Russia Ukraine Meeting ख़त्म, रूस से यूक्रेन ने की ये बड़ी मांग

जुबिली स्पेशल डेस्क

नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है और पांच दिन हो गए है। अब तक यूक्रेन ने रूस के आगे घुटने नहीं टेके हैं। ऐसे में रूस लगातार यूक्रेन पर और तेज हमला करने करने की तैयारी में है।

यूक्रेन से मिली जानकारी के अनुसार यूक्रेन के सैनिक रूसी सैनिकों का जबर्दस्त मुकाबला कर रहे हैं। उधर इससे बोखलाए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने सैनिकों को न्यूक्लियर हथियार को अलर्ट पर रहने का आदेश दे दिया है। वहीं दोनों देशों के बीच जंग कब थमेगी ये किसी को पता नहीं है और दोनों देशों के बीच बेलारूस में खत्म हो गई है।

रूस-यूक्रेन के बीच ऐतिहासिक बातचीत खत्मकुल साढ़े तीन घंटा चली। बता दें कि यह वार्ता दोपहर 3.30 मिनट पर शुरू हुई थी जो कि करीब साढ़े तीन घंटा तक चली। वार्ता से पहले यूक्रेन ने रूस से अपने सभी सैनिकों को वापस बुलाने की मांग की थी। बातचीत में यूक्रेन ने रूस क्रीमिया और डोनबास समेत पूरे देश से अपनी सेना वापस लेने की मांग की है।

इस बैठक से पहले भी यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय से कुछ ट्वीट किये गए है। इसमें कहा था कि रूस के साथ बातचीत का उनका मुख्य लक्ष्य तत्काल युद्धविराम और रूसी सैनिकों की वापसी है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने ट्विटर हैंडल से भी कुछ ट्वीट  कर रूसी सैनिकों से अपील करते हुए  लिखा है कि अपनी जान बचाएं और जाएं। आगे लिखा है कि जब मैं राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहा था तो कहा था कि हम सब राष्ट्रपति होंगे क्योंकि देश के प्रति हम सब की जिम्मेदारी है। अब ऐसा ही हुआ है। सब योद्धा की तरह हैं।

वही चिंता की बात यह है कि अगर व्लादिमीर पुतिन ने परमाणु विकल्प को चुना , तो क्या उनके करीबियों में से कोई उन्हें मना करने की कोशिश करेंगे? या उन्हें रोकने की कोशिश करेंगे? यह बहुत बड़ा सवाल है।

नोबल विजेता दिमित्री मुरातोव कहते हैं कि रूस के राजनेता कभी भी आम जनता के साथ नहीं होते। वे हमेशा सत्ता पर काबिज प्रमुख की तरफ होते हैं और पुतिन की ताकत से दुनिया वाकिफ है।

वहीं इस मामले में रक्षा विशेषज्ञ पावेल फेलजेनह्यूर कहते हैं कि कोई भी पुतिन के सामने खड़ा नहीं होगा। हम एक खतरनाक जगह पर रहते हैं। यह युद्ध सिर्फ पुतिन का युद्ध है। अगर पुतिन अपना लक्ष्य हासिल करते हैं तो यूक्रेन की संप्रभुता खतरे में पड़ जाएगी, लेकिन अगर पुतिन की मंशा कामयाब नहीं होती तो और खतरनाक कदम उठाने के लिए उन्हें मजबूर होना पड़ेगा।

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