Lok Sabha Election : जानें सम्भल लोकसभा सीट का इतिहास

पॉलिटिकल डेस्क

उत्तर प्रदेश लोक सभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक सम्भल लोकसभा क्षेत्र मुरादाबाद से अलग हुआ जिला है। सम्भल का ही एक भाग सराई तरीन अपने सबसे अलग तरह के सींग और हड्डियों की शिल्पकला क लिए विश्व प्रसिद्ध है। सम्भल का मुख्यालय पावसा सम्भल में स्थित है।

सम्भल मुगल शासक अकबर के शासनकाल में काफी निखरा पर उसी के पुत्र शाहजहां के शासन में सम्भल की हालत काफी बिगड़ गयी। सम्भल का एक समृद्ध इतिहास है। यहां बहुत से शासकों और सम्राटों ने शासन किया है।

लोधियों से लेकर मुगलों तक सम्भल पर शासन किया गया है। यह अशोक के साम्राज्य का भी हिस्सा था। पहला मुगल शासक बाबर ने यहां पहले बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था जो आज तक एक ऐतिहासिक स्मारक है।

आबादी/ शिक्षा

सम्भल लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत 5 विधान सभा क्षेत्र आता हैं जिसमें कुन्दरकी, बिलारी, चंदौसी, असमोली और सम्भल शामिल है। उससे पहले यह मुरादाबाद में सम्मिलित था।

सम्भल की जनसंख्या 221,334 है जिसमें से 116,008 पुरुष और 105,326 महिलाएं हैं। सम्भल में प्रति 1000 पुरुषों में 908 महिलाएं हैं। यहां की पुरुष साक्षरता दर 74.05 प्रतिशत और महिला साक्षरता दर 66.90 प्रतिशत है। यहां मतदाताओं की संख्या 1,693,229 है जिसमें महिला मतदाता 761,516 और पुरुष मतदाताओं की संख्या 931,603 है।

राजनीतिक घटनाक्रम

सामान्य सीट संभल 1977 में अस्तित्व में आई, इमरजेंसी के बाद देश में पहली बार चुनाव हो रहे थे यहां से चरण सिंह की पार्टी भारतीय लोक दल की शांति देवी ने विजय प्राप्त की और 3 साल तक यहां की सांसद रहीं। उसके बाद 1980, 1984 में लगातार कांग्रेस फिर 1989, 1991 में जनता दल ने ये सीट जीती।

1996 में बाहुबली डीपी यादव ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर इस सीट पर कब्जा किया। 1998 में ये सीट वीआईपी सीटों की गिनती में आ गई, तत्कालीन समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने 1998, 1999 में यहां से चुनाव जीता। 2004 में उनके भाई प्रोफेसर रामगोपाल यादव यहां से सांसद चुने गए, लेकिन 2009 में ये सीट बहुजन समाज पार्टी के खाते में गई।
मोदी लहर में 2014 में यह सीट बीजेपी के खाते में आ गई। वर्तमान सांसद भारतीय जनता पार्टी के नेता सत्यपाल सिंह हैं।

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