तो देश के बंटवारे में सावरकर का हाथ था?

न्यूज डेस्क

पिछले कुछ माह से वीर सावरकर को लेकर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं। वीर सावरकर को लेकर कांग्रेस की बयानबाजी बीजेपी को रास नहीं आ रही। इसलिए बीजेपी आक्रामक रूख बनाए हुए हैं। इस बीच सावरकर को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने बड़ा बयान दिया है।

कांग्रेस सांसद थरूर ने 24 जनवरी को देश के बंटवारे का विचार देने के लिए सावरकर को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम लीग के प्रस्ताव से काफी पहले ही उन्होंने इस तरह की बात कही थी।

थरूर ने कहा कि मुस्लिम लीग के पाकिस्तान नाम से अलग देश बनाने के प्रस्ताव पास करने के तीन साल पहले ही दक्षिणपंथी नेता सावरकर ने दो राष्ट्रों के सिद्धांत की बात कही थी। इस तरह की बात करने वाले वे पहले नेता थे। उन्होंने यह भी कहा कि बंटवारे के समय सबसे बड़ा सवाल था कि क्या धर्म राष्ट्रवाद का निर्णायक होना चाहिए।

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थरूर ने यह बातें जयपुर में एक कार्यक्रम में कही। थरूर ने कहा कि 1940 में कांग्रेस के लाहौर सत्र में मुस्लिम लीग के इस मांग से बहुत पहले सावरकर इस सिद्धांत की वकालत कर चुके थे, लेकिन महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू और अन्य लोगों के नेतृत्व में बड़ी संख्या में भारतीय पक्ष ने इसे अस्वीकार कर दिया था।

उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने कहा था कि धर्म आपकी पहचान नहीं हो सकता है। यह आपके राष्ट्रीयता का निर्णय नहीं करता है। हमने सभी की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी है और सभी के लिए एक राष्ट्र बनाया है।”

कांग्रेस नेता सावरकर ने कहा कि हिंदू के लिए भारत उनकी पितृभूमि और पुण्यभूमि है। इसलिए हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन के लिए ये दोनों भूमि है, लेकन मुस्लिम और ईसाई के लिए नहीं।

उन्होंने यह भी बताया कि हिंदुत्व आंदोलन ने स्पष्ट रूप से संविधान को खारिज कर दिया था। थरूर के इस बयान से एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है।

गौरतलब है कि दिल्ली में एक रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सावरकर को राष्ट्रवादी मानने से इंकार करते हुए कहा था कि “मेरा नाम राहुल गांधी है, राहुल सावरकर नहीं है।” इसके ठीक बाद शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा था कि सावरकर एक महान नेता थे। उनका अपमान पार्टी सहन नहीं कर सकता है।

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