“इश्क की रोटियां” एपिसोड 1 : “तफ्तान”
जुबिली डेस्क
इश्क! वह मीठी आग जो दिल में लगती है और ज़ुबान पर उतर आती है। वह नर्माहट जो आँखों से बहती है और हाथों में गूंथी जाती है। और रोटी? वह साधारण सी चीज़ जो पेट भरती है, मगर जब इश्क से मिलती है, तो स्वाद बनकर आत्मा को छू लेती है।
कहते हैं, हर नई रचना के पीछे एक अनकही कहानी छुपी होती है – एक दिल की धड़कन, एक आह की छाया, एक मुस्कान की लाली। इस किताब, “इश्क की रोटियाँ”, में मैंने इन्हीं अनकहों को शब्दों में पिरोया है। यह किताब नहीं, एक दस्तरख़ान है – जहाँ हर रोटी एक प्रेम की गवाह है, हर कौर एक ग़ज़ल का सुर।
सोचिए, लखनऊ की उन पुरानी गलियों में, जहाँ हवा में केसर और घी की खुशबू तैरती है, वहाँ रोटियाँ सिर्फ आटे से नहीं बनतीं। वे बनती हैं दिलों की आग से, आंसुओं की नमी से, और उन बिनकहे इज़हारों से जो कभी ज़ुबान पर नहीं आते।
लखनऊ की रोटियां सिर्फ एक रोटी नहीं बल्कि इश्क की एक मुकम्मल दास्ताँन है.. हर रोटी एक प्रेम की गवाह है, हर कौर एक ग़ज़ल का सुर है … लखनऊ की रोटियों के पीछे इश्क की कहानी है कल्पना लेखक और पत्रकार डा. उत्कर्ष सिन्हा की …
इश्क की रोटियां सीरीज की पहली कहानी है तफ़्तान नाम की रोटी की
सुनिए ये कहानी समय : 21 मिनट



