दुर्गा भाभी की स्मृति : वत्सला की कविताएं

दुर्गा भाभी भारत के स्वतंत्रता संग्राम में क्रान्तिकारियों की प्रमुख सहयोगी थीं। 18 दिसम्बर 1928 को भगत सिंह ने इन्ही दुर्गा भाभी के साथ वेश बदल कर कलकत्ता-मेल से यात्रा की थी। दुर्गाभाभी क्रांतिकारी भगवती चरण बोहरा की धर्मपत्नी थीं। भारती की आजादी की लडाई में दुर्गा भाभी ने अपना अमूल्य योगदान दिया. दुर्गा भाभी के जन्मदिन 7 अक्तूबर को इस वीरांगना को कवियत्री वत्सला पाण्डेय ने अपनी कविताओं के जरिये श्रद्धांजलि अर्पित की है.
1.
त्याग और साहस ही जिनका था गहना
क्रांतिमूर्ति दुर्गा भाभी का क्या कहना
सन उन्नीस सौ सात ,सात अक्टूबर के दिन,
कौशाम्बी के निकट लाडली जन्मीं थीं।
वैभवशाली खानदान की सोनचिरैया,
बनकर आंगन में प्रतिदिन वो खेलीं थीं।
पिता और बाबा से परिजन कहते थे
बहुत विदुषी है प्यारी दुर्गा बहना।
त्याग और साहस ही जिनका था गहना
बाल वधू बन दुर्गा जब लाहौर आईं
नई भूमिका में थोड़ा सा सकुचाईं
पति रूप में उनको सच्चा साथ मिला
भगवती बाबू से मन का विश्वास खिला
दोनों ही एक दूजे के सम्पूरक थे
दोनों कहते गोरों की अब नहीं सहना
त्याग और साहस ही जिनका था गहना…
भगत सिंह,सुखदेव,राजगुरु की सहयोगी
आजादी की खातिर बन गयी इक जोगी
गाँव-गाँव जाकर क्रांति की अलख जगायी
क्रांतिकारियों की खातिर बंदूक मंगायी
गहने-जेवर,रुपया-पैसा सब थी देतीं
“तन मन धन है देश का मेरे था ये कहना
त्याग और साहस ही जिनका था गहना…
भगत सिंह ने जब गोरे अफसर को मारा
उन्हें बचाने हेतु दुर्गा ने स्वांग था धारा
पत्नी बनकर भगत सिंह को बचा लिया
बरतानी सरकार को बुद्धू बना दिया
रेल पकड़ लाहौर से कलकत्ता निकलीं
बोलीं -“गोरों हाथों को मलते रहना”
त्याग और साहस ही जिनका था गहना
बम टेस्टिंग में हुआ हादसा दुःख वाला
दुर्गा का सिंदूर काल ने खा डाला
नियति का लेखा मान आँसुओं को पोंछा
अब आगे क्या करना है ?फिर से सोंचा
आजादी का बीड़ा भी ले रखा था
और पढ़ाई को भी था जारी रखना
त्याग और साहस ही जिनका था गहना
सन उन्नीस सौ चालीस में लखनऊ आईं
विद्या की इक ज्योति यहां पर जलवाई
पहला मांटेसरी स्कूल था खुलवाया
लखनऊ मांटेसरी नाम था रखवाया
आजादी के बाद यही संकल्प लिया
जब तक जीवन है ,जन को शिक्षित करना
त्याग और साहस ही जिनका था गहना
क्रांतिमूर्ति दुर्गा भाभी का क्या कहना
2.
शक्ति स्वरूपा दुर्गा वोहरा नाम था उस चिंगारी का
उनका परिचय मान बढ़ाये भारत की हर नारी का
हिम जैसा था साहस उनमें
नदिया सी निर्मलता थी,
पृथ्वी जैसा धैर्य संजोए
वट जैसी शीतलता थी
फुर्तीला तेवर था उनमे, जैसे रूप कटारी का
उनका परिचय मान बढ़ाये भारत की हर नारी का
निडर ,बहादुर, शौर्य पुंज वो
त्यागमूर्ति बलिदानी थीं
पढ़ी लिखी शिक्षित स्त्री की
रोचक एक कहानी थीं
बम,पिस्टल से होश उड़ाया,बरतानी अधिकारी का
उनका परिचय मान बढ़ाये भारत की हर नारी का
क्रांतिकारियों की सहयोगी
स्वतंत्रता सेनानी थी।
अंग्रेजी सरकार की खातिर
काली रूप भवानी थी
कैसे चुक पायेगा सबसे, ऋण ऐसी उपकारी का
उनका परिचय मान बढ़ाये भारत की हर नारी का.



