मोदी-जिनपिंग की मुलाकात क्यों है अहम

न्‍यूज डेस्‍क

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुटनीति अब रंग लाने भी लगी है। चाहे संयुक्त राष्ट्र संघ हो या फिर कोई और फोरम भारत को दरकिनार करना अब किसी भी देश के बस की बात नहीं। भारत अब आँख में आँख डाल कर बातें करता है।

जाहिर है चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा पर पूरे विश्‍व की निगाहें हैं। माना जा रहा है कि शी जिनपिंग की यात्रा अनौपचारिक ही सही ये भव्य स्वागत जिसमें सीमा विवाद की तल्खी नहीं शायद ऐसी छाप छोड जाए जो आने वाले दिनों में भारत चीन संबंधों में कोई नया आयाम ही जोड़ दे।

गौरतलब है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे का आज दूसरा दिन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक बार फिर शी जिनपिंग मुलाकात करेंगे। दोनों शीर्ष नेताओं के बीच सुबह करीब 10 बजे कोव रिसॉर्ट में बैठक होगी।

मिली जानकारी के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच यह अनौपचारिक मुलाकात है। सूत्रों के मुताबिक दोनों देश अलग-अलग बयान जारी करेंगे।

हालांकि दोनों नेताओं के बीच मुलाकात की वजह स्पष्ट नहीं है। कहा जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात साल 2018 में चीन के वुहान शहर में हुई वार्ता की तरह अनौपचारिक ही रहेगी।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा शुरु की गयी इन अनौपचारिक मुलाकात को पीएम मोदी ने इतना बड़ा बना दिया कि संदेश सिर्फ चीन को नहीं बल्कि दुनिया भर के देशों को गया।

चीन को संदेश ये कि भारत चीन संबध सदियों पुराने हैं। यहां तक की व्यापार और वाणिज्य का रिश्ता भी प्रचीन काल से ही चला आ रहा है। ऐसे में तल्खी भुला कर व्यापार और बाजार बढाने पर दोनो देश ध्यान दें तो मुश्किलें आसान हो जाएंगी।

उसके उत्पादों के लिए चीन भी जानता है कि भारत एक बहुत बड़ा बाजार है। अगर चीनी वस्तुओं का बहिष्कार होता है तो नुकसान उनका ही होगा।

शायद यही समझा पाने में और संदेश देने में पीएम मोदी धीरे धीरे सफल हो रहे हैं कि सीमा विवाद तो अंग्रेजों का दिया है जो वक्त के साथ साथ बात चीत कर के सुलझ ही जाएगा लेकिन जब पड़ोसी बदल नहीं सकते तो कंधे से कंधा मिला कर चलने में हर्ज ही क्या है।

ऐसे मे पाकिस्तान को खुल कर समर्थन देने वाला चीन ने भी अपने राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यात्रा से ठीक पहले कह दिया कि कश्मीर मुद्दे को भारत पाकिस्तान ही बातचीत कर सुलझा लें।

भारत ने हर फोरम पर कश्मीर पर अपने कड़े तेवर जाहिर कर दिए हैं और ताकतवर देशों का समर्थन भी हासिल कर लिया है। ऐसे में ये यात्रा भविष्य के सुलझते भारत चीन रिश्तों की नींव जरुर तैयार करेगी। आखिर बातचीत से कौन सी समस्या हल नहीं होती।

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