेल जाना पसंद किया। गांधी जी कहते थे कि आपके कानून में इससे कड़ी सजा हो तो दीजिए क्योंकि मैंने अपराध किया है। यह गांधी जी और नेहरू जी के विचार हैं और, वहीं विवादित ढांचा ढहाने के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी हैं जिन्होंने देश भर में रथ को लेकर चले थे, उन्होंने कहा कि मैंने नहीं गिराया है। सच कहने का साहस इनमें नहीं है।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/where-were-the-human-rights-lawyers-when-my-rights-were-taken-away/">‘मानवाधिकार के वकील उस समय कहां थे जब मेरे अधिकार छीने गए?</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/children-plead-with-pm-modi-clear-us/">पीएम मोदी से बच्चों की गुहार, हमें साफ…</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/5-acre-land-must-be-allotted-in-acquired-67-acre-area/">5 एकड़ जमीन न लेने के पक्ष में मदनी, लेंगे कानूनी राय</a></strong></span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जाओ, दौड़ो, तोड़ डालो जिन्ना की तस्वीर</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/go-run-break-jinnahs-picture/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Apr 2019 22:30:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[ओपिनियन]]></category>
		<category><![CDATA[गांधी जी]]></category>
		<category><![CDATA[जिन्ना]]></category>
		<category><![CDATA[विनायक दामोदर]]></category>
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					<description><![CDATA[शबाहत हुसैन &#8216;विजेता&#8217; गांधी जी के क़त्ल का इल्ज़ाम नाथूराम गोडसे पर था लेकिन क़त्ल की साज़िश रचने में जो 8 नाम सामने आये थे उनमें एक नाम विनायक दामोदर सावरकर का भी था, जी हाँ, वही जिन्हें वीर सावरकर कहा जाता है। उन पर मुकदमा चला लेकिन अदालत से बरी हो गये। लन्दन में हुए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="font-weight: 400"><span style="color: #0000ff"><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-95269 size-medium" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/04/Danke-Chote-Par-300x271.jpg" alt="" width="300" height="271" />शबाहत हुसैन &#8216;विजेता&#8217;</strong></span></h4>
<p style="font-weight: 400">गांधी जी के क़त्ल का इल्ज़ाम नाथूराम गोडसे पर था लेकिन क़त्ल की साज़िश रचने में जो 8 नाम सामने आये थे उनमें एक नाम विनायक दामोदर सावरकर का भी था, जी हाँ, वही जिन्हें वीर सावरकर कहा जाता है। उन पर मुकदमा चला लेकिन अदालत से बरी हो गये।</p>
<figure id="attachment_87885" aria-describedby="caption-attachment-87885" style="width: 236px" class="wp-caption alignright"><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-87885 size-medium" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/Shabahat-Husain-Vijeta-236x300.jpg" alt="" width="236" height="300" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/Shabahat-Husain-Vijeta-236x300.jpg 236w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/Shabahat-Husain-Vijeta.jpg 252w" sizes="auto, (max-width: 236px) 100vw, 236px" /><figcaption id="caption-attachment-87885" class="wp-caption-text"><strong>          शबाहत हुसैन &#8216;विजेता&#8217;</strong></figcaption></figure>
