SAIL: एक और खुलासा – सच्चाई दिखी मगर कार्रवाई नहीं

विशेष रिपोर्ट

विवेक अवस्थी
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) भारत की स्टील इंडस्ट्री की रीढ़ है, लेकिन इसके सतर्कता तंत्र में गंभीर खामियां उजागर हो रही हैं। एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने हाल ही में एक गोपनीय रिपोर्ट के माध्यम से खुलासा किया है कि कैसे भ्रष्टाचार की शिकायतें दर्ज तो होती हैं, लेकिन कार्रवाई नदारद रहती है। यह ‘देखा-सुना, किया कुछ नहीं’ का विरोधाभास SAIL की कार्य संस्कृति को परिभाषित कर रहा है।
सतर्कता विभाग: शिकायतों का कब्रिस्तान?
पूर्व अधिकारी, जिन्होंने SAIL के कई प्लांट्स में सेवा की, ने अपनी रिपोर्ट में दर्जनों उदाहरण दिए हैं। उदाहरण के लिए:
- भ्रष्टाचार की शिकायतें दबाई गईं: एक मामले में, एक मध्य स्तर के अधिकारी पर टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगा। सतर्कता विभाग को सबूत सौंपे गए, लेकिन दो साल बाद भी कोई जांच शुरू नहीं हुई।
- सीबीआई रेफरल का ढोंग: गंभीर मामलों को सीबीआई को सौंपने का दावा किया जाता है, लेकिन अधिकांश फाइलें सतर्कता विभाग में ही धूल खा रही हैं। एक पूर्व अधिकारी ने बताया, “शिकायतें दर्ज होती हैं, लेकिन ‘आंतरिक जांच’ के नाम पर उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।”
- प्रमोशन में भेदभाव: योग्य कर्मचारियों को दरकिनार कर भ्रष्ट अधिकारियों को बढ़ावा मिलता है। रिपोर्ट में नाम लेकर कहा गया कि कुछ अधिकारियों पर करोड़ों के घोटाले के आरोप हैं, फिर भी वे उच्च पदों पर बने हुए हैं।
SAIL के चेयरमैन और बोर्ड को ये रिपोर्ट भेजी गईं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पूर्व अधिकारी ने कहा, “सतर्कता विभाग सतर्कता का दिखावा करता है, लेकिन वास्तव में यह भ्रष्टाचार को संरक्षण देता है।”
आंकड़ों की कहानी
SAIL के आंतरिक आंकड़े खुद बोलते हैं:
| वर्ष | दर्ज शिकायतें | जांच पूरी | कार्रवाई हुई |
| 2022 | 156 | 28 | 5 |
| 2023 | 189 | 35 | 7 |
| 2024 | 212 | 41 | 9 |
ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि 80% से अधिक शिकायतें अनिर्णीत रहती हैं। पूर्व अधिकारी ने आरोप लगाया कि सतर्कता प्रमुख स्वयं राजनीतिक दबाव में काम करते हैं, जिससे बड़ी मछलियां बच जाती हैं।
सरकारी हस्तक्षेप की मांग
पूर्व अधिकारी ने स्टील मंत्रालय और सीवीसी (सेंट्रल विजिलेंस कमीशन) से अपील की है:
- स्वतंत्र ऑडिट: सतर्कता विभाग की सभी फाइलों का तत्काल ऑडिट।
- सीबीआई जांच: सभी लंबित मामलों को सीबीआई को सौंपा जाए।
- डिजिटल ट्रैकिंग: शिकायतों के लिए ऑनलाइन पोर्टल जहां स्टेटस सार्वजनिक हो।
- सख्त सजा: दोषी अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए।
SAIL ने इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन उद्योग हलकों में चर्चा जोरों पर है। क्या यह खुलासा SAIL में सुधार लाएगा, या यह भी एक और दबा हुआ मामला बन जाएगा?
इस मामले पर SAIL से टिप्पणी का इंतजार है .
(यह रिपोर्ट गोपनीय दस्तावेजों और साक्ष्यों परआधारित है।लेखक विवेक अवस्थी वरिष्ठ पत्रकार और indianpsu.com के प्रधान संपादक है. यह लेख indianpsu.com के साथ हमारे समाचार साझीदारी के अंतर्गत प्रकाशित किया गया है )



