ईरान का बयान: हमारा टारगेट सिर्फ अमेरिकी बेस

जुबिली स्पेशल डेस्क

ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। जवाबी कार्रवाई के बीच ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि उनका लक्ष्य पूरे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकाने हैं। उन्होंने कहा कि तेहरान क्षेत्रीय देशों के साथ युद्ध नहीं चाहता, लेकिन क्षेत्र में फैले अमेरिकी सैन्य बेस उसके लिए वैध लक्ष्य हैं।

विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बयान दिया कि ईरान युद्ध को क्षेत्रीय रूप देने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि हालात ऐसे हैं कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों के कारण संघर्ष स्वतः ही विस्तार ले सकता है। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका जमीन, फाइटर जेट या समुद्री तैनाती के जरिए हमला करता है, तो वह सीधे ईरान की सुरक्षा को प्रभावित करता है।

अराघची ने कहा कि यदि क्षेत्र में स्थित अमेरिकी बेस अपने सैनिकों को अस्थायी रूप से कहीं और स्थानांतरित करते हैं, तो यह अपने आप में एक अलग मुद्दा बन जाता है। उन्होंने दोहराया कि ईरान हर स्थिति में अपने लोगों और अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी बयान में कहा कि देश चुप नहीं बैठेगा और किसी भी प्रकार के हमले या अपराध के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने कहा कि अस्पतालों पर हमला मानव जीवन पर सीधा प्रहार है, जबकि स्कूलों को निशाना बनाना किसी राष्ट्र के भविष्य पर हमला है। मरीजों और बच्चों को निशाना बनाना मानवता के सिद्धांतों का उल्लंघन है और दुनिया को इसकी निंदा करनी चाहिए।

विदेश मंत्री ने कहा कि क्षेत्रीय देशों को ईरान पर दबाव बनाने के बजाय अमेरिका पर दबाव डालना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिका ने यह कथित अन्यायपूर्ण और अवैध युद्ध क्यों शुरू किया और क्षेत्र को इस स्थिति में क्यों धकेला।

अराघची ने यह भी दावा किया कि ईरान किसी भी क्षेत्रीय देश का उपयोग नहीं कर रहा है, और कई देशों ने स्वयं कहा है कि उन्होंने अमेरिका को अपनी हवाई या भौगोलिक सीमा का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी। ऐसे में सवाल उठता है कि सैन्य विमान संबंधित एयरस्पेस में कैसे पहुंचे।

उन्होंने कहा कि हालात बदल चुके हैं—ईरान अब पड़ोसी देशों से नहीं, बल्कि उन अमेरिकी बलों से मुकाबला कर रहा है जो इन देशों में तैनात हैं। साथ ही, वह अमेरिका और उसके साथ सहयोग करने वाली ताकतों का भी सामना कर रहा है।

ईरान ने कुवैत सरकार को भी औपचारिक नोट भेजने की तैयारी की है। यदि दावा सही है कि कुवैती एयर डिफेंस ने किसी विमान को गिराया, तो कुवैत को स्पष्ट करना होगा कि वह विमान उसकी हवाई सीमा में क्या कर रहा था। विदेश मंत्री ने कहा कि इस मामले में ईरान आधिकारिक विरोध पत्र (प्रोटेस्ट नोट) भेजेगा।

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