Sensex-Nifty Today: ट्रंप की धमकी का बाज़ार पर ‘मिक्स्ड’ असर; प्री-ओपन में उछाल के बाद सेंसेक्स फिसला, जानें एक्सपर्ट्स की राय

मुंबई। तीन दिनों के लंबे वीकेंड के बाद सोमवार को भारतीय शेयर बाज़ार की शुरुआत अनिश्चितता के साथ हुई। एक तरफ मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को ‘विनाशकारी’ धमकी थी, तो दूसरी तरफ भारतीय बाज़ार की अपनी मज़बूती।
शुरुआती कारोबार में बाज़ार ने ट्रंप की धमकियों को दरकिनार करते हुए बढ़त दिखाई, लेकिन जल्द ही वैश्विक दबाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के सेंटिमेंट पर असर डाला।
बाज़ार का हाल: बढ़त के साथ खुला, फिर मुनाफावसूली हावी
सोमवार सुबह 9:05 बजे प्री-ओपनिंग सेशन में सेंसेक्स 185 अंकों की बढ़त के साथ खुला, जिसने संकेत दिया कि भारतीय निवेशक फिलहाल युद्ध की धमकियों से डरे नहीं हैं। निफ्टी 50 भी 0.30% की तेज़ी के साथ 22,780 के स्तर पर पहुंच गया।
हालांकि, यह बढ़त टिक नहीं सकी:
- सुबह 9:40 बजे: सेंसेक्स 0.46% (326 अंक) गिरकर 72,993 पर आ गया।
- निफ्टी 50: 0.46% (106 अंक) की गिरावट के साथ 22,607 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।
गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) ने पहले ही करीब 82 अंकों की गिरावट के साथ कमज़ोर शुरुआत के संकेत दे दिए थे, जो अंततः बाज़ार खुलने के बाद सही साबित हुए।
वैश्विक संकेत और कच्चे तेल का दबाव
मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर मचे घमासान ने कच्चे तेल की कीमतों को हवा दी है। ट्रंप द्वारा ईरान को मंगलवार तक का अल्टीमेटम देने के बाद वैश्विक बाज़ारों में सतर्कता बरती जा रही है।
मार्केट एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?
विनोद नायर (जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स): “RBI और महंगाई पर टिकी नज़र”
एक्सपर्ट विनोद नायर के मुताबिक, इस समय बाज़ार के लिए RBI की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) और महंगाई पर उनका रुख सबसे महत्वपूर्ण है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और मैन्युफैक्चरिंग में सुस्ती बड़ी चुनौतियां हैं। बाज़ार पश्चिम एशिया की खबरों के प्रति काफी संवेदनशील रहेगा।
सिद्धार्थ खेमका (मोतीलाल ओसवाल): “उतार-चढ़ाव भरा रहेगा हफ्ता”
सिद्धार्थ खेमका का मानना है कि इस पूरे हफ्ते बाज़ार में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों की धारणा पूरी तरह से युद्ध और शांति की खबरों पर टिकी है। FII (विदेशी संस्थागत निवेशक) का रुख और कच्चे तेल की दिशा ही बाज़ार का अगला कदम तय करेगी।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
- कच्चे तेल की कीमतें: यदि तनाव बढ़ता है, तो तेल की कीमतें बढ़ने से भारतीय रुपया और बाज़ार दोनों पर दबाव बढ़ेगा।
- युद्धविराम की खबरें: 45 दिवसीय संभावित युद्धविराम की चर्चा अगर हकीकत में बदलती है, तो बाज़ार में बड़ी रिकवरी देखी जा सकती है।
- अमेरिकी डेटा: अमेरिका के महंगाई आंकड़ों का असर डॉलर इंडेक्स पर पड़ेगा, जिससे भारतीय बाज़ार प्रभावित होगा।



