ईरान-अमेरिका तनाव: जंग अब पानी तक पहुंची, अरब देशों में ‘वॉटर क्राइसिस’ का बड़ा खतरा

डिसैलिनेशन प्लांट्स बने नए टारगेट, खाड़ी देशों की पीने के पानी की सप्लाई पर मंडराया संकट

वॉशिंगटन/मध्य पूर्व. अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच अब जंग का खतरा तेल से आगे बढ़कर पानी तक पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद ईरान ने सख्त चेतावनी दी है, जिससे पूरे मध्य पूर्व में चिंता बढ़ गई है।

ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने 48 घंटे के भीतर Strait of Hormuz को नहीं खोला, तो अमेरिका उसके पावर प्लांट्स को निशाना बनाएगा। इसके जवाब में ईरान ने कहा है कि यदि उसके ऊर्जा ढांचे पर हमला हुआ, तो वह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के ऊर्जा, आईटी और सबसे अहम डिसैलिनेशन प्लांट्स पर हमला करेगा।

क्या है डिसैलिनेशन प्लांट और क्यों है इतना अहम?

खाड़ी देशों में तेल की भरमार है, लेकिन पीने योग्य पानी की भारी कमी है। ऐसे में डिसैलिनेशन प्लांट समुद्र के खारे पानी को साफ कर पीने लायक बनाते हैं। यही कारण है कि ये प्लांट्स इन देशों की जीवनरेखा माने जाते हैं।

  • सऊदी अरब: करीब 70% पीने का पानी
  • कुवैत: लगभग 90% निर्भरता
  • ओमान: करीब 86%
  • यूएई: बड़ी आबादी इन्हीं प्लांट्स पर निर्भर

अगर इन प्लांट्स पर हमला होता है, तो कुछ ही दिनों में बड़े शहरों में पानी खत्म हो सकता है।

ईरान की रणनीति: ‘जैसे को तैसा’ जवाब

ईरान ने साफ कर दिया है कि वह हर हमले का जवाब उसी अंदाज में देगा। यदि उसके तेल या गैस प्लांट्स पर हमला होता है, तो वह खाड़ी देशों के समान ढांचे को निशाना बनाएगा। हाल के दिनों में सऊदी अरब में ड्रोन हमलों की घटनाएं इस खतरे को और गंभीर बनाती हैं।

पहले भी मिल चुकी है चेतावनी

ब्रिटिश अखबार The Guardian की रिपोर्ट के मुताबिक, 1983 में CIA ने चेताया था कि अगर इन प्लांट्स पर हमला हुआ, तो पूरे क्षेत्र में अराजकता फैल सकती है। लोग शहर छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं और हालात नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं।

हाल ही में ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने उसके क़ेश्म द्वीप पर स्थित एक प्लांट को निशाना बनाया, हालांकि अमेरिका ने इन आरोपों से इनकार किया। वहीं बहरीन ने भी अपने प्लांट पर हमले का दावा किया है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर वॉर का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर वॉर’ में बदलता है, तो इसके परिणाम बेहद खतरनाक होंगे।

  • पानी की सप्लाई ठप होने से कुछ ही दिनों में मानवीय संकट
  • बड़े शहरों में अफरातफरी और पलायन
  • समुद्री जीवन और पर्यावरण पर गंभीर खतरा

हालांकि अभी तक बड़े स्तर पर डिसैलिनेशन प्लांट्स पर हमले नहीं हुए हैं। कई विशेषज्ञ इसे ‘रणनीतिक संयम’ मानते हैं, क्योंकि पानी पर हमला सीधे मानवता के खिलाफ माना जाएगा और इससे वैश्विक स्तर पर भारी विरोध हो सकता है।

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