नतीजों से बढ़ाया राहुल गांधी का कद

जुबिली स्पेशल डेस्क

लखनऊ। राहुल गांधी ये वो नेता है जिसको लेकर बीजेपी अक्सर गम्भीर नजर नहीं आती थी। इतना ही नहीं राहुल गांधी को लेकर बीजेपी मजाक बनाने में भी काफी आगे रहती थी।

बीजेपी के शीर्ष नेता भी अक्सर अपनी राजनीति चमकाने के लिए  राहुल गांधी के नाम का भरपूर इस्तेमाल करते थे। सुबह उठे तो राहुल और फिर पूरा दिन राहुल गांधी के नाम पर कांग्रेस को कोसना उनकी आदत में शुमार था लेकिन वहीं राहुल गांधी अब बीजेपी को सीधे तौर पर चुनौती दे रहे हैं।

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राजनीति की पिच पर दमदार शुरुआत

भले ही कांग्रेस ने सत्ता हासिल नहीं की लेकिन राहुल गांधी ने बीजेपी को जमीन पर जरूर ला दिया है। भारत जोड़ो यात्रा ने पूरी बीजेपी कुनबे को हिलाकर रख दिया।

राजनीति की पिच पर राहुल गांधी को बीजेपी ने कमजोर खिलाड़ी बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी है लेकिन वहीं राहुल गांधी अब पूरी बीजेपी के लिए चुनौती साबित हो रहे हैं। लोकसभा 2024 चुनाव ने राहुल गांधी की छवि को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है।

राजनीति में जब उन्होंने कदम रखा था तब उनके पिता इस दुनिया से रुखसत हो चुके थे और कांग्रेस पार्टी को फिर से खड़ा करने की जिम्मेदारी उनके नाजुक कंधों पर आ गई थी।

हालांकि इस दौरान उनकी सोनिया गांधी को राजनीति में उतरना पड़ा क्योंकि वक्त की डिमांड यहीं थी। 90 के आखिरी दशक में वो राजनीति में आ जरूर  गए थे लेकिन लोग प्रियंका गांधी में इंदिरा गांधी की छवि देख रहे थे और चाहते थे कि वो राजनीति में आये लेकिन राहुल गांधी ने धीरे-धीरे राजनीति की पिच पर खेलना शुरू किया।

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विपक्ष ने उनकी छवि को बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी

राहुल 2004 में अमेठी से कांग्रेस की तरफ से खड़े हुए और उन्होंने पहली बार में शानदार प्रदर्शन किया और ये सिलसिला 2014 तक चला और राहुल 3 बार अमेठी से संसद चुने गए लेकिन इस दौरान बीजेपी ने उनकी छवि को खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

कांग्रेस को संभालने के लिए पार्टी में कई बड़े पदों पर रहे लेकिन मोदी युग में कांग्रेस का प्रदर्शन गिरता रहा और राहुल गांधी की छवि को खराब किया जाना लगे। राहुल इस दौरान विपक्ष के निशाने पर रहे और फिर पप्पू के नाम से उनको मशहूर किया जाने लगा।

अब जनता की आवाज बन गए

2013 में पार्टी के उपाध्यक्ष और फिर 2017 में कांग्रेस अध्यक्ष पद पर राहुल पहुंचे लेकिन मोदी की सुनामी के चलते अपनी पार्टी के लोगों के निशाने पर आ गए।

उन्हें इस दौरान अदालती कार्रवाई का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बावजूद राहुल गांधी टूटे नहीं बल्कि मजबूती से न सिर्फ बीजेपी से लड़े बल्कि जनता की अवाज बनकर सामने आये।

इस दौरान पार्टी के कई बड़े नेताओं ने कांग्रेस पार्टी से किनारा कर लिया और बगावत ने उनको तोडऩे की कोशिश की लेकिन राहुल गांधी अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटे और पिछले दो चुनाव में मिली हार से सबक लेते हुए जनता के बीच जाकर फिर खोया हुआ विश्वास हासिल किया।

अब पप्पू शब्द से नहीं पुकारा जाता है

पिछले दो चुनाव में राहुल गांधी की छवि एकदम अलग तौर पेश की जाती थी। उनको लेकर  पप्पू शब्द का खूब इस्तेमाल होता था लेकिन लोकसभा 2024 के चुनाव में राजनीतिक दलों ने खासकर विपक्ष ने इस शब्द का इस्तेमाल करने से बचने की कोशिश की क्योंकि वहीं राहुल गांधी अब विपक्ष के लिए बड़ा सिरदर्द बन चुकेहैं।

जनता की अदालत में पहुंचे सीधे तौर पर वो बीजेपी से तीखे सवाल पूछ रहे हैं। इसका नतीजा ये हुआ कि विपक्ष को अब पता चल चुका है कि राहुल गांधी अब पप्पू नहीं रहे बल्कि वो समझदार हो चुके हैं।

सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की डिमांड लगातार बढ़ रही है। उन्होंने इस बार किसी भी टीवी चैनल को कोई  इंटरव्यू नहीं, जो अपने आप में एक बड़ा संदेश है।

यूपी में सपा के साथ मिलकर कांग्रेस को फिर से जिंदा करने का पूरा श्रेय भी राहुल गांधी को जाता है। अखिलेश  के साथ उनकी जोड़ी इस बार पूरी तरह से हिट हो गई है। कुल मिलाकर आने वाले दिनों में राहुल गांधी की धमक देखने को मिलेगी और अगर वो विपक्ष के नेता हुए तो फिर बीजेपी के लिए वो संसद में और परेशानियां खड़ी कर सकते हैं।

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