बिहार महागठबंधन में अब लालू निभाएंगे बड़ी भूमिका

रेशमा खान 

पटना: बिहार महागठबंधन में भले ही सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान मची हुई है, मगर शनिवार को राजद संसदीय बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया पार्टी में सीटों और उम्मीदवारों का चयन लालू यादव ही करेंगे।

खबर ये भी है कि महागठबंधन में किस घटक दल को कितनी सीटें दी जाएंगी इसका निर्णय भी लालू यादव ही लेंगें।

दरअसल बिहार में महागठबंधन बनने के बाद से ही सीटों के बटवारे को लेकर खींचतान मची हुई थी। साथ ही साथ राजद में दो गुट भी बन गए थे जिससे निपटना लालू यादव के पुत्र तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबडी देवी के लिए मुश्किल साबित होता जा रहा था।

सूत्रों का दावा है कि राजद बिहार में 20-22 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है और कांग्रेस पार्टी को 11 सीटें देने की पेशकश कर रही है। जबकि अन्य छोटे महागठबंधन दलों को 2019 के लोक सभा चुनावों के लिए शेष सीटों की पेशकश की जा रही है।

“पार्टी की केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक में तय किया गया है कि लोकसभा चुनाव से जुड़े सारे फैसले राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ही लेंगे”।

प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे ने बताया कि दिसंबर 2017 में चारा घोटाला मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद लालू यादव का राजेन्द्र इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साईंसेज (RIIMS) रांची में कई गभीर बीमारियों का इलाज चल रहा है।

लेकिन पिछले कुछ महीनों में रांची का ये अस्पताल बिहार की राजनीति का केंद्र बन गया है। कई महागठबंधन के नेता चाहे वो भाकपा के डी राजा या कांग्रेस पार्टी की नेता हों सभी लगातार सीटों के बटवारे को लेकर लालू यादव से निलते रहे हैं।

हालांकि जेल मैनुअल के अनुसार उन्हे हर शनिवार सिर्फ तीन ही व्यक्तियों से मिलने की अनुमति है। इस हफ्ते लालू यादव से लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव ने भी मुलाकात की थी।

खबर ये है कि शरद यादव खुद मधेपुरा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं और इसी वजह से वो लगातार लालू यादव के सामने माथा टेक रहे हैं।

सुत्रों का दावा है वाम दलों ने भी सम्मानजनक सीटें नहीं दिए जाने को लेकर अपनी नाराजगी जताई है।

छात्र नेता कन्हैया कुमार का नाम शुक्रवार को भाकपा के उम्मीदवारों की सूची से सिर्फ इसलिए हटा दिया गया था क्योकि राजद ने उनको बेगूसराय संसदीय क्षेत्र से मैदान में उतारने से इनकार कर दिया था।

हालांकि, यहां के राजनीतिक गलियारे ये चर्चा है की लालू यादव भाकपा – माले की सीटें बढ़ा सकते हैं क्योंकि उसका प्रभाव भोजपुर, अरवल और जहानाबाद जैसे इलाकों में ज्यादा है।

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