<p style="font-weight: 400">लन्दन में हुए अंग्रेज़ अफसर सर विलियम कर्जन वाइली के क़त्ल में भी सावरकर का नाम आया था।  यह क़त्ल मदनलाल ढींगरा ने किया था और इसमें उन्हें फांसी हुई थी, सावरकर अदालत से बरी हो गये थे। हालांकि बाद में सावरकर ने अपनी जीवनी में यह मान लिया था कि ढींगरा को उन्होंने खुद ट्रेनिंग दी थी।</p>
<p style="font-weight: 400">सावरकर को अंग्रेजों ने काला पानी की सज़ा दी थी और उन्हें कोल्हू में बैल की जगह लगाया गया था। इस सज़ा से बचने के लिये सावरकर ने अंग्रेज़ अफसरों से 1911 और 13 में माफी माँगी थी।</p>
<p style="font-weight: 400">सावरकर ने गाय को कभी ईश्वरीय नहीं माना। उन्होंने कहा था कि जो गाय अपने ही पेशाब में लेटती हो और अपनी पूंछ से अपना पेशाब और गोबर अपने पूरे शरीर पर फैला लेती हो वह ईश्वरीय नहीं हो सकती। वह सावरकर ही थे जिन्होंने हिन्दू महासभा के 19 वें अधिवेशन में 30 दिसम्बर 1937 को टू नेशन थ्योरी दी थी।</p>
<p style="font-weight: 400">जिन पर बहुत से लोगों की आस्था है। जिन्हें बहुत से लोग वीर मानते हैं उनका निन्दा पुराण लिखने का न मेरा कोई मकसद है और न ही मैं उनकी चर्चा करके कुछ हासिल करना चाहता हूँ लेकिन फिर भी मौजूदा माहौल में यह ज़रूरी लगा कि जब नफ़रत की आंधी चलाने की होड़ लगी है।  जब जानवरों के नाम पर इंसान काटे जाने लगे हैं. जब मज़हब के नाम पर घर जलाए जाने लगे हैं. जब मज़हब के नाम पर इलेक्शन होने लगे हैं। जब मज़हब के नाम पर हुकूमतें बनाई और गिराई जाने लगी हैं।  तब कुछ ऐसे चमकते चेहरों पर लगी कालिख भी दिखा दी जाये जिन्होंने हमारी मोहब्बत की जड़ों में मट्ठा डालने का काम किया था।</p>
<p style="font-weight: 400"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-95271" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/04/veer.jpg" alt="" width="785" height="599" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/04/veer.jpg 785w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/04/veer-300x229.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/04/veer-768x586.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 785px) 100vw, 785px" /></p>
<p style="font-weight: 400">जब गांधी का क़त्ल हुआ मैं पैदा नहीं हुआ था।  जब लन्दन में अंग्रेज़ अफसर विलियम मारा जा रहा था तब भी मैं पैदा नहीं हुआ था। जब टू नेशन थ्योरी दी जा रही थी तब भी मैं पैदा नहीं हुआ था।  कालापानी की सज़ा से बचने के लिये जब एक कैदी अंग्रेजों से माफ़ी मांग रहा था तब भी मैं पैदा नहीं हुआ था और जब गाय के बारे में अच्छी नहीं लगने वाली बातें कही जा रही थीं तब भी मैं पैदा नहीं हुआ था, लेकिन आज यह सब बातें लिख पा रहा हूँ क्योंकि यह सब इतिहास का हिस्सा है ।  कोई यह सब लिख गया है। इसी तरह से आज जो लोग नफ़रत फैला रहे हैं उनका इतिहास भी कोई न कोई लिख ज़रूर रहा होगा और आने वाले वक्त में आज उनके चेहरे पर जो कालिख लग रही है उसे आने वाली पीढ़ियाँ देखेंगी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-95272" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/04/gandhi.jpg" alt="" width="1170" height="901" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/04/gandhi.jpg 400w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/04/gandhi-300x231.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 1170px) 100vw, 1170px" /></p>
<p style="font-weight: 400">गांधी का क़ातिल अब महात्मा कहा जाने लगा है।  उसके मानने वाले गांधी की तस्वीरों पर गोलियां चला रहे हैं।  तस्वीरों पर गोलियां चलाकर वह गांधी के अहिंसा के सिद्धांत का क़त्ल करना चाहते हैं।  जो इस क़त्ल से बरी हो गया था और जो अपनी सज़ा से बचने के लिए माफी मांग रहा था वह वीर हो गया है।</p>
