न होर्मुज खुला, न ईरान झुका… ट्रंप ने क्यों लिया चौकाने वाला फैसला

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में चल रहे ईरान-अमेरिका युद्ध में अचानक बड़ा मोड़ आता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका जल्द ही ईरान पर सैन्य अभियान रोक सकता है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब न तो ईरान झुका है और न ही अमेरिका ने अपने प्रमुख रणनीतिक लक्ष्य हासिल किए हैं।
ट्रंप का बड़ा यू-टर्न
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका 2-3 हफ्तों के भीतर ईरान पर सैन्य कार्रवाई बंद कर देगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध खत्म करने के लिए ईरान के साथ कोई समझौता जरूरी नहीं है। ट्रंप का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुलवाना अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है।

क्यों बदल रहे हैं ट्रंप के सुर?
ट्रंप के बदलते रुख के पीछे कई वजहें सामने आई हैं:
- ईरान का कड़ा पलटवार: ईरान लगातार अमेरिकी और इजरायली हमलों का जवाब दे रहा है, जिससे युद्ध लंबा खिंच गया है।
- रिजीम चेंज में असफलता: अमेरिका की योजना थी कि ईरान की सरकार बदले, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
- होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना: ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया है, जो दुनिया की 20-25% तेल-गैस सप्लाई का मुख्य मार्ग है।
- NATO और सहयोगियों का ठंडा रुख: कई देशों ने खुलकर अमेरिका का समर्थन नहीं किया।
- वैश्विक और घरेलू दबाव: अमेरिका की कूटनीतिक छवि प्रभावित हुई, ट्रंप की लोकप्रियता भी घट रही है।
- आर्थिक दबाव: युद्ध से अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा, ईंधन की कीमतें बढ़ीं।
युद्ध की शुरुआत
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर मिसाइल हमला किया था, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई। इसका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता तोड़ना और सत्ता परिवर्तन कराना था। लेकिन इसके उलट ईरान ने जवाबी हमले किए और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित कर दी।
अब तक के हालात बताते हैं कि अमेरिका अपने रणनीतिक लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया। युद्ध लंबा और महंगा साबित हुआ। ऐसे में ट्रंप का युद्ध रोकने का फैसला मजबूरी और रणनीतिक दबाव का संकेत लगता है, न कि स्पष्ट जीत का।



