ईरान-अमेरिका युद्ध पर सीजफायर की कोशिश तेज, कतर को मिली जिम्मेदारी!

  • तुर्की, पाकिस्तान और मिस्र भी सक्रिय
  • जेडी वेंस ने कतर PM से की अहम बातचीत

जुबिली स्पेशल रिपोर्ट

वॉशिंगटन/दोहा। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए अब कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। युद्धविराम (Ceasefire) कराने के लिए कई देश एक साथ सक्रिय हो गए हैं, जिनमें तुर्की, पाकिस्तान, मिस्र और कतर की भूमिका अहम मानी जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान अमेरिका के संदेशों को ईरान तक पहुंचाने का काम कर रहा है, जबकि तुर्की खाड़ी देशों के बीच समर्थन जुटाने में लगा हुआ है। इस बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में शांति वार्ता के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी कतर को औपचारिक रूप से मध्यस्थता की जिम्मेदारी सौंप दी है।

कतर बना अमेरिका का भरोसेमंद मध्यस्थ

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हाल ही में कतर के प्रधानमंत्री से बातचीत की है। रिपोर्ट के अनुसार, यह बातचीत ईरान संकट को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने के विकल्पों पर केंद्रित रही।

बताया जा रहा है कि जेडी वेंस इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं। वह पहले ही ईरान के खिलाफ युद्ध का विरोध कर चुके हैं और नहीं चाहते कि अमेरिका इस संघर्ष में सीधे तौर पर उलझे, खासकर इजरायल के समर्थन में।

वेंस के लिए बड़ा कूटनीतिक इम्तिहान

विशेषज्ञों के मुताबिक, उपराष्ट्रपति बनने के बाद यह जेडी वेंस का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट माना जा रहा है। अगर वह ईरान-अमेरिका के बीच समझौता कराने में सफल रहते हैं, तो उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हो सकती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, वेंस लगातार यूएई समेत कई देशों के अधिकारियों के संपर्क में हैं और सीजफायर के लिए जरूरी सभी पहलुओं की निगरानी कर रहे हैं।

समझौते कराने में माहिर है कतर

कतर को लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवादों में सफल मध्यस्थ माना जाता है। साल 2020 में अमेरिका और तालिबान के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते में भी कतर की अहम भूमिका रही थी।

इसके अलावा कतर ने हमास-इजरायल, हूथी-यमन, चाड-सूडान, इरित्रिया-जिबूती और दारफूर जैसे जटिल संघर्षों में भी शांति समझौते कराने में सफलता हासिल की है।

कूटनीतिक समीकरण बदल रहे हैं

मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात के बीच कतर की सक्रियता इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में ईरान-अमेरिका के बीच तनाव कम हो सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि सभी पक्ष किस हद तक समझौते के लिए तैयार होते हैं।

Related Articles

Back to top button