Monday - 26 January 2026 - 12:06 PM

गणतंत्र दिवस 2026 का सबसे भावपूर्ण पल: जानें क्या है ‘बीटिंग रिट्रीट’ और क्यों है यह जरूरी

जुबिली स्पेशल डेस्क 

हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की भव्य परेड खत्म होने के बाद लोगों को लगता है कि जश्न समाप्त हो गया। लेकिन असल में, भारत का गणतंत्र दिवस आधिकारिक रूप से 29 जनवरी को बीटिंग रिट्रीट समारोह के साथ समाप्त होता है।

अगर आपने कभी टीवी पर ढलते सूरज के बीच सेना के बैंड्स को कदमताल करते और राष्ट्रपति भवन को रंग-बिरंगी रोशनी से नहाते देखा है, तो समझ लीजिए वही बीटिंग रिट्रीट है। आइए, आसान शब्दों में समझते हैं कि यह समारोह क्या है और इसमें क्या होता है।

बीटिंग रिट्रीट क्या होता है?

बीटिंग रिट्रीट एक सैन्य परंपरा है जिसमें थल सेना (Army), जल सेना (Navy) और वायु सेना (Air Force) के बैंड हिस्सा लेते हैं। जवान अपनी खास यूनिफॉर्म में कदमताल करते हुए देशभक्ति की धुनें बजाते हैं, जिन्हें सुनकर हर हिंदुस्तानी का सीना गर्व से भर उठता है।

इस कार्यक्रम का सबसे भावुक पल होता है जब सूरज ढलने के समय पूरा सम्मान के साथ तिरंगा उतारा जाता है। इसके बाद राष्ट्रपति की अनुमति से सेनाएं अपने कैंप लौट जाती हैं। यही संकेत है कि गणतंत्र दिवस का औपचारिक उत्सव समाप्त हो गया।

बीटिंग रिट्रीट की शुरुआत

बीटिंग रिट्रीट की परंपरा सदियों पुरानी है। पुराने समय में युद्ध के दौरान सूर्यास्त के बाद लड़ाई रोक दी जाती थी। सैनिकों को वापस बुलाने के लिए ढोल और ड्रम बजाए जाते थे। यह संकेत होते ही सैनिक अपने कैंप लौट आते थे।

भारत ने इसे अपनी सेना में अपनाया और 1950 के दशक से यह गणतंत्र दिवस का समापन समारोह बन गया।

समारोह की हाईलाइट्स

कदमताल और धुनें : सेना के बैंड्स ‘सारे जहां से अच्छा’ और ‘कदम-कदम बढ़ाए जा’ जैसी राष्ट्रीय धुनें बजाते हैं। इन धुनों को सुनकर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है।

लाइट शो: जैसे ही अंधेरा होता है, राष्ट्रपति भवन और आस-पास की इमारतें हजारों लाइटों से जगमगा उठती हैं। यह नजारा देखने लायक और भव्य होता है।

इस समारोह के मुख्य अतिथि देश के राष्ट्रपति होते हैं। राष्ट्रपति अपनी खास बग्गी या काफिले के साथ समारोह में शामिल होते हैं। इसके अलावा, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहते हैं।

बीटिंग रिट्रीट सिर्फ गाना-बजाना नहीं है। यह हमारी सेना के अनुशासन, एकता और ताकत का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि भले ही गणतंत्र दिवस का जश्न खत्म हो गया हो, हमारी सरहदों पर तैनात जवान हमेशा चौकन्ने और तैयार रहते हैं।

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