ब्रह्माण्ड
-
इंद्रधनुष
‘मैं‘ से ‘हम‘ की अंतर्यात्रा
ह्रदय नारायण दीक्षित ‘मैं‘ से ‘हम‘ की अंतर्यात्रा आनंददायी है। ‘मैं‘ होना एकाकी है। एकाकी में उदासी है और विषाद…
Read More »
ह्रदय नारायण दीक्षित ‘मैं‘ से ‘हम‘ की अंतर्यात्रा आनंददायी है। ‘मैं‘ होना एकाकी है। एकाकी में उदासी है और विषाद…
Read More »
ह्रदय नारायण दीक्षित ब्रह्माण्ड रहस्यपूर्ण है। हम सब इसके अविभाज्य अंग हैं। यह विराट है। हम सबको आश्चर्यचकित करता है।…
Read More »
डॉ श्रीश पाठक हमारी देह में भीतर-बाहर अरबों जीव पल रहे। वे हमारे अस्तित्व से अनभिज्ञ होंगे या सम्भवतः उन्हें…
Read More »