90 के नीचे फिसला रुपया, रिकॉर्ड गिरावट पर वित्त मंत्री सीतारमण ने क्या कहा

जुबिली न्यूज डेस्क

भारतीय रुपया इन दिनों ऐतिहासिक कमजोरी से गुजर रहा है। बुधवार को रुपया पहली बार 90 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे चला गया और 90.46 के ऑल-टाइम लो पर बंद हुआ। डॉलर के मुकाबले रुपये की इस तेज गिरावट ने बाजार से लेकर आम लोगों तक चिंता बढ़ा दी है।

रुपया क्यों कमजोर हो रहा है?

विशेषज्ञों के अनुसार रुपये में गिरावट की कई बड़ी वजहें हैं—

  • डॉलर की बढ़ती मांग

  • विदेशी निवेशकों (FPI) की भारी बिकवाली

  • भारत–यूएस ट्रेड डील की बातचीत का अटकना

  • ग्लोबल भू-राजनीतिक अनिश्चितता

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पूंजी के बाहर निकलने और यूएस डॉलर की मजबूती ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया।

वित्त मंत्री का बयान: “रुपये को अपना रास्ता खुद ढूंढना होगा”

हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट (HTLS) में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रुपये की गिरावट पर पहली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा—“रुपये को अपना रास्ता खुद ढूंढना होगा। करेंसी पर बहस आज की आर्थिक हकीकत को देखकर होनी चाहिए, पिछली स्थितियों से तुलना सही नहीं है।”वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है और करेंसी की वैल्यू को केवल गिरावट से नहीं मापा जा सकता।

“इकॉनमी के फंडामेंटल्स मजबूत हैं”

सीतारमण ने आगे कहा—

  • GDP ग्रोथ मजबूत है

  • रिटेल महंगाई रिकॉर्ड निचले स्तर पर है

  • अर्थव्यवस्था का फंडामेंटल मजबूत है

उन्होंने कहा—“करेंसी वैल्यू गिरने पर कहा जाता है कि एक्सपोर्टर्स को फायदा मिलता है। यह कुछ हद तक सही है, लेकिन इसके साथ-साथ इकोनॉमी की मजबूती का भी आकलन जरूरी है।”

रिकॉर्ड GDP, रिकॉर्ड कम महंगाई… फिर भी रुपया कमजोर क्यों?

भारत की GDP ग्रोथ दूसरी तिमाही में 8.2% रही—जो छह तिमाहियों का सबसे ऊंचा स्तर है।
अक्टूबर में खुदरा महंगाई 0.25% पर आ गई—यह भी रिकॉर्ड निचला स्तर है।

इसके बावजूद डॉलर के मुकाबले रुपये का गिरना विशेषज्ञों को चौंका रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है—

  • ट्रेड डील का अटकना

  • विदेशी निवेश का बाहर जाना

  • ग्लोबल मार्केट में डॉलर की लगातार मजबूती

FY26 में कितनी होगी भारत की ग्रोथ?

वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत की आर्थिक वृद्धि 7% या इससे अधिक रह सकती है।उन्होंने भरोसा जताया कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत और स्थिर बनी रहेगी।

ये भी पढ़ें-यूरोपीय यूनियन ने एलन मस्क की कंपनी X पर लगाया 12 करोड़ यूरो का जुर्माना, अमेरिका भड़का

रुपये की गिरावट पर सरकार का यह बयान संकेत देता है कि फिलहाल करेंसी को बाजार की ताकतों के हिसाब से खुद को स्थिर करने दिया जाएगा। अब नजर इस बात पर है कि आने वाले हफ्तों में डॉलर के मुकाबले रुपया किस स्तर पर टिकता है।

Related Articles

Back to top button