<p style="font-weight: 400">किसी को कोई एतराज़ नहीं कि कौन किसे पूजे, उस पर ऊँगली उठाये लेकिन जिस मुल्क की सीमाएं ईरान को छूती थीं उसे छोटा और छोटा करते जाने वालों की इज्जत कम से कम हम तो नहीं कर सकते। अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर पर सवाल उठाने वाले सोचें कि अगर सावरकर ने टू नेशन थ्योरी न दी होती तो पाकिस्तान कभी बन ही नहीं पाता।</p>
<p style="font-weight: 400">जिन्ना भारत के इतिहास का हिस्सा हैं।  उनकी तस्वीरें फाड़कर हम इस बात को नहीं भुला सकते कि पाकिस्तान हमारा ही टूटा हुआ हिस्सा है।जिन्ना की तस्वीर लगातार हमें यह अहसास कराती है कि भारत का एक इंच टुकड़ा भी अब अलग नहीं होना चाहिए।  जिस जिन्ना को हमने इज्ज़त से विदा किया उसकी तस्वीर फाड़कर या जलाकर क्या हम इतिहास को भुला सकते हैं। क्या हम यह बात भूल सकते हैं कि भारत टूटा था तो सीमा पर काफी खून बहा था। इधर से उधर जा रहे लोगों को बेरहमी से क़त्ल किया जा रहा था। देश टूटते वक्त जो खून बहा था उसके लिए जिन्ना और सावरकर बराबर के ज़िम्मेदार थे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p style="font-weight: 400">पाकिस्तान का भगत सिंह चौक और महात्मा गांधी की मूर्तियाँ पूरी दुनिया को यह अहसास कराती हैं यह की यह हमारा इतिहास है और इतिहास कभी बदलता नहीं है।</p>
<p style="font-weight: 400">जल्दी हुकूमत हासिल करने के लालच में टू नेशन थ्योरी की वकालत अगर नहीं की गई होती तो हमारा भारत आज कहीं ज्यादा मज़बूत होता. 1947 में हुए नुकसान का खामियाजा आज तक भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p style="font-weight: 400">सुदर्शन सलिलेश के शेर “कर रहे पंचायतें क्यों जल चुके खलिहान की, अब न जल जाए फसल तुम इसकी तैयारी रखो” की तर्ज़ पर हम अब तक उन तस्वीरों पर अपनी ऊर्जा खर्च कर रहे हैं जिसका आज से नहीं इतिहास से मतलब है लेकिन नहीं ढूंढ पा रहे वह तरीका जो कश्मीर से बेदखल किये गए पंडितों को वापस उनके घरों तक पहुंचा सकें।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-95274" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/04/zinna.jpg" alt="" width="1009" height="756" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/04/zinna.jpg 623w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/04/zinna-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 1009px) 100vw, 1009px" /></p>
<p style="font-weight: 400">हालात उस देहरी तक पहुँच चुके हैं जिसमें आतंकवाद का मज़हब तय किया जाने लगा है. हुकूमत चलाने वाला राजा खुद मज़हब को इंसान से ऊपर मानने लगा है।  जिसे पूरा सूबा चलाने की ज़िम्मेदारी मिली है वह अली और बजरंगबली की जंग में फंस गया है. वह ठोक दो और काट दो वाली ज़बान बोलने लगा है।</p>
<p style="font-weight: 400">आम आदमी मुसीबतों की मार सह रहा है. बाज़ार उसके सर पर चढ़कर बोल रहा है. रोजी-रोटी मुश्किल मसला बनता जा रहा है. बेटियां सेफ नहीं हैं, बेटों के पास रोज़गार नहीं है. माँ-बाप दवा के मोहताज हो रहे हैं।  बीमारियाँ बहुत तेज़ी से पाँव पसार रही हैं. सरकारों के सरोकार बहुत शर्मनाक हैं. जाओ, दौड़ो, तोड़ डालो जिन्ना की तस्वीर, उसे पाँव से कुचल डालो, जो ऐसा करने से रोके उसे भी छोड़ना नहीं,  क्योंकि सच यही है कि जिन्ना और सावरकर मरे ही नहीं वह तो हम सब के भीतर घुस गए हैं।</p>
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