चिदंबरम को मिली जमानत, विदेश यात्रा-इंटरव्‍यू पर रोक

न्‍यूज डेस्‍क

आईएनएक्स मीडिया केस में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए जमानत दे दी है। चिदंबरम ने उनकी जमानत याचिका खारिज करने के दिल्ली हाईकोर्ट के 15 नवंबर के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने  चिदंबरम को 106 दिन की कस्‍टडी के बाद जमानत दी है। चिदंबरम 17 अक्‍टूबर से ईडी की कस्‍टडी में थे। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते समय कहा कि इस दौरान वे किसी भी गवाह से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे। इसके अलावा वे बिना इजाजत विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे। चिदंबरम केस से संबंधित कोई सार्वजनिक बयान या साक्षात्कार नहीं देंगे।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बीते हफ्ते गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय को निर्देश दिया कि आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में पेश किये जाएं।

अदालत ने इसके साथ ही चिदंबरम की जमानत के लिए याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली थी। जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस ऋषिकेश राय की पीठ ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय को यह निर्देश दिया था। पीठ ने इस अपील पर सुनवाई पूरी करते हुए कहा कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा.।

इससे पहले, प्रवर्तन निदेशालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ के समक्ष दावा किया कि पूर्व वित्त मंत्री हिरासत में होने के बावजूद महत्वपूर्ण गवाहों पर अपना ‘प्रभाव’ रखते हैं। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान निदेशालय ने 12 बैंक खातों की पहचान की है, जिनमें इस अपराध से मिली रकम जमा की गई और एजेंसी के पास ऐसी 12 संपत्तियों का भी ब्योरा है, जिन्हें कई दूसरे देशों में खरीदा गया है।

प्रवर्तन निदेशालय दावा किया था कि पूर्व केंद्रीय मंत्री होने की वजह से चिदंबरम बहुत ही चतुर और प्रभावशाली व्यक्ति हैं। इस समय उनकी उपस्थिति ही गवाहों को भयभीत करने के लिए काफी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता 74 वर्षीय पी चिदंबरम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शीर्ष अदालत में दलील दी थी कि उन्हें ‘अनुचित तरीके’ से पिछले 99 दिन से सिर्फ इसलिए जेल में रखा गया है, क्योंकि वह आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्य आरोपी कार्ति चिदंबरम के पिता हैं और इस मामले से उन्हें जोड़ने के लिये उनके खिलाफ ‘एक भी साक्ष्य’ नहीं है।

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