राकेश टिकैत ने सरकार को चेताया, बोले-आगे बताएंगे दिल्ली का क्या इलाज करना है

जुबिली स्पेशल डेस्क

नई दिल्ली। बीते कुछ महीनों से कोरोना की दूसरी लहर के चलते किसानों का आंदोलन थोड़ा कमजोर पडऩे लगा है लेकिन एक बार फिर किसान आंदोलन को नई जान देने की तैयारी है।

दरअसल कोरोना अब थोड़ा कमजोर पडऩे लगा है। ऐसे में देश में किसान आंदोलन को और मजबूती देने के लिए एक बार फिर किसानों ने हुंकार भरी है।  किसान आंदोलन को सात महीने पूरे होने पर देश भर में शनिवार को संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा खेती बचाओ-लोकतंत्र बचाओ दिवस मनाया गया।

उधर दिल्ली में गाजीपुर बॉर्डर पर बवाल की खबरे भी सामने आई है। जानकारी के मुताबिक दिल्ली में उपराज्यपाल से मिलने जा रहे किसानों को कथित तौर पर पुलिस द्वारा पकड़े जाने की खबरों ने भी जोर पकड़ा था।

इसको लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि किसानों को उपराज्यपाल से मिलने नहीं दिया गया है। उन्होंने एक बार फिर सरकार को चेतावनी दी है और कहा है कि अगर हमारे लोगों को उपराज्यपाल से मिलने नहीं दिया गया तो हम दिल्ली कूच करेंगे। हम कैसे जाएंगे इस पर हम अभी बैठक कर रहे हैं।

हम उपराज्यपाल के पास जाएंगे। इतना ही नहीं राकेश टिकैत यही नहीं रूके उन्होंने आगे कहा कि आगे बताएंगे दिल्ली का क्या इलाज करना है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को पकड़ा गया है, उन्हें या तो तिहाड़ जेल भेजो या फिर राज्यपाल से इनकी मुलाकात कराओ। हम आगे बताएंगे कि दिल्ली का क्या इलाज करना है। उन्होंने कहा कि दिल्ली बगैर ट्रैक्टर के नहीं मानती है। लड़ाई कहां होगी, स्थान और समय क्या होगा यह तय कर फिर से बड़ी क्राांति होगी।

बता दें कि जैसे-जैसे कोरोना तेज हुआ है वैसे-वैसे किसान आंदोलन पर चर्चा कम हो गई थी। भले ही सरकार किसान आंदोलन पर चुप्पी साधे हुए है लेकिन किसान झुकने को तैयार नहीं है।

26 जनवरी को दिल्ली में किसानों के ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा की वजह से किसान आंदोलन कमजोर होता दिख था। जिस तरह से किसानों के आंदोलन को जन समर्थन मिल रहा है उसमें काफी गिरावट आई थी।

किसानों का आंदोलन अब भी जारी है। केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। आलम तो यह है कि इस आंदोलन को लेकर विदेशों में चर्चा देखने को मिल चुकी थी।

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