जुबिली न्यूज डेस्क
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब पार्टी के संस्थापक सदस्य और वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी मतदाता सूची (Electoral College) से बाहर हो गए हैं। यह फैसला किसी राजनीतिक मतभेद के कारण नहीं, बल्कि पूरी तरह संगठनात्मक प्रक्रिया से जुड़ा बताया जा रहा है।

क्यों मतदाता सूची से बाहर हुए आडवाणी और जोशी
बीजेपी सूत्रों के अनुसार, यह स्थिति पार्टी के संविधान में तय नियमों के कारण बनी है। बीजेपी के नियमों के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक कम से कम 50 प्रतिशत राज्यों में संगठनात्मक चुनावों का पूरा होना अनिवार्य है।
दिल्ली में संगठनात्मक चुनाव पूरे न होने से अटकी प्रक्रिया
इस बार दिल्ली प्रदेश बीजेपी में संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, जिसके चलते राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का चयन रुक गया। चूंकि लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य थे, इसलिए वे तकनीकी कारणों से निर्वाचन मंडल (Electoral College) से बाहर रह गए।
आम सहमति से होता है बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव में इस बार कुल 5708 निर्वाचक हिस्सा लेंगे। पार्टी की परंपरा के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन आम सहमति से किया जाता है।
फिलहाल नितिन नबीन का नाम अध्यक्ष पद के लिए सबसे आगे बताया जा रहा है। वे वर्तमान में बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में पार्टी के अंदर इस चुनाव को औपचारिकता मात्र माना जा रहा है।
ये भी पढ़ें-गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ को ट्रंप का न्योता, इजरायल की बढ़ी चिंता
मार्गदर्शक मंडल में सक्रिय रहेंगे दोनों वरिष्ठ नेता
जानकारी के मुताबिक, भले ही आडवाणी और जोशी मतदाता सूची से बाहर हों, लेकिन वे बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला पार्टी में नए दौर और नियमों के सख्त पालन की ओर इशारा करता है।
Jubilee Post | जुबिली पोस्ट News & Information Portal
