ईरान-इजरायल युद्ध: ईरान के परमाणु ठिकानों पर 7 बार हमला, UN को सौंपी लिस्ट

तेहरान/न्यूयॉर्क: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोल दिया है। 28 फरवरी को शुरू हुई जंग के बाद से अब तक ईरान के परमाणु केंद्रों पर कुल 7 बार हमले किए जा चुके हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को एक कड़ा पत्र लिखकर हमलों की पूरी फेहरिस्त सौंपी है।
हमलों की टाइमलाइन: कब और कहाँ गिराए गए बम?
ईरान द्वारा जारी किए गए आधिकारिक पत्र के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ने निम्नलिखित तारीखों पर ईरान की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया है:
- 1 मार्च: नतांज (Natanz) परमाणु सुविधा पर एक ही दिन में दो बार हमला।
- 17 मार्च: बुशहर (Bushehr) परमाणु पावर प्लांट से मात्र 350 मीटर दूर हमला।
- 21 मार्च: नतांज परमाणु केंद्र के कई हिस्सों पर भारी बमबारी।
- 24 मार्च: बुशहर पावर प्लांट की मुख्य परिधि के अंदर मिसाइल गिरी।
- 27 मार्च (ब्लैक फ्राइडे): इस दिन एक साथ तीन बड़े हमले हुए:
- बुशहर प्लांट पर तीसरी बार हमला।
- खोंदाब-अरक स्थित हेवी वाटर प्लांट पर अटैक।
- अर्दाकन-यज्द यूरेनियम प्रोसेसिंग साइट पर बमबारी।
ईरान की चेतावनी: ‘रेडियोएक्टिव प्रदूषण का खतरा’
विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने पत्र में चेतावनी दी है कि ये हमले केवल सैन्य कार्रवाई नहीं हैं, बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध हैं। उन्होंने कहा, “इन गैर-कानूनी हमलों से पूरे क्षेत्र में रेडियोएक्टिव प्रदूषण फैलने का खतरा है, जिसका पर्यावरण और इंसानों पर विनाशकारी असर पड़ सकता है।”
ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका (जो NPT का संरक्षक है) और इजरायल (जो परमाणु अप्रसार संधि से बाहर है) मिलकर ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रमों को नष्ट करने पर तुले हुए हैं।
UN और IAEA की चुप्पी पर उठाए सवाल
ईरानी विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पर गहरी निराशा व्यक्त की है। पत्र के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- संस्थाओं की विफलता: UN सुरक्षा परिषद और IAEA ने इन हमलों की निंदा तक नहीं की है।
- अमेरिका का रुख: अमेरिकी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय कानून को ‘बेवकूफी’ बताया है और बुशहर पावर प्लांट को निशाना बनाने की बात खुले तौर पर स्वीकारी है।
- विश्वसनीयता को क्षति: ईरान का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की निष्क्रियता ने UN और IAEA की साख को ‘अपूरणीय क्षति’ पहुंचाई है।



