Thursday - 29 January 2026 - 11:31 AM

क्रिटिकल मिनरल्स मीटिंग में हिस्सा लेने अमेरिका जा सकते हैं एस. जयशंकर, भारत-US रिश्तों में आ सकती है नरमी

जुबिली न्यूज डेस्क 

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर अगले हफ्ते अमेरिका दौरे पर जा सकते हैं। वह वॉशिंगटन डीसी में होने वाली क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। यह हाई लेवल बैठक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की मेजबानी में आयोजित की जा रही है और यह इस फॉर्मेट की पहली बड़ी बैठक मानी जा रही है।

अहम खनिजों की सप्लाई चेन पर फोकस

क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल बैठक का मुख्य उद्देश्य दुनियाभर के देशों को एक साझा मंच पर लाकर अहम खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित और मजबूत बनाना है।
इन खनिजों में:

  • लिथियम

  • कोबाल्ट

  • निकल

जैसे मटीरियल शामिल हैं, जिनकी जरूरत इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस सिस्टम्स में बड़े पैमाने पर होती है।

जयशंकर-रूबियो के बीच द्विपक्षीय वार्ता संभव

बैठक से इतर विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत होने की भी संभावना जताई जा रही है। कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से काफी अहम हो सकता है।

ट्रेड डील को लेकर भारत-US में तनाव

यह हाई लेवल बैठक ऐसे समय हो रही है, जब भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में अगर जयशंकर का अमेरिका दौरा होता है, तो इसे दोनों देशों के बीच रिश्तों में आई तल्खी को कम करने की पहल के तौर पर देखा जा सकता है।

मोदी-ट्रंप मुलाकात पर भी हो सकती है चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित मुलाकात को लेकर भी बातचीत हो सकती है। अगर जयशंकर का दौरा तय होता है, तो यह संकेत माना जाएगा कि भारत-अमेरिका संबंधों में जमी बर्फ पिघल रही है

EU के साथ FTA के बाद बढ़ी रणनीतिक अहमियत

जयशंकर का संभावित अमेरिका दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब भारत ने हाल ही में यूरोपियन यूनियन के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किया है। इस समझौते को अमेरिकी दबाव के बीच एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

FTA से भारतीय उद्योगों को मिलेगा फायदा

EU के साथ हुए FTA से:

  • भारतीय कंपनियों को प्रमुख बाजारों में प्राथमिक पहुंच

  • मेड इन इंडिया मेडिकल उपकरणों पर टैरिफ में कमी

  • रसायन, उर्वरक, दवाएं, कॉस्मेटिक, साबुन और डिटर्जेंट सेक्टर में तेजी

  • उत्पादन क्षमता बढ़ाने और MSME क्लस्टर्स के विकास में मदद

जैसे कई फायदे मिलने की उम्मीद है।

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