क्या सचमुच ईडी के निशाने पर है विपक्ष? मल्लिकार्जुन खड़गे ने कही ये बात

जुबिली न्यूज डेस्क

विपक्ष खासतौर पर कांग्रेस मोदी सरकार पर ये आरोप लगा रहा है कि ईडी का इस्तेमाल विपक्ष की आवाज़ को दबाने के लिए किया जा रहा है..विपक्ष का कहना है कि बेहद पुराने मामले में ईडी से पूछताछ के जरिए मोदी सरकार विपक्ष का चरित्रहनन कर रहा है। उसे भ्रष्ट साबित करने की कोशिश कर रहा है..कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से लंबी पूछताछ के बाद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे अब ईडी के निशाने पर हैं..खड़गे ने ईडी की मंशा पर राज्यसभा के भीतर ये सवाल उठाया.

राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि, विपक्ष ने कहा है कि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद ईडी के केसों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हुई है। संसद में एक सवाल के जवाब में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने स्वीकार किया कि पिछले 10 साल में ईडी ने फेमा के तहत कुल 24,893 केस दर्ज किए जबकि पीएमएलए केत 3,985 केस दर्ज किए गए..

मल्लिकार्जुन खड़गे ईडी को लेकर कही ये बात

इन आंकड़ों पर गौर करिए..फेमा के केस की बाढ़ ने साबित किया है ये असाधारण सक्रियता कुछ कहती है..ईडी ने 2014-15 में फेमा के तहत 915 मामले दर्ज किए थे जबकि 2021-22 तक इन मामलों की संख्या अचानक बढ़कर 5313 हो गई. इसी तरह प्रिवेंशन ऑप मनी लाउंड्रिंग केसेज की तादाद भी 2014-15 के 178 केसों के मुकाबले 2021-22 तक पांच गुना बढ़कर 1180 तक पहुंच गई। इस तरह दोनों ही मामलों में ईडी के यहां दर्ज केस की संख्या 2014-15 के 1093 के मुकाबले बढ़कर 5,493 हो गई।

फेमा के केस की बाढ़ ने साबित किया है ये असाधारण सक्रियता कुछ कहती है..ईडी ने 2014-15 में फेमा के तहत 915 मामले दर्ज किए थे जबकि 2021-22 तक इन मामलों की संख्या अचानक बढ़कर 5313 हो गई. इसी तरह प्रिवेंशन ऑप मनी लाउंड्रिंग केस की तादाद भी 2014-15 के 178 केसों के मुकाबले 2021-22 तक पांच गुना बढ़कर 1180 तक पहुंच गई। इस तरह दोनों ही मामलों में ईडी के यहां दर्ज केस की संख्या 2014-15 के 1093 के मुकाबले बढ़कर 5,493 हो गई।

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17 साल में ईडी ने 23 लोग की सजा की तय

सरकार की ओर से आंकड़े तो विस्तार से पेश किए गए लेकिन हकीकत यही है कि इन पूरे मामले में आरोपियों पर सजा की संख्या बेहद कम है। एक और आंकड़े के मुताबिक 17 साल में ईडी केवल 23 लोग की सजा ही तय कर सका। इसकी वजह से भी ईडी की मंशा पर सवाल उठ रहे है..विपक्ष का आरोप है कि जिस PMLA को कभी आतंकी घटनाओं के लिए धन के स्रोत पर काबू करने के लिए मजबूत किया गया था उसे विपक्ष को दबाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है…इतना ही नहीं अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में बने ईडी को मोदी सरकार ने और भी मजबूत करते हुए इसे असीमित ताकत दे दी है।

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