डिमोना में ईरानी मिसाइल अटैक से दहशत, खिड़की-दरवाजे उड़े, VIDEO में दिखी तबाही
ई दिल्ली. ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव अब खतरनाक स्तर पर पहुंचता नजर आ रहा है। शनिवार रात ईरान ने इजरायल के दक्षिणी शहर डिमोना और अराद पर ताबड़तोड़ मिसाइल हमले किए, जिससे भारी तबाही मच गई। इस हमले के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें आसमान से गिरते आग के गोले और जोरदार धमाके साफ देखे जा सकते हैं।
मिसाइल हमलों के बाद कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। वीडियो में देखा जा सकता है कि धमाकों की वजह से घरों के दरवाजे और खिड़कियां टूटकर बिखर गईं और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। हालांकि, इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
100 से ज्यादा लोग घायल
समाचार एजेंसी AFP के मुताबिक, अराद में 84 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 10 की हालत गंभीर बताई जा रही है। वहीं डिमोना में 33 लोग जख्मी हुए हैं। घायलों में एक 10 साल का बच्चा और एक 40 वर्षीय महिला भी शामिल हैं, जिनकी हालत गंभीर है।
नेतन्याहू ने कहा- बेहद कठिन रात
इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इसे “बेहद कठिन रात” बताया है। उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त आपातकालीन टीमों को भेजा गया है और ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी।
ईरान का दावा- संघर्ष के नए चरण की शुरुआत
ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने दावा किया कि डिमोना जैसे हाई-सिक्योरिटी इलाके में मिसाइलों का पहुंचना इस संघर्ष के नए चरण की शुरुआत का संकेत है।
न्यूक्लियर सेंटर के पास हमला, लेकिन रेडिएशन सुरक्षित
डिमोना शहर इजरायल के प्रमुख परमाणु अनुसंधान केंद्र के बेहद करीब स्थित है। International Atomic Energy Agency (IAEA) के अनुसार, किसी भी संवेदनशील परमाणु ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचा है और रेडिएशन स्तर सामान्य है।
गौरतलब है कि डिमोना का न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर 1958 से नेगेव रेगिस्तान में स्थित है और यह इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है।
नतान्ज हमले के बाद पलटवार
ईरान ने यह हमला अपने नतान्ज परमाणु सुविधा केंद्र पर हुए हमले के जवाब में किया है। नतान्ज में भूमिगत सेंट्रीफ्यूज हैं, जिनका इस्तेमाल यूरेनियम संवर्धन के लिए किया जाता है।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि इस ऑपरेशन में इजरायल के अलावा खाड़ी देशों में मौजूद कुछ सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।

