जुबिली स्पेशल डेस्क
काराकास। शांत दिखने वाले अटलांटिक महासागर के नीचे इस वक्त दो महाशक्तियों के बीच खामोश जंग चल रही है। अमेरिका जिस वेनेजुएला से जुड़े तेल टैंकर ‘बेला-1’ को जब्त करने के लिए पीछे पड़ा है, उसकी सुरक्षा के लिए रूस ने अपनी सबसे खतरनाक परमाणु पनडुब्बी मैदान में उतार दी है।
डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी कोस्ट गार्ड और नेवी के सामने अब रूस का भेजा गया ‘समंदर का यमराज’—परमाणु पनडुब्बी BS-329 बेलगोरोड—खड़ी है। दुनिया की सबसे लंबी और सबसे रहस्यमयी इस पनडुब्बी की मौजूदगी ने अमेरिकी नौसेना की चिंता बढ़ा दी है।
100 मेगाटन तबाही की ताकत
करीब 30 साल में बनकर तैयार हुई बेलगोरोड पनडुब्बी में 100 मेगाटन तक का न्यूक्लियर पेलोड ले जाने की क्षमता है। यह दुनिया की इकलौती पनडुब्बी मानी जाती है जो न्यूक्लियर-सक्षम सुपर टॉरपीडो ‘पोसाइडन’ को ले जा सकती है।
पोसाइडन कोई साधारण हथियार नहीं, बल्कि एक परमाणु अंडरवॉटर ड्रोन है। इसे ‘डूम्सडे वेपन’ कहा जाता है क्योंकि समुद्र के भीतर विस्फोट होने पर यह 500 मीटर ऊंची रेडियोधर्मी सुनामी पैदा कर सकता है, जो तटीय शहरों को पल भर में तबाह कर दे और इलाके को दशकों तक रहने लायक न छोड़े।
अमेरिकी रडार भी बेबस
बेलगोरोड की सबसे बड़ी ताकत इसकी गहराई और रफ्तार है। यह समुद्र की इतनी गहराई में ऑपरेट कर सकती है जहां अमेरिकी रडार और डिफेंस सिस्टम भी इसे ट्रैक नहीं कर पाते।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पनडुब्बी समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट और कम्युनिकेशन केबल्स को काटने या उनमें जासूसी उपकरण लगाने में भी सक्षम है। यानी जरूरत पड़ी तो अमेरिका और यूरोप को एक झटके में ‘ऑफलाइन’ किया जा सकता है।
दो परमाणु रिएक्टर, असीमित ताकत
करीब 600 फीट लंबी बेलगोरोड पनडुब्बी रूस की पुरानी टाइफून क्लास से भी बड़ी है। इसमें लगे दो परमाणु रिएक्टर इसे असीमित ऊर्जा देते हैं, जिससे यह महीनों तक समुद्र के भीतर छिपकर ऑपरेशन कर सकती है।
अमेरिका को सीधा संदेश
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही बेलगोरोड को ‘अजेय’ घोषित कर चुके हैं। अटलांटिक महासागर में इस पनडुब्बी की तैनाती को अमेरिका के लिए सीधा संदेश माना जा रहा है—कि यह टैंकर अब रूस के संरक्षण में है।
7 जनवरी 2026 की रिपोर्ट्स के मुताबिक, टैंकर फिलहाल आइसलैंड और स्कॉटलैंड के बीच मौजूद है, जबकि अमेरिकी P-8 पोसीडॉन निगरानी विमान आसमान से रूसी पनडुब्बी को खोजने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।
ट्रंप की रणनीति पर ब्रेक
अमेरिकी सेना टैंकर पर हेलीकॉप्टर रेड की तैयारी कर रही थी, लेकिन बेलगोरोड की मौजूदगी ने पूरे ऑपरेशन को हाई-रिस्क बना दिया है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एक भी चूक हुई, तो यह टकराव सीधे अमेरिका-रूस युद्ध की ओर बढ़ सकता है।
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