तेज बहादुर के हटने से भी कम नहीं होगी मोदी की मुश्किलें

स्पेशल डेस्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव की जंग बेहद रोचक हो गई है। सपा-बसपा का गठबंधन यूपी में बीजेपी की नींद उड़ा रहा है। आलम तो यह है कि बनारस में मोदी की राह पहले की तुलना में इस बार आसान नहीं है। राजनीति के कई जानकारों का मानना है इस बार के चुनाव में मोदी लहर नहीं है। इतना ही नहीं बीजेपी को इस बात का एहसास है कि उसके लिए मौजूदा चुनाव आसान नहीं है ।

जहां तक बनारस की बात की जाये तो भले ही मोदी का दावा मजबूत हो लेकिन एक वक्त ऐसा लग रहा था कि सेना के जवान तेज बहादुर मोदी के लिए खतरा बन सकते हैं लेकिन चुनाव आयोग ने उनका नामांकन एक झटके में खारिज कर दिया है। उनके नामांकन खारिज होने के बाद वहां के स्थानिय लोग भी काफी गुस्से में है।

नामांकन रद्द होने के समय काफी संख्या में लोग डीएम के कार्यालय के बाहर मौजूद थे। ऐसे में लोगों का लग रहा था मोदी को तेज बहादुर कड़ी टक्कर देंगे लेकिन बाद में उनकी उम्मीदों पर चुनाव आयोग ने पानी फेर दिया। उनके नामांकन खारिज होने के बावजूद मोदी के लिए बनारस जीतना पहले के मुकाबले आसान नहीं होगा।

काशी नगरी में मोदी का पुराना जलवा अब नहीं रहा है। बीते पांच सालों में मोदी ने 19 बार बनारस का दौरा किया है लेकिन केवल योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। सबसे अहम बात है कि विकास के नाम पर याहं पर कुछ खास काम नहीं हुआ है। अभी कई काम अधूरे है और पूरे तक नहीं हुए है।

आलम तो यह है कि सडक़, बिजली, पानी, सीवर जैसी समस्याओं से अब भी बनारस के लोग जूझ रहे हैं। विकास के नाम पर यहां पर रिंग रोड में काफी बदलाव हुआ है और फोर लेन वाली सडक़े काशी को मिली है। स्थानिया लोग बीजेपी की गलत नीति से भी परेशान है। कुछ लोगा नोटबंधी, जीएसटी जैसे फैसलों से काफी लोग नाराज है। अब देखना होगा कि मोदी कैसे बनारस का रण जीतते हैं।

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