मुजफ्फरनगर में खाप पंचायत आज, पहलवानों के सम्मान के लिए लड़ेंगे किसान

जुबिली न्यूज डेस्क 

भारतीय कुश्ती महासंघ के निवर्तमान अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवानों का आंदोलन पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में केंद्रित होने की संभावना से भाजपा सतर्क हो गई है। पहलवानों के समर्थन में बृहस्पतिवार को मुजफ्फरनगर के सौरम में 12 साल बाद सर्वखाप पंचायत बुलाई गई है। इसे लेकर क्षेत्रीय भाजपा नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व को आगाह किया है।

बता दे कि बृहस्पतिवार की पंचायत को खासा महत्व दिया जा रहा है। पश्चिम यूपी के एक नेता ने बताया, उन्होंने और कई दूसरे नेताओं ने पार्टी नेतृत्व को आगाह किया है। सर्वखाप पंचायत के बाद सिंह बनाम पहलवानों के दंगल का केंद्र पश्चिम उत्तर प्रदेश बन सकता है, क्योंकि पहलवानों ने पहली बार हरियाणा को छोड़ कर पश्चिम उत्तर प्रदेश से जुड़े किसान नेता राकेश टिकैत और नरेश टिकैत पर अंतिम फैसला छोड़ दिया है।

बीच का रास्ता निकालने का आग्रह

भाजपा नेता ने बताया कि नेतृत्व से विवाद में बीच का रास्ता निकालने का आग्रह किया गया है। इससे पहले, जाट आरक्षण और कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में पार्टी इस बिरादरी की नाराजगी को हरियाणा तक सीमित करने और कृषि कानूनों की वापसी के बाद डैमेज कंट्रोल करने में सफल रही थी। इन दोनों मामलों से इतर सिंह बनाम पहलवानों का मामला दो जातियों की लड़ाई बन रही है।

ये भी पढ़ें-यूपी में 5 आईएएस अफसरों के तबादले, जानें किसको कहां मिली तैनाती

हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड के खाप चौधरी आएंगे

गुरुवार को होने वाली पंचायत पर राजनीतिक दलों की नजरें भी लगी हुई है। पंचायत में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड़ के खाप चौधरी आएंगे। वहीं संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारी भी शामिल रहेंगे। खाप चौधरी इस मसले पर अागे की रणनीति की दिशा और दशा तय करेंगे। पंचायत को लेकर खुफिया तंत्र सक्रिय हो गया है पुलिस ने पंचायत स्थल का निरीक्षण किया।

ये भी पढ़ें-गैस सिलेंडर के दाम में बड़ी राहत, जानें कितने रुपये सस्ता हुआ

पहलवानों का सम्मान नहीं खोने दिया जाएगा

भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहां कि इस पंचायत में भीड़ जुटाने का कोई मकसद नहीं है। उन्होंने कहा कि खाप चौधरी इस मसले पर आगे की रणनीति तय करेंगे। अपनी प्रतिभा और शक्ति से देशवासियों को कई बार गौरवांवित करने वाले पहलवानों का सम्मान नहीं खोने दिया जाएगा, भले ही पूर्व की भांति आंदोलन करना पड़े। भाकियू इस मसले का शांतिपूर्ण तरीके से हल चाहती है।

Related Articles

Back to top button