ईरान के सुरक्षा परिषद की कमान अब सईद जलीली के हाथों में

तेहरान: इजराइली हमले में ईरान के सुरक्षा परिषद प्रमुख अली लारीजानी की मौत के बाद अब इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सईद जलीली को सौंपी गई है। 60 वर्षीय जलीली अब अमेरिका और इजराइल से जुड़े सभी रणनीतिक फैसलों में मुख्य भूमिका निभाएंगे। युद्ध में दाहिना पैर खोने के बाद उनके समर्थक उन्हें “जिंदा शहीद” के रूप में सम्मान देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलीली अब इजराइल को लेकर निर्णायक कदम उठा सकते हैं।
इजराइल की रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को लारीजानी की हत्या की जानकारी दी थी, जबकि ईरान ने देर रात इसकी पुष्टी की। 67 वर्षीय लारीजानी अपनी बेटी से मिलने के लिए तेहरान के बाहरी इलाके गए थे, तभी उन पर हमला हुआ। लारीजानी अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रमुख सलाहकार भी रह चुके हैं।
सईद जलीली ने सुरक्षा परिषद की कमान संभालते ही तेल अवीव समेत कई इजराइली शहरों पर कार्रवाई का आदेश दिया।
कौन हैं सईद जलीली?
ईरान के मशहद में 1965 में जन्मे जलीली की पारिवारिक पृष्ठभूमि साधारण रही है। उनके पिता स्कूल प्रिंसिपल और फ्रेंच भाषा शिक्षक थे, जबकि मां अजेरी मूल की हैं। जलीली ने 2007 से 2013 तक ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार के रूप में पश्चिमी देशों के साथ कूटनीतिक वार्ताओं का नेतृत्व किया।
शुरुआत में उन्होंने अकादमिक क्षेत्र में डॉक्टरेट की और विश्वविद्यालय में अध्यापन किया। बाद में वे ईरान के विदेश मंत्रालय में शामिल हुए और विभिन्न पदों पर काम किया। इसके बाद उन्होंने ‘सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कट्टर विचारों की चर्चा अक्सर पश्चिमी कूटनीतिक दस्तावेजों में देखने को मिलती रही है। CIA के निदेशक विलियम बर्न्स ने उन्हें “ईरानी क्रांति का सच्चा अनुयायी” कहा था।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
जलीली ने 2013 में राष्ट्रपति पद का चुनाव भी लड़ा था। उन्हें कट्टरपंथी धर्मगुरु मोहम्मद तकी मेस्बाह यज्दी का समर्थन मिला, लेकिन वे तीसरे स्थान पर रहे। चुनाव हारने के बावजूद, ईरान के रूढ़िवादी हलकों में उनका प्रभाव अब भी कायम है। अमेरिकी और इजराइली तनाव के समय उनके नाम पर अक्सर रणनीतिक निर्णय लिए जाते रहे हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, लारीजानी की मौत के बाद जलीली सुरक्षा परिषद में उनके स्थायी या अस्थायी उत्तराधिकारी के रूप में उभर सकते हैं, जब तक कि सुप्रीम लीडर मोज़तबा खामेनेई नई नियुक्तियों का ऐलान नहीं करते।

