हरियाणा राज्यसभा चुनाव में सियासी ड्रामा, बीजेपी-कांग्रेस ने जीती एक-एक सीट, निर्दलीय मामूली अंतर से हारा

हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों पर सोमवार को हुए चुनाव में जबरदस्त सियासी उठापटक देखने को मिली। लंबे ड्रामे और देरी के बाद आए नतीजों में एक सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के खाते में गई। बीजेपी उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत पहले से तय मानी जा रही थी, जबकि कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध को जीत के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को बेहद मामूली अंतर से हराया।

चुनाव में कुल 90 विधायकों में से 83 वोट वैलिड माने गए। इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के 2 विधायक गैरहाजिर रहे, जबकि कांग्रेस के 4 और बीजेपी का 1 वोट अमान्य घोषित किया गया। जीत के लिए आवश्यक वोट वैल्यू 2767 तय की गई थी।

कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध को 2800 वोट वैल्यू मिली, जबकि बीजेपी के संजय भाटिया को 3900 वोट वैल्यू हासिल हुई। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को 2733.33 वोट वैल्यू मिली और वे महज 33 वोट वैल्यू से हार गए। चूंकि दोनों प्रमुख उम्मीदवार जीत का आंकड़ा पार कर चुके थे, इसलिए दूसरे वरीयता वोटों की गिनती की जरूरत नहीं पड़ी।

अगर INLD चुनाव का बहिष्कार न करती और निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन करती, तो नतीजे बदल सकते थे और कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ सकता था।

बीजेपी की हैट्रिक पर ब्रेक, कांग्रेस की वापसी
इस चुनाव में बीजेपी तीसरी जीत दर्ज करने से चूक गई, जबकि कांग्रेस ने पिछले दो राज्यसभा चुनावों में मिली हार का बदला ले लिया। कांग्रेस की इस जीत को नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।

हुड्डा ने कहा कि जिन विधायकों ने पार्टी के खिलाफ जाकर क्रॉस वोटिंग की है, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी और जनता भी उन्हें जवाब देगी।

राहुल गांधी के फैसले को बताया जीत की वजह
हरियाणा कांग्रेस नेताओं ने इस जीत का श्रेय राहुल गांधी को दिया। उनका कहना है कि कर्मवीर बौद्ध को उम्मीदवार बनाकर दलित समाज को सम्मान दिया गया और पार्टी की एकजुटता ने इसे जीत में बदला।

खुद कर्मवीर बौद्ध ने भी अपनी जीत को राहुल गांधी की सोच की जीत बताया।

क्रॉस वोटिंग और आरोप-प्रत्यारोप
चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग भी बड़ा मुद्दा रही। कांग्रेस ने अपने विधायकों के क्रॉस वोट करने की बात स्वीकार की, हालांकि नाम सार्वजनिक नहीं किए गए।

वहीं बीजेपी ने कांग्रेस पर अपने विधायकों को ‘बंधक’ बनाकर रखने और दबाव में वोट डलवाने का आरोप लगाया। बीजेपी उम्मीदवार संजय भाटिया और मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि कांग्रेस ने विधायकों को उनकी अंतरात्मा के अनुसार वोट नहीं करने दिया।

INLD पर भी उठे सवाल
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने INLD पर कांग्रेस को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि अगर INLD निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन करती, तो परिणाम अलग हो सकता था।

काउंटिंग में देरी और विवाद
मतगणना शाम 5 बजे शुरू होनी थी, लेकिन वोट की गोपनीयता भंग होने के आरोपों के कारण इसमें देरी हुई। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने कुछ विधायकों के वोट को लेकर शिकायत चुनाव आयोग से की थी। रात करीब 10:30 बजे चुनाव आयोग से मंजूरी मिलने के बाद ही गिनती शुरू हो सकी, जो देर रात तक चली और आखिरकार तड़के नतीजे घोषित हुए।

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