ईरान-अमेरिका तनाव: PAKका ‘शांति मिशन’ फ्लॉप, पुतिन बने नए ‘पीसमेकर’, क्या टल जाएगा महायुद्ध?

मॉस्को/वॉशिंगटन।मिडिल ईस्ट में मचे कोहराम के बीच वैश्विक कूटनीति का केंद्र अब इस्लामाबाद से खिसक कर मॉस्को जा पहुँचा है। जहाँ एक ओर पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कराने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है, वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कमान संभालते हुए एक बड़ा ‘शांति दांव’ चल दिया है।

पाकिस्तान की विफलता: मध्यस्थ से ‘संदेशवाहक’ तक का सफर खत्म?

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस पूरे विवाद में अपनी प्रासंगिकता खो चुका है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण सामने आ रहे हैं:

  • रणनीतिक भटकाव: जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर था, तब पाकिस्तान के विदेश मंत्री अफगानिस्तान और तालिबान के मुद्दों को लेकर चीन में व्यस्त रहे।
  • मध्यस्थ पर ही हमला: पाकिस्तान जिस ईरानी नेता कमाल खराजी के जरिए मुज्तबा खामेनेई तक अपनी बात पहुँचा रहा था, 1 अप्रैल को अमेरिकी स्ट्राइक में उनके घायल होने के बाद पाकिस्तान का ‘संपर्क सूत्र’ ही टूट गया है।
  • भरोसे की कमी: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कर दिया है कि उन्हें अमेरिकी गंभीरता पर शक है, जिसे दूर करने में पाकिस्तान पूरी तरह विफल रहा।

पुतिन का ‘मास्टर प्लान’: क्या रूस बचाएगा दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध से?

रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने अब इस संकट में ‘गेम चेंजर’ की भूमिका अपना ली है। पुतिन के प्रेस सेक्रेटरी दमित्री पेस्कोव ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति खुद इस शांति योजना पर काम कर रहे हैं।

पुतिन के प्लान की 3 बड़ी बातें

  1. वैश्विक रसद (Logistics) का पुनर्गठन: पुतिन का मानना है कि इस युद्ध से वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन तबाह हो सकती है। रूस एक नया ढांचा पेश करने की तैयारी में है जो व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखे।
  2. क्षेत्रीय शक्तियों को साथ लाना: पुतिन ने सिर्फ बयानबाजी नहीं की, बल्कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और मिस्र के विदेश मंत्री से संपर्क साधकर एक ‘यूनाइटेड फ्रंट’ बनाने की कोशिश शुरू कर दी है।
  3. इंटेलिजेंस कोऑर्डिनेशन: रूसी खुफिया एजेंसी (SVR) के प्रमुख सर्गेई नारिशकिन सीधे तौर पर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के संपर्क में हैं, ताकि किसी भी ‘गलतफहमी’ के कारण परमाणु युद्ध जैसी स्थिति न बने।

ट्रंप की चेतावनी और ईरान की जिद

रूस की यह एंट्री ऐसे समय में हुई है जब स्थितियां बेहद नाजुक हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि युद्ध 2-3 हफ्ते तक खिंच सकता है। दूसरी ओर, ईरान के सुप्रीम लीडर ने स्पष्ट कर दिया है कि वे समझौते के मूड में नहीं हैं।

विशेषज्ञों की राय: “पाकिस्तान की तुलना में रूस का ईरान पर अधिक प्रभाव है और अमेरिका के साथ भी उसकी खुफिया चैनल सक्रिय हैं। अगर पुतिन इस तनाव को कम करने में सफल होते हैं, तो यह वैश्विक राजनीति में रूस की महाशक्ति वाली छवि को फिर से स्थापित करेगा।”

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