नाटो स्थापना दिवस पर बवाल: डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो को बताया ‘पेपर टाइगर’, ईरान युद्ध में साथ न देने पर दी अलग होने की धमकी

वाशिंगटन/ब्रुसेल्स: नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) आज अपना 77वां स्थापना दिवस मना रहा है, लेकिन उत्सव के बजाय संगठन के भीतर दरारें साफ नजर आ रही हैं।

ईरान के खिलाफ युद्ध में सहयोग न मिलने से नाराज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सहयोगियों पर तीखा हमला बोला है और गठबंधन से अलग होने तक के संकेत दे दिए हैं।

मुख्य हाइलाइट्स: नाटो बनाम ट्रंप विवाद

  • स्थापना दिवस: 4 अप्रैल 1949 को वाशिंगटन संधि के जरिए हुई थी नाटो की स्थापना।
  • विवाद की जड़: ईरान के खिलाफ जंग में ट्रंप ने यूरोपीय देशों से सैन्य ठिकानों और नौसैनिक तैनाती की मांग की थी।
  • कड़ा रुख: स्पेन और फ्रांस जैसे देशों ने अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए अपना एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) देने से इनकार किया।
  • ट्रंप का बयान: राष्ट्रपति ने नाटो को ‘पेपर टाइगर’ करार देते हुए सहयोगी देशों की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए।

क्यों पीछे हटे यूरोपीय सहयोगी?

नाटो के अनुच्छेद 5 के अनुसार, एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाता है, लेकिन ईरान-अमेरिका संघर्ष के मामले में कई देशों ने इसे “अपनी जंग” मानने से इनकार कर दिया है:

  1. राष्ट्रीय हित का हवाला: ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि इस संघर्ष में सीधे उतरना उनके राष्ट्रीय हित में नहीं है।
  2. एयरस्पेस पर पाबंदी: स्पेन ने अमेरिकी विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद किया, वहीं फ्रांस ने इजरायल जा रही सैन्य सप्लाई वाली उड़ानों पर सख्ती दिखाई।
  3. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ का जोखिम: जर्मनी और अन्य देशों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौसैनिक गठबंधन के प्रस्ताव को अव्यावहारिक बताते हुए ठुकरा दिया। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने सवाल उठाया कि क्या ट्रंप को उम्मीद है कि यूरोप की कुछ फ्रिगेट वह कर देंगी जो अमेरिकी नौसेना नहीं कर पाई।

77 साल का सफर और भविष्य पर संकट

आज ही के दिन 1949 में 12 देशों के साथ शुरू हुआ यह संगठन अब 32 सदस्यों तक पहुंच चुका है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शांति के लिए बना यह सैन्य गठबंधन अब अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का गुस्सा नाटो को पूरी तरह खत्म न भी करे, तो भी यह गठबंधन की एकता और भरोसे को गंभीर रूप से कमजोर कर सकता है।

क्या अमेरिका छोड़ देगा नाटो?

ट्रंप की धमकी को कई विश्लेषक उनकी “प्रेशर टैक्टिक्स” का हिस्सा मान रहे हैं ताकि सहयोगी देशों पर रक्षा बजट और संसाधनों के लिए दबाव बनाया जा सके। हालांकि, अगर अमेरिका वास्तव में पीछे हटता है, तो यह वैश्विक सुरक्षा संतुलन को पूरी तरह बदल देगा।

Related Articles

Back to top button