नीतीश की गिरती सेहत, डगमगाती कुर्सी–सत्ता के अंत का संकेत?

जुबिली स्पेशल डेस्क

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार एक ऐसे नेता हैं जो मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की कला में माहिर माने जाते हैं। राजनीतिक परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, सरकार किसी की भी बने, लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में उनका चेहरा ही सामने रहता है। कभी राजनीतिक फायदे के लिए वे लालू प्रसाद यादव के साथ आ जाते हैं तो कभी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का समर्थन कर लेते हैं। बिहार की राजनीति में यह आम धारणा बन चुकी है कि बिना नीतीश कुमार के कोई सरकार बन नहीं सकती।

लेकिन इस बार, विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने बाजी पलटने का दावा किया है। बिहार विधानसभा चुनाव में अब केवल छह महीने का समय शेष है, ऐसे में राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। बीजेपी ने भले ही यह साफ कर दिया हो कि वे आगामी चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ेंगे, लेकिन चुनाव परिणाम के बाद समीकरण बदल सकते हैं।

इस बीच, तेजस्वी यादव और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अब नीतीश कुमार की सेहत को भी चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। आरजेडी ने हाल के कुछ घटनाक्रमों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री की मानसिक स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं। हाल ही में, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर आरजेडी ने एक वीडियो साझा करते हुए लिखा—

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक मिनट तक बेवजह हाथ जोड़े बैठे रहे, भूल गए कि हाथ अब नीचे भी करने हैं। उनके मंत्री को मजबूरन सीएम के हाथों को झटके से नीचे करना पड़ा। कभी अधिकारी उनके हाथ नीचे करते हैं, कभी मंत्री तो कभी संतरी! क्या अब कुछ और देखना या सुनना बाकी रह गया है? अब नीतीश जी के मानसिक स्वास्थ्य के कारण उनका महत्व एक मुखौटे से अधिक का नहीं रह गया है!”

इससे पहले, पटना के पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुए एक कार्यक्रम के दौरान भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जिसमें राष्ट्रगान के समय नीतीश कुमार मंच पर हंसते हुए अपने प्रधान सचिव दीपक कुमार से बातचीत करते नजर आए थे। इस घटना को लेकर बिहार विधानसभा में भी हंगामा हुआ था। विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री से इस्तीफा और बिना शर्त माफी की मांग की थी।

बिहार की राजनीति में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले चुनाव में जनता इन मुद्दों को किस तरह से लेती है और क्या यह घटनाक्रम नीतीश कुमार की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करेगा।

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